2025-26 में 376.563 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान, PACS के जरिए गांवों तक पहुंच रहा विकेंद्रीकृत भंडारण का मॉडल
खबर सार :-
भारत में 2025-26 के दौरान खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल से 5.3 प्रतिशत अधिक है। बढ़ते उत्पादन के साथ विकेंद्रीकृत भंडारण व्यवस्था खाद्य सुरक्षा को नया आधार दे रही है। PACS के जरिए स्थानीय गोदामों का विस्तार किसानों को संकट में बिक्री से बचाने, बेहतर कीमत पाने, परिवहन लागत घटाने और ग्रामीण स्तर पर कृषि गतिविधियों में विविधता लाने में मदद कर सकता है।
खबर विस्तार : -
Indian Foodgrain Production : भारत में खाद्यान्न उत्पादन और खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर तस्वीर मजबूत होती दिख रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन रहने का अनुमान है। आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, यह पिछले वित्त वर्ष के 357.732 मिलियन टन उत्पादन की तुलना में करीब 18.8 मिलियन टन अधिक है। यानी खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 5.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है।
उत्पादन में यह संभावित वृद्धि ऐसे समय सामने आई है, जब देश में बड़ी आबादी को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ कृषि उपज के सुरक्षित भंडारण पर भी जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक संचालित करता है, जिसके दायरे में करीब 80 करोड़ लोग आते हैं।
अनाज के साथ भंडारण क्षमता बढ़ाने पर जोर
आधिकारिक फैक्टशीट में कहा गया है कि कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा प्रयासों के विस्तार के साथ देशभर में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण ढांचे की जरूरत लगातार बढ़ रही है। इसी दिशा में सहकारी क्षेत्र में वर्ष 2023 में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों यानी PACS के माध्यम से स्थानीय स्तर पर भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। योजना को संस्थागत समन्वय और वित्तीय सहायता तंत्र के जरिए समर्थन दिया जा रहा है, ताकि किसानों और स्थानीय सहकारी संस्थाओं को इसका सीधा लाभ मिल सके।
11 राज्यों से शुरू हुआ पायलट, अब विस्तार
विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना की शुरुआत 11 राज्यों में पायलट परियोजनाओं के साथ हुई थी। इन परियोजनाओं में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना, असम, कर्नाटक और त्रिपुरा शामिल हैं। फैक्टशीट के मुताबिक, जुलाई 2026 तक देशभर में 313 PACS में गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका था। इन गोदामों से 1.80 लाख टन यानी 1.80 एलएमटी से अधिक की भंडारण क्षमता तैयार हुई है। इससे स्थानीय स्तर पर अनाज को सुरक्षित रखने के लिए बुनियादी ढांचा विकसित हुआ है। इस पहल में केवल भंडारण क्षमता बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि गुणवत्ता मानकों, पारदर्शिता और संचालन की व्यवहार्यता को भी महत्वपूर्ण माना गया है। पायलट परियोजनाओं ने सहकारी संस्थाओं के स्तर पर स्थानीय भंडारण मॉडल की व्यवहारिकता को सामने रखा है।
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किसानों को संकट में बिक्री से बचाने की कोशिश
विकेंद्रीकृत भंडारण व्यवस्था का एक बड़ा उद्देश्य किसानों को अपनी उपज तुरंत बेचने की मजबूरी से राहत देना है। पर्याप्त स्थानीय भंडारण सुविधा उपलब्ध होने पर किसान अपनी उपज को सुरक्षित रख सकते हैं और बाजार की स्थिति के अनुसार बेहतर कीमत मिलने का इंतजार कर सकते हैं। इससे संकट में बिक्री यानी मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचने की स्थिति को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, स्थानीय गोदामों की उपलब्धता से खरीद केंद्रों, भंडारण केंद्रों और उचित मूल्य की दुकानों के बीच अनाज की आवाजाही में लगने वाली परिवहन लागत घटाने की संभावना है। इससे खाद्य वितरण व्यवस्था को अधिक कुशल बनाने में मदद मिल सकती है।
PACS की भूमिका भी हो रही व्यापक
योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू PACS की भूमिका का विस्तार करना है। पारंपरिक रूप से कृषि ऋण से जुड़ी इन समितियों को अब भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण जैसी गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इससे स्थानीय स्तर पर कृषि से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और किसानों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर पैदा होने की उम्मीद है। फैक्टशीट के अनुसार, योजना कृषि गतिविधियों में विविधता लाने में भी मदद कर सकती है। स्थानीय सहकारी संस्थाओं को अधिक जिम्मेदारियां मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बुनियादी ढांचे और सेवाओं का विस्तार संभव होगा।
खाद्य सुरक्षा को मिलेगा लंबी अवधि का आधार
पायलट परियोजनाओं ने स्थानीय स्तर पर अनाज भंडारण की व्यवहारिकता का महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है। बढ़ते कृषि उत्पादन के बीच यदि भंडारण क्षमता भी उसी अनुपात में बढ़ती है, तो फसल कटाई के बाद होने वाली बर्बादी को कम करने और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। कुल मिलाकर, 376.563 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान और PACS आधारित विकेंद्रीकृत भंडारण ढांचे का विस्तार भारत की खाद्य सुरक्षा रणनीति के दो महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित करता है। एक ओर उत्पादन बढ़ाने पर जोर है, वहीं दूसरी ओर उपज को सुरक्षित रखने, किसानों को बेहतर बाजार विकल्प देने और वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें.....40 परियोजनाओं को लेटर ऑफ कम्फर्ट, कई और परियोजनाएं कर रहीं ब्रांड का विस्तार
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...
1. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का खाद्यान्न उत्पादन कितना रहने का अनुमान है?
तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन रहने का अनुमान है।
2. खाद्यान्न उत्पादन में कितनी बढ़ोतरी का अनुमान है?
पिछले वर्ष के 357.732 मिलियन टन उत्पादन की तुलना में करीब 18.8 मिलियन टन यानी 5.3 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।
3. विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना क्या है?
यह योजना स्थानीय स्तर पर अनाज के भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शुरू की गई है। इसमें PACS की महत्वपूर्ण भूमिका है।
Indian Foodgrain Production : भारत में खाद्यान्न उत्पादन और खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर तस्वीर मजबूत होती दिख रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के तीसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन रहने का अनुमान है। आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, यह पिछले वित्त वर्ष के 357.732 मिलियन टन उत्पादन की तुलना में करीब 18.8 मिलियन टन अधिक है। यानी खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 5.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है।
उत्पादन में यह संभावित वृद्धि ऐसे समय सामने आई है, जब देश में बड़ी आबादी को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ कृषि उपज के सुरक्षित भंडारण पर भी जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक संचालित करता है, जिसके दायरे में करीब 80 करोड़ लोग आते हैं।
अनाज के साथ भंडारण क्षमता बढ़ाने पर जोर
आधिकारिक फैक्टशीट में कहा गया है कि कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा प्रयासों के विस्तार के साथ देशभर में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण ढांचे की जरूरत लगातार बढ़ रही है। इसी दिशा में सहकारी क्षेत्र में वर्ष 2023 में विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों यानी PACS के माध्यम से स्थानीय स्तर पर भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। योजना को संस्थागत समन्वय और वित्तीय सहायता तंत्र के जरिए समर्थन दिया जा रहा है, ताकि किसानों और स्थानीय सहकारी संस्थाओं को इसका सीधा लाभ मिल सके।
11 राज्यों से शुरू हुआ पायलट, अब विस्तार
विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना की शुरुआत 11 राज्यों में पायलट परियोजनाओं के साथ हुई थी। इन परियोजनाओं में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु, तेलंगाना, असम, कर्नाटक और त्रिपुरा शामिल हैं। फैक्टशीट के मुताबिक, जुलाई 2026 तक देशभर में 313 PACS में गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका था। इन गोदामों से 1.80 लाख टन यानी 1.80 एलएमटी से अधिक की भंडारण क्षमता तैयार हुई है। इससे स्थानीय स्तर पर अनाज को सुरक्षित रखने के लिए बुनियादी ढांचा विकसित हुआ है। इस पहल में केवल भंडारण क्षमता बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि गुणवत्ता मानकों, पारदर्शिता और संचालन की व्यवहार्यता को भी महत्वपूर्ण माना गया है। पायलट परियोजनाओं ने सहकारी संस्थाओं के स्तर पर स्थानीय भंडारण मॉडल की व्यवहारिकता को सामने रखा है।
ये भी पढ़ें....कृषि मंत्री रामविचार नेताम के दो टूक, कहा किसानों के साथ धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं, लाइसेंस रद्द किया जाएगा
किसानों को संकट में बिक्री से बचाने की कोशिश
विकेंद्रीकृत भंडारण व्यवस्था का एक बड़ा उद्देश्य किसानों को अपनी उपज तुरंत बेचने की मजबूरी से राहत देना है। पर्याप्त स्थानीय भंडारण सुविधा उपलब्ध होने पर किसान अपनी उपज को सुरक्षित रख सकते हैं और बाजार की स्थिति के अनुसार बेहतर कीमत मिलने का इंतजार कर सकते हैं। इससे संकट में बिक्री यानी मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचने की स्थिति को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, स्थानीय गोदामों की उपलब्धता से खरीद केंद्रों, भंडारण केंद्रों और उचित मूल्य की दुकानों के बीच अनाज की आवाजाही में लगने वाली परिवहन लागत घटाने की संभावना है। इससे खाद्य वितरण व्यवस्था को अधिक कुशल बनाने में मदद मिल सकती है।
PACS की भूमिका भी हो रही व्यापक
योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू PACS की भूमिका का विस्तार करना है। पारंपरिक रूप से कृषि ऋण से जुड़ी इन समितियों को अब भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण जैसी गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इससे स्थानीय स्तर पर कृषि से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और किसानों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर पैदा होने की उम्मीद है। फैक्टशीट के अनुसार, योजना कृषि गतिविधियों में विविधता लाने में भी मदद कर सकती है। स्थानीय सहकारी संस्थाओं को अधिक जिम्मेदारियां मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बुनियादी ढांचे और सेवाओं का विस्तार संभव होगा।
खाद्य सुरक्षा को मिलेगा लंबी अवधि का आधार
पायलट परियोजनाओं ने स्थानीय स्तर पर अनाज भंडारण की व्यवहारिकता का महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है। बढ़ते कृषि उत्पादन के बीच यदि भंडारण क्षमता भी उसी अनुपात में बढ़ती है, तो फसल कटाई के बाद होने वाली बर्बादी को कम करने और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। कुल मिलाकर, 376.563 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान और PACS आधारित विकेंद्रीकृत भंडारण ढांचे का विस्तार भारत की खाद्य सुरक्षा रणनीति के दो महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित करता है। एक ओर उत्पादन बढ़ाने पर जोर है, वहीं दूसरी ओर उपज को सुरक्षित रखने, किसानों को बेहतर बाजार विकल्प देने और वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें.....40 परियोजनाओं को लेटर ऑफ कम्फर्ट, कई और परियोजनाएं कर रहीं ब्रांड का विस्तार
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...
1. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का खाद्यान्न उत्पादन कितना रहने का अनुमान है?
तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन रहने का अनुमान है।
2. खाद्यान्न उत्पादन में कितनी बढ़ोतरी का अनुमान है?
पिछले वर्ष के 357.732 मिलियन टन उत्पादन की तुलना में करीब 18.8 मिलियन टन यानी 5.3 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।
3. विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना क्या है?
यह योजना स्थानीय स्तर पर अनाज के भंडारण, प्रसंस्करण, खरीद और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शुरू की गई है। इसमें PACS की महत्वपूर्ण भूमिका है।
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