खेती में लाभ नहीं मिला तो, खड़ी कर दी बाजरा प्रोडक्ट कंपनी
खबर सार :-
हरियाणा के हिसार जिले में रहने वाले कोथ गांव के किसान ने आदर्श मिसाल पेश कर एक ऐसी कंपनी तैयार की है। जिसकी उन्होंने भी आशा नहीं की थी। वह अब बाजरा की खेती कर उसके प्रोडक्ट बनाकर बेच रहे हैं।
खबर विस्तार : -
हिसार, हरियाणा के हिसार जिले के कोथ गांव के एक प्रगतिशील किसान ने आदर्श मिसाल पेश की है। अपनी मेहनत से ज्यादा दिमागी और रिस्क के बल पर उनका मिशन कामयाब हुआ है। यह प्रेरणा बनकर उभरे हैं, राजपाल श्योराण। इन्होंने अपने दो एकड़ खेत में बाजरे का उत्पादन किया और इससे बिस्कुट बनाकर देश-विदेश में सप्लाई की। इनका प्रोडक्ट इतना पसंद आ रहा है कि वह कई देशों में पहचान बन गए।
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पारंपरिक खेती से हटकर कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग की ओर कदम बढ़ाने के लिए सरकार कई सालों से कह रही है। किसान ने खेती में बदलाव किया और अपनी आय कई गुना बढ़ाई। उन्होंने जैविक बाजरे में वैल्यू एडिशन का एक नया मानक भी स्थापित किया है। राजपाल श्योराण की बाजरे की खेती और उसके बिस्कुट की मुख्य बातें आज चर्चा में हैं। राजपाल श्योराण अपने खेत में पूरी तरह से जैविक तरीकों से बाजरे की खेती करते हैं। इसमें किसी भी तरह के रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। उनके बिस्कुट सेहत और स्वाद का एक बेहतरीन मेल हैं। इनकी खासियत है कि बिना किसी हानिकारक प्रिजर्वेटिव या मिलावट के तैयार किया जाता है।
एक दशक पहले प्राकृतिक खेती की शुरुआत की थी
यद्यपि इसकी पुष्टि किसान को ही करना है। उनका कहना है कि यह बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए एक स्वस्थ विकल्प बन जाते हैं। उनके तैयार किए गए बिस्कुट बहुत लोकप्रियता हुए हैैं। उनके प्रयासों के कारण ही स्थानीय बाजारों से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर में जगह बना रहे हैं। अक्सर छोटे किसानों को अपनी उपज स्थानीय बाजारों में कम मिलती है, वहीं उनको बाहर बेचने पर ज्यादा मुनाफा भी मिलता है। अब राजपाल कारोबार को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने में सफलता हासिल की है। उनके बिस्कुट की मांग विदेशों में होने लगी है। कृषि मेलों और विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी पहुंच रहती है।
वह छोटे किसानों के लिए एक आदर्श बन गए हैं। वह बाजरे को नहीं बेचते हैं। अनाज बेचने के बजाय, उससे बिस्कुट, कुकीज और अन्य उत्पाद बनाकर उसकी कीमत बढ़ाते हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि खेती से मुनाफा कमाने के लिए बहुत जमीन जरूरी नहीं है। तकनीक, नवाचार और प्रभावी मार्केटिंग कि जरिए इन्होंने कोथ कलां में फसल से अनोखे उत्पाद तैयार किए हैं। उनका कहना है कि इंग्लैंड, अमेरिका, नेपाल, मोरक्को और श्रीलंका से भी ऑनलाइन ऑर्डर मिल रहे हैं। राखीगढ़ी महोत्सव में भी उनके उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहे हैं। राजपाल श्योराण ने लगभग एक दशक पहले प्राकृतिक खेती की शुरुआत की थी।2017 में दिल्ली में एक किसान मेला लगाया गया था।
2017 में दिल्ली में एक किसान मेला लगाया गया था
उन्होंने बताया कि पहली बार 2017 में दिल्ली में एक किसान मेला लगाया गया था। इसमें बाजरे के बिस्कुट बिकते हुए देखे थे। वह गांव लौटने के बाद सोचने लगे कि इस दिशा में काम करना शुरू किया जाए। प्राकृतिक तरीके से उगाई गई फसलों से बिस्कुट बनाने के प्रयोग कई बार करना पड़ा। इसमें रागी, मक्का, अजवाइन, तिल, हल्दी और देसी खांड आदि गांव की सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया।
इससे कई तरह के बिस्कुट तैयार किए गए। उन्होंने बताया कि शुरुआत में बाज़ार में अपनी जगह बनाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी। बाद में वह पसंद किए जाने लगे। देश भर से आए पर्यटकों ने उनके उत्पादों में दिलचस्पी दिखाई, जिससे उन्हें कई ऑर्डर मिले। राजपाल श्योराण ने कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि केवल दो एकड़ ज़मीन वाला एक किसान अपनी ही फसल से उत्पाद तैयार करके उन्हें विदेशों में बेच सकेगा।
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