कच्चे तेल की तपिश के बीच शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 188 अंक चढ़ा; हरे निशान में पहुंचा निफ्टी
खबर सार :-
कच्चे तेल की महंगाई और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने लगातार दूसरे दिन मजबूती दिखाई। रियल्टी, मेटल और फार्मा शेयरों ने शुरुआती तेजी को सहारा दिया, जबकि आईटी क्षेत्र दबाव में रहा। आगे बाजार की दिशा कच्चे तेल, वैश्विक संकेतों और घरेलू संस्थागत खरीदारी पर निर्भर करेगी। निफ्टी के लिए 24,000-24,060 का स्तर अहम सपोर्ट बना रहेगा।
खबर विस्तार : -
Stock Market Updates: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ शुरुआत की। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में हरे निशान में रहे। रियल्टी, मेटल और फार्मा शेयरों में खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया। हालांकि, शुरुआती तेजी कुछ देर बाद कमजोर पड़ी और बाजार लाल निशान में भी पहुंच गया।
कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 163.35 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,701.07 पर खुला। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स 187.95 अंक यानी 0.24 प्रतिशत चढ़कर 77,725.67 के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। इसका निचला स्तर 77,445.86 रहा। इसी तरह निफ्टी 50 ने 52.20 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,284.05 पर कारोबार शुरू किया। सत्र के दौरान निफ्टी का उच्चतम स्तर 24,284.05 और निचला स्तर 24,206.80 रहा।
स्मॉलकैप में खरीदारी, मिडकैप कमजोर
व्यापक बाजार की तस्वीर मिश्रित रही। निफ्टी मिडकैप में 0.20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.73 प्रतिशत मजबूत रहा। इससे संकेत मिलता है कि चुनिंदा छोटे शेयरों में निवेशकों की खरीदारी बनी हुई है, जबकि बड़े और मझोले शेयरों में कुछ दबाव दिखाई दिया। सेक्टरवार प्रदर्शन में निफ्टी रियल्टी सबसे आगे रहा। इसमें 0.70 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी मेटल 0.48 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा 0.32 प्रतिशत मजबूत हुआ। निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर तथा निफ्टी रीट्स एवं रियल्टी में भी क्रमशः 0.32 प्रतिशत और 0.28 प्रतिशत की बढ़त रही। दूसरी ओर निफ्टी आईटी 0.60 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे कमजोर सेक्टर रहा। मिडस्मॉल आईटी एवं टेलीकॉम में 0.17 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.19 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।
कच्चे तेल की तेजी बनी चुनौती
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले सत्र की तेजी को कायम रखना आसान नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जबकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में भी वृद्धि हुई है। ब्रेंट क्रूड करीब 93.96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। तेल की महंगाई भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे आयात लागत, मुद्रास्फीति और कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। तेल कीमतों में तेजी की एक वजह अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का बयान भी माना जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान पर अब तक के कुछ सबसे कड़े प्रतिबंध लागू कर सकता है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है और कच्चे तेल की कीमतों को समर्थन मिला है।
घरेलू खरीदारी से बाजार को सहारा
हालांकि, घरेलू मोर्चे पर बाजार को मजबूती मिल रही है। संस्थागत निवेशकों की खरीदारी और अर्थव्यवस्था से जुड़े सकारात्मक संकेत निवेशकों के भरोसे को बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, फार्मा और अनुबंध आधारित अनुसंधान एवं विनिर्माण सेवाओं से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। ऊंचे मूल्यांकन के बावजूद इन क्षेत्रों में चुनिंदा खरीदारी जारी है। तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से भी बाजार में उम्मीद दिखाई दे रही है। लगातार सात सत्रों की गिरावट के बाद निफ्टी में डोजी पैटर्न बना, जो बिकवाली के दबाव में कमी का संकेत माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक 24,060-24,000 का क्षेत्र निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट है। इसके ऊपर टिके रहने पर 24,317-24,380 और फिर 24,400-24,545 के स्तर तक तेजी की संभावना बन सकती है।
वैश्विक संकेत मिश्रित, आगे सीमित दायरे में कारोबार संभव
एशियाई बाजारों में कमजोरी का रुख रहा। वॉल स्ट्रीट पर लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। ऐसे में वैश्विक बाजारों से भारतीय शेयर बाजार को बहुत मजबूत संकेत नहीं मिल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर रहेंगी, भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। सेंसेक्स और निफ्टी में तेज बढ़त के बजाय सीमित दायरे में कारोबार और मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। हालांकि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी, व्यापक बाजार में खरीदारी और बेहतर आर्थिक संकेतक गिरावट को सीमित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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