घर के खाने पर महंगाई की मार, पहले प्याज, टमाटर अब चीनी भी महंगी
खबर सार :-
पिंपरी-चिंचवड़, खाद्य पदार्थों में बढ़े दामों पर व्यापारी और खरीददार दोनों परेशान हैं। महंगाई, किचन पर इतनी हावी है कि घर में कम पैसों में तैयार होने वाला भोजन अब बेस्वाद होने लगा है।
खबर विस्तार : -
पिंपरी-चिंचवड़ : आमदनी के एवज में कीमतों में तेजी ज्यादा आ गई है। खाना पकाने वाली खाद्य वस्तुओं में किन-किन चीजों से दूरियां बना ली जाएं? हर वस्तु के दाम बढ़े हुए हैं। प्याज, टमाटर, अदरक, दाल, तेज के दाम लगातार ऊपर आए हैं। अब तो चीनी के दाम भी आसामान पर हैं। हरी सब्जी शायद ही कभी सही दाम पर मिले। इससे घरों के बजट पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
यह भी पढ़ें : कच्चे तेल की तपिश के बीच शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 188 अंक चढ़ा; हरे निशान में पहुंचा निफ्टी
इस पर कारोबारियों के साथ खरीदार भी परेषान हैं। किसानों को भी बढ़े दाम का ज्यादा मुनाफा नहीं मिल रहा है। वह भी सरकार से महंगाई कम करने की अपील कर रहे है। प्याज विक्रेता रामबोधन साहू ने कहा कि कम स्टॉक और कम आवक की वजह से कीमतें बढी़ हैं। वहीं खरीददार श्रवण कुमार कहते हैं कि बढ़ती कीमतों का गरीबों पर ज्यादा असर पड़ता है।
इस बार प्याज की आमद कम हुई
प्याज विक्रेता रामबोधन ने बाजारों की हालत पर अपनी राय दी। कहा कि इस साल बाजार में माल की सप्लाई 40 प्रतिशत कम हो गई है। पिछले साल की तुलना में प्याज की कीमत को लगभग आधा बताया। कहा कि 20 से 25 रुपए प्रति किलो प्याज बाजार में था। उनका कहना था कि इस साल सप्लाई काफी दिनों से प्रभावित रही है। इसमें 40 प्रतिशत की कमी देखी गई। इसके कारण प्याज की कीमतें 40 से 50 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। उन्होंने डीजल की बढ़ती कीमतों को असल कारण बताया। इससे ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ गया है।
बरूदी शौक ने बिगाड़ दिया खेल
अमेरिका, रूस, यूक्रेन, ईरान और इजरायल का बारूदी खेल इसके लिए जिम्मेदार है। उनका कहना है कि किसानों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसान देषराज कहते हैं कि पहले गर्मी में फसल को पानी नहीं मिला, जब मिला तो कुदरत ने फसल सड़ा डाली। उनकी लगभग 40 प्रतिशत फसल खराब हो गई है। बहुत से किसानों के साथ ऐसा ही हुआ।
इससे बाजार में कीमतें और बढ़ गई। रामबोधन कहते हैं कि अब जरूरी इस बात की है कि कीमतों में बढ़ोतरी रोकने के लिए माल के आवक पर ध्यान देना चाहिए। सरकार को कारोबारियों के डंप स्टॉक पर ध्यान देने की जरूरत है। इस समय कालाबाजारी हावी है। वह लोग सक्रिय हो गए हैं। इसलिए सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।
गुड़ तो पहले से ही महंगा था
एक महिला ग्राहक ने कहा कि गरीब 400 के करीब कमाते हैं। उनके लिए साग सब्जी और अच्छा खाना परेषान करने वाली चीजें हैं। प्याज और चीनी के दाम बढ़ने से जेब पर बड़ा बोझ बन गए हैं। महिला ने कहा कि यही हाल शक्कर का है। गुड़ तो 80 में पहले भी था, लेकिन चीनी कुछ दिन पहले 40-45 रुपए किलो बिक रही थी। अब इसे 70 रूपये में खरीदना मुमकिन नहीं है। आम आदमी को चाय छोड़ना पड़ेगा। महिला ने सरकार से मांग की है कि वह इस पर ध्यान दं।
नई फसल आने तक रह सकती है दिक्कत
वहीं, मालेगांव बाजार में प्याज की कीमतें बढ़ने से लोग खफा हैं। हालत यह है कि 2,500 रुपए से बढ़कर 3,500-3,800 रुपए प्रति क्विंटल में बिक रहा है। व्यापारियों का कहना है कि भारी बारिश से फसल को नुकसान हुआ है। नई फसल आने तक यह दिक्कत रह सकती है। यदि सरकार डंप माल निकलवा दे या फिर बाहर का माल आए तो उम्मीद की जा सकती है। कारोबारी ने सरकार से कीमतों को काबू में रखने के लिए कदम उठाने की मंाग की है।
यह भी पढ़ें : प्याज की कीमतों और उपलब्धता पर सरकार की कड़ी नजर, घरेलू मांग पूरी करने के लिए आगामी महीनों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध
अन्य प्रमुख खबरें
-
कर्नाटक में सूखे से 90 प्रतिशत फसलें प्रभावित, राज्य सरकार देगी राहत
2026-10-08
-
रबी उत्पादन में 30 लाख मीट्रिक टन वृद्धि का लक्ष्य, दलहन-तिलहन के बीजों पर अनुदान
2026-10-07
-
Siwan में उद्यान निदेशालय खुशबू पर फिदा, अनुदान देकर उगवा रहे गेंदा फूल
2026-10-07
-
UP में बाढ़ से प्रभावित किसानों को मिलेगी मदद, 12 अक्टूबर तक होगा सर्वे
2026-10-06
-
बांदा की प्राकृतिक खेती और देशी बीज संरक्षण की पहल को सराहा
2026-10-06
-
MP में श्वेत क्रांति, दुग्ध उत्पादन से बदल रही गांवों की अर्थव्यवस्था
2026-10-05
-
मप्र में MSP पर धान खरीद के लिए 3 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन
2026-10-05
-
फसल चक्र अपनाना छोड़ा, इसलिए कम हुई मिट्टी की ताकत
2026-10-05
-
मिट्टी की ताकत है खरपतवार, आना चाहिए उचित प्रबंधन
2026-10-03
-
मप्रः 10 अक्टूबर तक किसान करा सकेंगे पंजीयन: खाद्य मंत्री राजपूत
2026-10-01
-
CCFI की 63वीं AGM में टिकाऊ कृषि, रसायनों के संतुलित इस्तेमाल और निर्यात पर जोर
2026-10-01
-
प्लास्टिक हमारे लिए अभिशाप, यूपी में बांस उद्योग के लिए सरकार प्रतिबद्ध: ब्रजेश पाठक
2026-09-30
-
एमएसपी पर दालों और तिलहनों की खरीद को मंजूरी, यूपी, कर्नाटक और तेलंगाना को मिलेगा लाभ
2026-09-30
-
खेतों की मिट्टी की जांच कर खाद का पैमाना देंगे वैज्ञानिक, विदेश माल भेज सकेंगे किसान
2026-09-30
-
यूपी में फल-फूल रहा मशरूम का उत्पादन, किसानों में बढ़ी लोकप्रियता
2026-09-29