किसानों की आय बढ़ाने के विकल्प तलाश रही सरकार, आधुनिक तकनीक के कम हैं बाजार

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश की सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रही है। इसमें मुख्यमंत्री के साथ कई और मंत्री सहयोग कर रहे हैं। कृषि मंत्री बराबर कार्यालय, कार्यक्रम और किसानों के बीच समय दे रहे हैं।
यूपी की मशीनरी किसानों की आय के लिए गंभीर, मुख्यमंत्री, मंत्री और अफसरों का ध्यान खेतों पर

खबर विस्तार : -

कानपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की कोशिशें की जा रही हैं। इनके लिए वैज्ञानिक स्तर पर भी काम किया जा रहा है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार ने पूरी मशीनरी लगा दी है। ग्रामीण आजीविका मजबूत बनाने के लिए सबसे पहले खेती को ही उन्नतशील बनाया जाना है। यह भारतीय संस्कृति की जड़ है। इसीलिए तमाम प्रयासों के बीच ‘उत्तर प्रदेश 2.0ः कृषि से समृद्धि’ यूपी संवाद कार्यक्रम रविवार आयोजित किया गया। कानपुर के एक निजी होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में खेती की लागत कम करने पर जोर दिया यगया।

उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार का बराबर प्रयास चल रहा

ज्यादातर किसानों की यही समस्या रहती है। उत्पादन बढ़ाने के लिए भी सरकार का बराबर प्रयास चल रहा है। कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए अफसरों से बार बार कहा जा रहा है। यद्यपि वह कई क्षेत्रा में दौरा कर भी चुके हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने पर चर्चा हुई। कृषि विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और प्रगतिशील किसानों ने बताया कि तकनीक, फसल विविधीकरण, बाजार तक पहुंच और खेती के साथ दूसरे व्यवसाय अपनाकर किसानों के लिए आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। इससे पहले भी समय पर किसानों को उनका लाभ पहुंचाने की सीएम ने हिदायत दी थी।

अभी तक खेती किसानी केवल सूर्य प्रताप शाही के पास थी। वह ही निर्दश देते थे। पिछले दिन इसमें पंचायतीराज मंत्री ने कई अनुभव बताए। प्रदेश सरकार के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने ‘किसान भाई-बंपर कमाई’ सत्र में अपने खेती-किसानी के दिनों के अनुभव साझा किए। वह कई संस्मरणों को उदाहरण के तौर पर सुना रहे थे। उन्होंने एक-एक किलो वजनी आलू के पैदावार की जानकारी दी। लहसुन की फसल में मेड़ों पर शलगम उगाने और पांच-पांच किलो तक के शलगम उपजने का भी जिक्र किया। मटर की खेती का भी जिक्र किया। मंडी के बारे में कह कि उनकी उपज देखकर कारोबारियों को पहले विश्वास नहीं हुआ।

60 दिनों में तैयार होने वाली फसल का ही वह ज्यादा उपयोग करतेे

वह जब खेत तैयार करते थे लोग दंग रह जाते थे। बताया कि करीब 60 दिनों में तैयार होने वाली फसल का ही वह ज्यादा उपयोग करतेे थे , उन्होंने लोगों को काफी जानकारी दी। राजनीतिक सफर का भी उल्लेख किया। अपने राजनीतिक सफर के बारे में राजभर ने बताया कि कांशीराम के विचारो को वह अपनाते थे। इसी तरह कार्यक्रम काफी रोचक बना दिया गया। इसमें सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद भी पहुंचे थे। यहां पर आयोजन को ज्ञानवर्धक बनाने के लिए कइ सेक्टरों मे बांटा गया।

उन्होंने ‘पशु नहीं, प्रॉफिट पालन’ सत्र में निषाद समाज की सामाजिक और आर्थिक प्रगति पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने समाज को आगे बढ़ाने में शिक्षा, सरकारी सुविधाओं और रोजगार के अवसरों की भूमिका पर जोर दिया। मत्स्य पालन को लगातार बढ़ाने पर हर साल जोर दिया जाता है। कई विषय विशेषज्ञों के कहने पर मामला और उग्र हो जाता था। लेकिन अब कुछ किसानों ने अनुदान लेकर यह काम शुरू कराया हैै। मछली पालन को आय के साधन के रूप में विकसित करने की संभावनाएं भी इस चर्चा का हिस्सा रहीं। सत्र में समाज के लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने और उन्हें आर्थिक रूप से आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने का मुद्दा प्रमुख रहा।

अच्छी पैदावार के बाद भी बिखर जाएगा किसान

‘सरकार और बाजार दोनों किसी के हाथ में नहीं होते। लेकिन सरकार किसान और फसल दोनों चाह रही है। यदि वह फसल तैयार कर लेता है, तो उसके प्रति सरकार का उत्साहवर्धन रहता होगा। हर फसल पर सरकार का प्रचार प्रयार किया जा रहा है। बिना इसके मुआवजा की प्रक्रिया पूरी ही नहीं हो सकती है। सांसद रमेश अवस्थी ने किसानों की उपज के उचित मूल्य और बाजार तक उनकी पहुंच से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि खेती में उत्पादन बढ़ाने के साथ उपज की बिक्री की बेहतर व्यवस्था होना भी जरूरी है। यदि उचित विक्री नहीं हुई तो किसान अच्छी पैदावार के बाद भी बिखर जाएगा। 

योजनाओं में सेंसर आधारित तकनीक का प्रदर्शन कराया जा रहा है। कई किसानों के पास ड्रोन है। इनसे खेतों में दवा का छिडकावा किया जा रहा है। अच्छी पैदावार उसकी मिट्टी  पर भी निर्भर है। इसकी स्थिति समझने तथा फसल के लिए जरूरी पोषक तत्वों का आकलन किसान को करना होगा। 

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