कैथलः बारिश ने मंडियों में paddy की फसल पर फेरा पानी, खुले में पड़ी लाखों क्विंटल उपज भीगी

खबर सार :-

बारिश होने से किसानों की फसल में नमी 17 प्रतिशत होने के बावजूद खरीद एजेंसियां धान खरीदने से बच रही थीं। उनका कहना था कि पीआर धान की खरीद में कटौती की शिकायतें पहले से हैं। लेकिन अब पड़े पैमाने पर फसल भीग चुकी है। इससे नुकसान भी होगा। अभी तो फसल पानी में ही है। इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
कैंथल में सरकारी प्लानः मंडी में सड़ रहा paddy, नुकसान उठाए किसान

खबर विस्तार : -

कैथल, जिले में गुरुवार सुबह हुई बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। सरकार कितने भी दावे कर ले, इस तस्वीर की सच्चाई को छिपाया नहीं जा सकता है। अचानक हुई बारिश ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया। हजारों क्विंटल अनाज पानी पानी हो गया। इतनी मनमानी साहब ठीक नहीें।

साढ़े चार बजे हुई बारिश ने किसानों को संभलने का मौका भी नहीं दिया। उनकी मुश्किलें ऐसी बढ़ा दीं कि खेतों में खड़ी धान की फसल बिछ गई। वहीं मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़ी लाखों क्विंटल धान की उपज भीग गई। पहले ही पीआर धान की खरीद में देरी हो रही थी अब जो कुछ है सब सामने है। एमएसपी नहीं मिलने की शिकायतों से किसान पहले से ही चूर था, अब बारिश से वह एकदम हताश और निराश हो चुका हैै। बड़ी-बड़ी योजनाएं सरकार के पास हैं, लेकिन धान की खरीद की समय पर नहीं करा पार्इ्र। इससे ज्यादा तो खराब बात यह है कि मंडी में पानी भरा हुआ हैै। इसमें धान पानी मे ही है।

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अचानक बरसने लगा पानी 

किसानों का कहना है कि छह महीने की मेहनत से तैयार की गई फसल अब आंखों के सामने खराब हो रही है। उनका कहना है कि मंडियों में उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। यहां जिले में कई मंडी हैं। इनमें कैथल, गुहला, सीवन, कलायत, राजौंद, पूंडरी और ढांड, लेकिन कहीं सुविधाएं नहीं हैं। बारिश का असर देखने को मिला, यदि सुविधाएं होतीं तो खरीद हो गई होती। खुले में फसल न होती। सबसे ज्यादा नुकसान खुले में ढेरियां लगाकर रखे गए धान को हुआ। जिन किसानों की फसल शेड के नीचे रखी थी, उसे अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ। सुबह अचानक मौसम बिगड़ने के कारण किसानों और आढ़तियों को धान पर तिरपाल डालने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। ज्यादा बोरियां बाहर पानी में पड़ी हैं। 

नुकसान के लिए मंडियां जिम्मेदार

किसानों का आरोप है कि मंडियों में तिरपाल और पानी की निकासी के पुख्ता इंतजाम नहीं है। इससे फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है। मंडियांें में कई जगह पानी भर गया था। जब इसको बहने का मौका मिला तो इसके साथ धान भी बहने लगा। बारिश के बाद अब भीगे हुए धान की खरीद में भी देरी होने की आशंका है। मंडी के लोग कब खरीद करेंगे? इनको जानकारी नहीं है। किसानों के अनुसार, फसल सूखने और नमी निर्धारित सीमा में आने तक खरीद प्रभावित रह सकती है। मंडियों में पहले से ही जगह की कमी है। अब और दिक्कत हो सकती है। किसानों की परेशानी बढ़ सकती है। कैथल की मंडियों में पानी भरा है। आरोप है कि बोरियों में धान अंकुरित होने लगा है। इससे उपज की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा है।

हजारों एकड़ में हैं सब्जियां

जिले में बारिश का असर अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिला। कहीं ज्यादा बारिष हुई हे कहीे कम। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कैथल में 28 एमएम, पूंडरी में 38 एमएम और गुहला में 16 एमएम बारिश दर्ज की गई। बारिश से खेतों में खड़ी धान की फसल को नुकसान पहुंचने के साथ सब्जी उत्पादक भी परेषान हो रहे हैं। किसानों की चिंता खेतों में पानी भरने ओर फसल गिरने से बढ़ गई। सीवन क्षेत्र में हजारों एकड़ में लगी सब्जियों की फसलों में पानी भरने की बात सामने आई है। इससे सब्जी उत्पादकों को भी आर्थिक नुकसान की आशंका है।

दस दिन से नहीं हुई खरीद

किसानों ने आरोप लगाया कि अधिकारी चाहते तो यह नौबत न आती। अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि इस बार धान की फसल तैयार करने के लिए किसानों को काफी मेहनत करनी पड़ी। मगर इसका नतीजा सामने मिल रहा है। शुरुआत में बारिश नहीं होने के कारण फसल सूख रही थीै अब इसको संभालना मुश्किल हो रहा है। अब कटाई के बाद मंडियों में खरीद के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। यदि इंतजार न कराते तो धान भीगता नहीं। किसानों के अनुसार, वे करीब दस दिन से मंडी में धान लेकर बैठे हैं, लेकिन खरीद नहीं हो रही। 

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