ग्रेड-ए शहरों से आगे बढ़ेगा वेयरहाउसिंग सेक्टर, ओडिशा, बंगाल, असम राज्य बनेंगे लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के नए हब

खबर सार :-

भारत में वेयरहाउसिंग क्षेत्र की वृद्धि अब सिर्फ बड़े उपभोग केंद्रों और ग्रेड-ए शहरों तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले वर्षों में ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्य वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के नए विकास केंद्र बनकर उभर सकते हैं।
वेयरहाउसिंग-लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के नए विकास केंद्र बनेंगे ओडिशा, बंगाल

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: भारत में वेयरहाउसिंग सेक्टर अब बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं रहेगा। भारत में वेयरहाउसिंग क्षेत्र की वृद्धि अब सिर्फ बड़े उपभोग केंद्रों और ग्रेड-ए शहरों तक सीमित नहीं रहेगी। अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड के वेयरहाउसिंग एवं अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और बिजनेस हेड पंकज कुमार भारद्वाज ने मंगलवार को कहा कि आने वाले वर्षों में ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्य वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के नए विकास केंद्र बनकर उभर सकते हैं। 

 वेयरहाउसिंग के लिए बी और सी श्रेणी के शहरों पर भी कर रहे फोकस 

भारद्वाज ने कहा कि विभिन्न राज्य सरकारें निर्माताओं, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और औद्योगिक डेवलपर्स को आकर्षित करने के लिए नई लॉजिस्टिक्स नीतियां लागू कर रही हैं, जिससे उभरते बाजारों में वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत में विकसित हो रहे लगभग 1.3 से 1.4 करोड़ वर्ग फुट वेयरहाउसिंग स्पेस का करीब 60-70 प्रतिशत हिस्सा ग्रेड-ए और ग्रेड-बी शहरों में है। हालांकि भविष्य की रणनीति केवल प्रमुख उपभोग केंद्रों तक सीमित नहीं है। भारद्वाज ने कहा, "हम केवल ग्रेड-ए शहरों पर नहीं, बल्कि बी और सी श्रेणी के शहरों पर भी फोकस कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि कंपनी के पास ऐसे कई स्थानों पर भूमि उपलब्ध है, जहां ग्राहकों की जरूरतों के अनुसार तैयार वेयरहाउस विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि कंपनी बिल्ड-टू-सूट (बीटीएस) मॉडल के तहत भी सुविधाएं विकसित करने की क्षमता रखती है, जिसमें ग्राहक की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वेयरहाउस तैयार किए जाते हैं।

पूर्वी तट पर मौजूदगी होगी और मजबूत 

भारद्वाज ने कहा कि कंपनी की रणनीति केवल उपभोग केंद्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्यात-आयात (इग्जिम), बंदरगाह-आधारित और इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) आधारित विकास पर भी केंद्रित है। अदाणी समूह की उपस्थिति दोनों तटों पर 15-16 बंदरगाहों में है, जिसका लाभ भविष्य में लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विस्तार में मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि अगले 5 से 10 वर्षों में सरकार के निर्यात बढ़ाने के प्रयासों से बंदरगाह-आधारित वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेवाओं की मांग में तेज वृद्धि हो सकती है। पूर्वी और दक्षिणी तटों पर कंपनी की रणनीति के बारे में उन्होंने बताया कि धामरा पोर्ट और केरल का विझिंजम पोर्ट कंपनी के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में शामिल हैं। विझिंजम पोर्ट तेजी से एक महत्वपूर्ण ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में उभर रहा है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि कंपनी को हाल ही में पारादीप बंदरगाह में दो बर्थ भी मिली हैं, जिससे पूर्वी तट पर उसकी मौजूदगी और मजबूत होगी।

हर राज्य बना रहे अलग लॉजिस्टिक्स नीति 

भारद्वाज ने कहा कि पूर्वी भारत में वेयरहाउसिंग क्षेत्र का विकास अभी पश्चिमी और उत्तरी भारत की तुलना में अपेक्षाकृत कम हुआ है। ऐसे में ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में आगे चलकर बड़ी वृद्धि देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में बढ़ने वाली लॉजिस्टिक्स गतिविधियां और वेयरहाउसिंग क्षमता न केवल अतिरिक्त कार्गो वॉल्यूम लाएंगी, बल्कि पूरे सप्लाई चेन इकोसिस्टम की लागत को कम करने में भी मदद करेंगी। पंकज कुमार भारद्वाज ने आगे कहा, "कुल मिलाकर, मैं कहूंगा कि सभी राज्य अब इस दिशा में काम कर रहे हैं। हर राज्य एक लॉजिस्टिक्स नीति बना रहा है, जिसके तहत वे अधिक निर्माताओं, साझेदारों और औद्योगिक विकासकर्ताओं को लाना चाहते हैं। इसलिए, हर राज्य एक लॉजिस्टिक्स नीति बना रहा है और आवश्यकता के आधार पर, लोग आगे बढ़कर राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर रहे हैं, ताकि वहां उनके पोर्टफोलियो का विकास किया जा सके।

ये भी पढ़ें- Gold Silver Price: सोने में भारी गिरावट, चांदी भी 9000 से ज्यादा हुई सस्ती, चेक करें सेटेस्ट रेट

अन्य प्रमुख खबरें