कठोर हो रही है मिट्टी तो कर लें सुधार, दलहन फसलें हैं मिट्टी का उपचार
खबर सार :-
किसानों को ज्यादा लाभ के लिए दलहन फसलों की बुवाई करनी चाहिए। इससे उनको कई फायदे हैं। अन्य फसलों के लिए भी दलहन मिट्टी का उपचार करवा देती हैं।
खबर विस्तार : -
लखनऊ : किसान के खेत में फसलें अब अनुकूल उत्पादन नहीं दे रही हैं। इसका कारण है कि मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए किसान ने प्रयास नहीं किया है। खेतों से केंचुए दूर हो गए। इससे उनके साथ मिट्टी की उर्वराशक्ति कमजोर हो गई। इस हालत में फसलों का उत्पादन भी कम होने लगा है। कुछ किसान अपने खेतों में धान और गेहूं के अलावा दलहन फसलों की बुवाई नहीं करते हैं। यही कारण है कि खेतों से केंचुए दूर हो रहे हैं। इन दलहनी फसलों से लाभ भी ज्यादा मिलता है।
यह भी पढ़ें : जौ के बिना ये सब खाली-भोजन की थाली, पूजा की वेदी, खेत में हरियाली
दलहन फसलों की मिट्टी केंचुए को करती है प्रोत्साहित
दलहनी फसलों से केवल आर्थिक लाभ ही नहीं, खेत भी समृद्ध होता है। इसकी मिट्टी उपजाऊ बनती है और पोषक तत्वों से मिट्टी को भर देती हैं। दलहनी पौधे जिस मिट्टी में होते हैं, उसमें केंचुए की वृद्धि होती है। इसका कारण है कि यह मिट्टी केंचुए को प्रोत्साहित करती है। पौधों के लिए पोषक तत्व उपलब्ध कराने में केंचुए का बड़ा योगदान होता है। मिट्टी की कठोरता को भी इनसे दूर करने में मदद मिलती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब मिट्टी मुलायम होती है, तब पौधों की जड़ों की वृद्धि होती है। केंचुए आने से मिट्टी में वायु का संचार होता है।
कुपोषण दूर करने में सहायक है होता
मानव शरीर के लिए भी दलहनी फैसले ज्यादा फायदेमंद मानी गई हैं। इसमें नाइट्रोजन प्रचुर मात्रा में होता है। दालें कुपोषण कम करने मे भी सहायक होती हैं। यदि इसकी बुवाई की जाती है तो पौष्टिक भोजन के उत्पादन में एक सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेगा। इसे भोजन में शामिल करने से कुपोषण, पोषक तत्वों की कमी, मोटापा, भोजन संबंधी बीमारियां जैसी चुनौतियों से लड़़ने में मदद मिलती है।
किसानों के सामने सितंबर के बाद सबसे ज्यादा चिंता रहती है कि वह कौन सी फसल की बुवाई करें। इसलिए उनके सामने यह बहुत साधारण सरल और ज्यादा कमाई वाला विकल्प है। किसान धान और गेहूं से ज्यादा लाभ वाली फसल बो सकते हैं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कृषि विशेषज्ञ प्रोफेसर मुजीबुर रहमान खान ने अपनी शोध के आधार पर इस बात की जानकारी मीडिया को दी की रवी के सीजन की शुरुआत के साथ ही कौन सी फसल बोई जाए, जिसमें कम लागत और ज्यादा मुनाफा मिले यह सवाल उठता है।
अक्टूबर और नवंबर हैं किसान की परीक्षा के दिन
अक्टूबर, नवंबर का महीना फसलों की बुवाई के लिए बेहद महत्व रखने वाला है। प्रोफेसर खान कहते हैं की किसन गेहूं की खेती तक ही निर्भर ना रहें, उनके सामने तिलहन, सब्जियों के अलावा दलहन की फैसले भी महत्व रखती हैं। इन फसलों की बुवाई करें। वह लाभकारी फसलों की ओर रुख करें। लागत कम ज्यादा मुनाफा को पहचानें। रवी सीजन की शुरुआत में ही मौसम और वातावरण बुवाई के लिए बहुत महत्व रखता है।
यह वह समय होता है, जब किसानों के सामने बहुत सारी फसलों के बारे में लोग बताया करते हैं। उत्तर प्रदेश में ज्यादातर गेहूं और धान की खेती की जाती है। गेहूं की खेती में मजदूरी, पानी और खाद का खर्चा काफी हो जाता है। इसकी अपेक्षा यदि किसान दलहनी फसल को अपनाता है तो उन्हें कम खर्चा वहन करना पड़ेगा।
दलहन में किसान के पास कई विकल्प
इन फसलों में मसूर, चना और मटर के अलावा तिलहनी में सरसों, अलसी भी हो सकती है। दाल वाली फैसलें इस समय काफी लाभकारी हैं। हमारे यहां उत्तर प्रदेश में मिट्टी की गुणवत्ता उत्पादन के लिए सही है। जहां कहीं पर मिट्टी में कमी है, वहां अन्य फसल विकल्प के तौर पर चुन सकते हैं। दालों की फसल बुवाई करने से पहले कुछ दवाओं का इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञ से पूछ कर जरूर करें। फसल बोने के एक दो दिन पहले ही इनका इस्तेमाल किया जाता है। दलहनी फसलों की मिट्टी के लिए भी यही तौर तरीके अपनाए जाते हैं। उम्मीद की जा रही है कि किसान ज्यादा लाभ की कोशिश करेगा।
यह भी पढ़ें : कहीं भूखे न रह जाएं हाथी और बाघ: छिन सकता है वन्य जीवों के रहने का ठिकाना
अन्य प्रमुख खबरें
-
किसान और गरुड़ पक्षी में निभ रही दोस्ती, मक्का अब हो गया सुरक्षित
2026-09-20
-
एक साथ कई लाभ वाली फसल है जौ, बीज पर भी लें अनुदान
2026-09-19
-
असम के बक्सा में हाथी-बाघ पर आफत, जंगली घास छीन रही भोजन
2026-09-18
-
ड्रोन से खेतों के कीट मारेंगे किसान, जैविक खेती छोड़ी तो ब्लैक लिस्ट में नाम
2026-09-18
-
जोधपुर गया औरैया के 50 किसानोें का दल, पांच दिन सीखेंगे उन्नतखेती
2026-09-16
-
गुस्से में मंत्रीः खेतों तक पहुंचाएं योजनाएं, किसानों का करें सहयोग-शाही
2026-09-15
-
असम के सोनापुर में मछली पालन में नवाचार, आधुनिक तकनीक से मिल रही सफलता
2026-09-15
-
आत्मनिर्भरता का example : सूखे में भी 30 day में आ गईं मोठ की फलियां
2026-09-14
-
हल्दी की खेती पर सरकारी ध्यान, किसानों की आय में हो रही वृद्धि
2026-09-13
-
बाजरा: जमीन का जल बचाए, महफिल को व्यंजन से भरे
2026-09-11
-
कृषि मंत्री शाही की अपील, फसलों के बीजों की बुकिंग में फ्री का लें लाभ
2026-09-07
-
पैसे कमाने हैं तो बदलें परंपराएं, गोमा यशी बेल लगाएं
2026-09-07
-
रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन से मजबूत हुई खाद्य सुरक्षा, भंडारण नेटवर्क भी बना सहारा
2026-09-03
-
‘कैच द रेन’ अभियान में छत्तीसगढ नंबर-1, बारिश की हर बूंद पर कब्जा
2026-09-02
-
प्रकृति का वरदान है लामज्जक, जोड़ों के दर्द और त्वचा रोगों में देता है राहत
2026-09-02