घर के खाने पर महंगाई की मार, पहले प्याज, टमाटर अब चीनी भी महंगी

खबर सार :-

पिंपरी-चिंचवड़, खाद्य पदार्थों में बढ़े दामों पर व्यापारी और खरीददार दोनों परेशान हैं। महंगाई, किचन पर इतनी हावी है कि घर में कम पैसों में तैयार होने वाला भोजन अब बेस्वाद होने लगा है।
खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी, कारोबारी संग खरीददार परेशान

खबर विस्तार : -

पिंपरी-चिंचवड़ : आमदनी के एवज में कीमतों में तेजी ज्यादा आ गई है। खाना पकाने वाली खाद्य वस्तुओं में किन-किन चीजों से दूरियां बना ली जाएं? हर वस्तु के दाम बढ़े हुए हैं। प्याज, टमाटर, अदरक, दाल, तेज के दाम लगातार ऊपर आए हैं। अब तो चीनी के दाम भी आसामान पर हैं। हरी सब्जी शायद ही कभी सही दाम पर मिले। इससे घरों के बजट पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

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इस पर कारोबारियों के साथ खरीदार भी परेषान हैं। किसानों को भी बढ़े दाम का ज्यादा मुनाफा नहीं मिल रहा है। वह भी सरकार से महंगाई कम करने की अपील कर रहे है। प्याज विक्रेता रामबोधन साहू ने कहा कि कम स्टॉक और कम आवक की वजह से कीमतें बढी़ हैं। वहीं खरीददार श्रवण कुमार कहते हैं कि बढ़ती कीमतों का गरीबों पर ज्यादा असर पड़ता है। 

इस बार प्याज की आमद कम हुई

प्याज विक्रेता रामबोधन ने बाजारों की हालत पर अपनी राय दी। कहा कि इस साल बाजार में माल की सप्लाई 40 प्रतिशत कम हो गई है। पिछले साल की तुलना में प्याज की कीमत को लगभग आधा बताया। कहा कि 20 से 25 रुपए प्रति किलो प्याज बाजार में था। उनका कहना था कि इस साल सप्लाई काफी दिनों से प्रभावित रही है। इसमें 40 प्रतिशत की कमी देखी गई। इसके कारण प्याज की कीमतें 40 से 50 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। उन्होंने डीजल की बढ़ती कीमतों को असल कारण बताया। इससे ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ गया है। 

बरूदी शौक ने बिगाड़ दिया खेल

अमेरिका, रूस, यूक्रेन, ईरान और इजरायल का बारूदी खेल इसके लिए जिम्मेदार है। उनका कहना है कि  किसानों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसान देषराज कहते हैं कि पहले गर्मी में फसल को पानी नहीं मिला, जब मिला तो कुदरत ने फसल सड़ा डाली। उनकी लगभग 40 प्रतिशत फसल खराब हो गई है। बहुत से किसानों के साथ ऐसा ही हुआ।

इससे बाजार में कीमतें और बढ़ गई। रामबोधन कहते हैं कि अब जरूरी इस बात की है कि कीमतों में बढ़ोतरी रोकने के लिए माल के आवक पर ध्यान देना चाहिए। सरकार को कारोबारियों के डंप स्टॉक पर ध्यान देने की जरूरत है। इस समय कालाबाजारी हावी है। वह लोग सक्रिय हो गए हैं। इसलिए सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। 

गुड़ तो पहले से ही महंगा था

एक महिला ग्राहक ने कहा कि गरीब 400 के करीब कमाते हैं। उनके लिए साग सब्जी और अच्छा खाना परेषान करने वाली चीजें हैं। प्याज और चीनी के दाम बढ़ने से जेब पर बड़ा बोझ बन गए हैं। महिला ने कहा कि यही हाल शक्कर का है। गुड़ तो 80 में पहले भी था, लेकिन चीनी कुछ दिन पहले 40-45 रुपए किलो बिक रही थी। अब इसे 70 रूपये में खरीदना मुमकिन नहीं है। आम आदमी को चाय छोड़ना पड़ेगा। महिला ने सरकार से मांग की है कि वह इस पर ध्यान दं। 

नई फसल आने तक रह सकती है दिक्कत

वहीं, मालेगांव बाजार में प्याज की कीमतें बढ़ने से लोग खफा हैं। हालत यह है कि 2,500 रुपए से बढ़कर 3,500-3,800 रुपए प्रति क्विंटल में बिक रहा है। व्यापारियों का कहना है कि भारी बारिश से फसल को नुकसान हुआ है। नई फसल आने तक यह दिक्कत रह सकती है। यदि सरकार डंप माल निकलवा दे या फिर बाहर का माल आए तो उम्मीद की जा   सकती है। कारोबारी ने सरकार से कीमतों को काबू में रखने के लिए कदम उठाने की मंाग की है। 

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