तेल की तपिश से बाजार पस्त, सेंसेक्स 365 अंक टूटा; निफ्टी 24,250 के नीचे, 91 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
खबर सार :-
महंगे कच्चे तेल और पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव ने भारतीय शेयर बाजार की चिंता बढ़ा दी है। सेंसेक्स 365 अंक तक फिसला, जबकि निफ्टी 24,250 के नीचे रहा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी दबाव बढ़ा रही है। हालांकि मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था, कॉरपोरेट आय और डीआईआई की संभावित खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है। फिलहाल निवेशकों को तेल, यील्ड और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखनी होगी।
खबर विस्तार : -
Stock Market Updates: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की चिंता बढ़ा दी। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ खुले। इसके साथ ही बाजार में लगातार छठे कारोबारी दिन बिकवाली का दबाव बना रहा। बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता, महंगे कच्चे तेल और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।
सेंसेक्स 365 अंक तक फिसला
बीएसई सेंसेक्स सोमवार के 77,728.16 के बंद स्तर के मुकाबले मंगलवार को 309.19 अंक यानी 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,418.97 पर खुला। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 77,575.21 का ऊपरी और 77,362.19 का निचला स्तर छुआ। निचले स्तर पर यह करीब 365 अंक यानी 0.47 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 263.98 अंक यानी 0.34 प्रतिशत टूटकर 77,464.18 पर कारोबार कर रहा था। एनएसई का निफ्टी 50 भी दबाव में रहा। यह पिछले बंद 24,287.65 से 0.26 प्रतिशत नीचे 24,223.85 पर खुला। कारोबार के दौरान निफ्टी 24,211.10 तक फिसला और 24,269.65 का उच्च स्तर बनाया। खबर लिखे जाने तक इंडेक्स 42.40 अंक यानी 0.17 प्रतिशत गिरकर करीब 24,245.25 पर था।
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आईटी शेयरों पर सबसे ज्यादा मार
सेक्टोरल कारोबार में आईटी इंडेक्स सबसे कमजोर रहा और इसमें 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम इंडेक्स भी 0.62 प्रतिशत नीचे रहा, जबकि रियल्टी इंडेक्स करीब 0.4 प्रतिशत फिसला। इसके अलावा फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, मीडिया, मेटल और एफएमसीजी शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला। हालांकि बाजार में पूरी तरह निराशा नहीं रही। निफ्टी ऑटो इंडेक्स करीब 0.40 प्रतिशत मजबूत हुआ, जबकि पीएसयू बैंक इंडेक्स में 0.29 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। व्यापक बाजार में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप में 0.08 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 0.27 प्रतिशत चढ़ा। इससे संकेत मिलता है कि बड़े शेयरों में दबाव के बावजूद चुनिंदा छोटे शेयरों में खरीदारी बनी हुई है।
91 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
बाजार पर सबसे बड़ा दबाव अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों से आया है। ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी 1 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 85.37 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश के आयात बिल, महंगाई, चालू खाते के घाटे और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि तेल की तेजी भारतीय इक्विटी बाजार के लिए महत्वपूर्ण जोखिम बन गई है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने भी बढ़ाई चिंता
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.73 प्रतिशत पर पहुंच गई है। ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से उभरते बाजारों की तुलना में अमेरिकी परिसंपत्तियां निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो सकती हैं। इससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की भारतीय बाजार में निवेश रुचि प्रभावित होने की आशंका रहती है।
तनाव बढ़ा तो उतार-चढ़ाव रहेगा जारी
बाजार में मौजूदा कमजोरी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। रिपोर्टों में ईरान की अधिक आक्रामक रणनीति की आशंका जताई गई है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम व्यवस्था को आगे बढ़ाने की संभावना से इनकार किया है। इससे पश्चिम एशिया से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं फिर तेज हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक क्षेत्रीय तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती, कॉरपोरेट आय में सुधार और घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की संभावित खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है।
डीआईआई के पास पर्याप्त नकदी, चुनिंदा शेयरों में खरीदारी
डीआईआई के पास पर्याप्त नकदी होने से तेज गिरावट के दौरान चुनिंदा शेयरों में खरीदारी देखने को मिल सकती है। वहीं लंबी अवधि के निवेशक भी बाजार की कमजोरी का इस्तेमाल मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश के अवसर के रूप में कर सकते हैं। फिलहाल निवेशकों की नजर तीन बड़े संकेतकों-कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव पर है। इन मोर्चों पर राहत मिलने तक बाजार की दिशा अस्थिर रहने की संभावना बनी हुई है।
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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)....
1. शेयर बाजार में गिरावट की बड़ी वजह क्या रही?
अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों की चिंता बढ़ी।
2. सेंसेक्स और निफ्टी कितना गिरे?
सेंसेक्स कारोबार के दौरान 365 अंक तक फिसला, जबकि निफ्टी 24,250 के नीचे कारोबार करता दिखा।
3. आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?
कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की नजर रहेगी।
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