लामज्जक जोड़ों के दर्द और त्वचा रोगों में देता है आराम, पहचान के बाद ही करें इस्तेमाल
खबर सार :-
माना जा रहा है कि लामज्जक जोड़ों के दर्द और त्वचा रोगों में आराम देता है। लेकिन यह एक पौधा है, इसका दवाओं की तरह उपयोग करने से पहले चिकित्सकों की राय लेना जरूरी होता है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्लीः हमारे आसपास भौगोलिक क्षेत्र में तमाम ऐसे पेड़ पौधे पाए जाते हैं, जिनके बारे में हमें जानकारी नहीं होती है। लेकिन वह बड़े गुणकारी होते हैं। ऐसे ही पौधे में लामज्जक का भी नाम आता है। इनका इस्तेमाल सदियों से आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में अलग-अलग तरह से किया जाता रहा है। लामज्जक भी आयुर्वेद में इस्तेमाल किए जाने वाला ऐसा ही एक औषधीय पौधा है। आज भी वैद्या लोग चिकित्सा पद्धतियों में बुखार, गठिया, शरीर के दर्द और त्वचा से जुड़ी कुछ समस्याओं में इसका उपयोग करना बताते हैं।
यह भी पढ़ें : लहन उत्पाद में भी हम नहीं बन पाए आत्मनिर्भर, दालों के दामों से सब जाहिर
लामज्जक को बहु वर्षीय जड़ी बूटी की उपाधि दी
लामज्जक को बहु वर्षीय जड़ी बूटी की उपाधि दी गई है। आयुष मंत्रालय ने भी नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर बताया कि लामज्जक एक बहुवर्षीय जड़ी-बूटी है। बहु वर्षीय का तात्पर्य है कि एक बार कहीं उग आए तो यह सालों साल चलता रहता है। इसे ज्यादा खाद और पानी की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है। अनुकूल परिस्थितियों में यह साल दर साल बढ़ता रहता है। वैद्य अपने-अपने ढंग से इसका इस्तेमाल करते हैं। आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में इसका उपयोग बुखार में किया जाता है।
बुखार और भी रोगों के कारण हो सकता
लामज्जक का पारंपरिक उपयोग बुखार में किया जाता रहा है। यह शरीर में बढ़ी गर्मी को संतुलित करता है। इसका उपयोग करने के दौरान यह भी देखना पड़ता है कि रोगी को कोई दूसरी और दिक्कत तो नहीं है। इसलिए पूरी तरह से लामज्जक पर निर्भर रहना ठीक नहीं है । शरीर में तपन या बुखार और भी रोगों से के कारण हो सकता है। केवल किसी जड़ी-बूटी पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय जांच जरूरी है। लामज्जक का इस्तेमाल पारंपरिक गठिया जैसी स्थितियों में भी बताया जाता है। शरीर या गठन में दर्द होने पर भी लोक चिकित्सा के अंतर्गत इसका उपयोग किया जाता है।
लेकिन लोक चिकित्सा दवा से पहले इस बात को जरूर पुष्टि कर लेना चाहता है कि संबंधित व्यक्ति को वास्तव में गठिया ही है। दर्द का कारण जानना जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग समस्याओं का उपचार भी अलग होता है। लामज्जक का उपयोग विभिन्न त्वचा संबंधी दिक्कतों में किया जाता है। इसका इस्तेमाल त्वचा संबंधित रोगों में भी किया जाता है। बशर्तें यह मालूम होना चाहिए कि वास्तव में बीमारी क्या है? अन्यथा त्वचा बहुत संवेदनशील होती है। उन पर इसका विपरीत असर पड़ सकता है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में प्राकृतिक चीजें भी एलर्जी पैदा कर सकती हैं।
परिस्थितियों के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता
लामज्जक की रोपाई का समय जून से जुलाई के बीच बताया गया है। हालांकि मौसम, मिट्टी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है। हालांकि सीजन निकल जाने के बाद भी फसल की पैदावार होती रहती है। ऐसे कई उदाहरण हैं। बता दें कि लामज्जक घास कुल से संबंधित पौधा है। कई बार ऐसा देखा गया है कि एक जैसी पत्तियां होने पर लोगों ने दूसरे पौधे की पत्तियों का इस्तेमाल कर लिया है। इसलिए इस घास जनित पौधे की पूरी तरह से पहचान जरुरी होता है।
यह भी पढ़ें : स्वाद ही नहीं, सेहत का खजाना है इमली, पेट की बीमारियों की दवा है इमली
अन्य प्रमुख खबरें
-
farmers को सरकार कर रही मदद, धान के बदले पसंद कर रहे दूसरी crops
2026-10-17
-
चमोली की कीवी अब दिल्ली के बाजारों में, 200 क्विंटल खेप रवाना
2026-10-17
-
कैंथल में सरकारी प्लानः मंडी में सड़ रहा paddy, नुकसान उठाए किसान
2026-10-15
-
अवसरों का लाभ लेने को तैयार हैं महिलाएं, फसल देसी हो या हो विदेशी
2026-10-15
-
modern होगा किसान मेला, Solar से चलेगा थ्रेशर
2026-10-14
-
किसानों तक लाभ पहुंचाएंगे योजना अधिकारी, समय में काम निपटाने के निर्देश
2026-10-13
-
दो गुनी आय के लिए मददगार होगा खेतों में भरा पानी, रांठ में खेतों में बना रहे तालाब
2026-10-13
-
गुजरात में दमन-गंगा नदी पर जल्द बनेगा बैराज, सिंचाई को होगा फायदा
2026-10-12
-
धन मिलते ही खर्च का ब्योरा तैयार, बीज और खाद का बजट भी जारी
2026-10-11
-
उद्यानिकी योजनाओं से खेती को मिला नया विस्तार, परिवार की आर्थिक स्थिति हुई मजबूत
2026-10-10
-
बूंद-बूंद पानी की कीमत समझ रही सरकार, तेलंगाना के कई जिलों में पानी की हाहाकार
2026-10-10
-
MP में MSP पर धान खरीद के लिए 6.80 लाख किसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन
2026-10-09
-
कर्नाटक में सूखे से 90 प्रतिशत फसलें प्रभावित, राज्य सरकार देगी राहत
2026-10-08
-
रबी उत्पादन में 30 लाख मीट्रिक टन वृद्धि का लक्ष्य, दलहन-तिलहन के बीजों पर अनुदान
2026-10-07
-
Siwan में उद्यान निदेशालय खुशबू पर फिदा, अनुदान देकर उगवा रहे गेंदा फूल
2026-10-07