मेक इन इंडिया के 12 साल में बदली तस्वीर, इलेक्ट्रॉनिक्स-मोबाइल से डिफेंस तक बढ़ा उत्पादन

खबर सार :-

‘मेक इन इंडिया’ के 12 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, स्टील, ऑटो, फार्मा, डिफेंस और रेलवे में उत्पादन क्षमता बढ़ी है। सरकारी आंकड़ों में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन सात गुना और मोबाइल उत्पादन करीब 33 गुना बढ़ने की तस्वीर सामने आती है।
मेक इन इंडिया के 12 साल, इलेक्ट्रॉनिक्स-मोबाइल उत्पादन में उछाल

खबर विस्तार : -

Make in India:  ‘मेक इन इंडिया’ पहल के 12 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि इस पहल के बाद भारत में उत्पादन, निवेश और निर्यात में बदलाव दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि भारत में ज्यादा उत्पादन, ज्यादा निवेश और भारत से ज्यादा निर्यात हुआ है। उन्होंने इसे विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई देने वाला बदलाव बताया।

‘मेक इन इंडिया’ की शुरुआत 25 सितंबर 2014 को भारत को मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनाने के उद्देश्य से की गई थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह पहल अब 27 क्षेत्रों पर केंद्रित है, जिनमें 15 मैन्युफैक्चरिंग और 12 सर्विस सेक्टर शामिल हैं। समय के साथ इसके तहत निवेश, उत्पादन क्षमता और औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत करने वाली कई नीतियां और योजनाएं जोड़ी गई हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन सात गुना

‘मेक इन इंडिया’ के दौर में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में तेज विस्तार दर्ज किया गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन 2014-15 में करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी इस अवधि में उत्पादन लगभग सात गुना बढ़ा। 2025-26 में ही इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन सालाना आधार पर 15.8 प्रतिशत बढ़ा। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भी बड़ा विस्तार हुआ है। 2014-15 में करीब 38,000 करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 2025-26 में बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये हो गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में इलेक्ट्रॉनिक सामान भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन गया और निर्यात 47.96 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

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मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में 33 गुना उछाल

मोबाइल फोन निर्माण इस बदलाव के प्रमुख उदाहरणों में शामिल है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मोबाइल फोन का उत्पादन 2014-15 के करीब 18,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में लगभग 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस तरह उत्पादन में करीब 33 गुना वृद्धि हुई। मात्रा के लिहाज से भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है। मोबाइल फोन के निर्यात में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह 2014-15 के करीब 1,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 2.59 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यानी इस अवधि में मोबाइल निर्यात में लगभग 165 गुना वृद्धि दर्ज हुई।

Make in India-Narendra Modi- Manufacturing GVA

स्टील और ऑटो सेक्टर में भी बढ़ा उत्पादन

मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार केवल इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल तक सीमित नहीं रहा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कच्चे स्टील का उत्पादन 2014-15 के 81.7 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 170.0 मिलियन टन हो गया। ऑटोमोबाइल क्षेत्र में 2024-25 के दौरान कुल वाहन उत्पादन 31.03 मिलियन यूनिट रहा, जो 2014-15 के मुकाबले 33 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में यात्री और वाणिज्यिक वाहनों के उत्पादन में 65 प्रतिशत, दोपहिया वाहनों में 30 प्रतिशत और तिपहिया वाहनों में 71 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।

फार्मा और मेडिकल डिवाइस में विस्तार

फार्मास्युटिकल सेक्टर भी भारत के प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों में बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत मात्रा के लिहाज से दुनिया का तीसरा और मूल्य के आधार पर 11वां सबसे बड़ा फार्मास्युटिकल उद्योग है। 2025-26 में फार्मा उद्योग का सालाना टर्नओवर 5,08,630 करोड़ रुपये रहा, जबकि इसी अवधि में फार्मास्युटिकल निर्यात 2,62,697 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। मेडिकल डिवाइस के घरेलू उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। यह 2019-20 के करीब 28,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 41,500 करोड़ रुपये हो गया, जो 48.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।

रेलवे और डिफेंस में भी बढ़ी घरेलू क्षमता

रेलवे के क्षेत्र में भी घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ने की जानकारी सरकारी आंकड़ों में दी गई है। 2014-24 के दौरान भारतीय रेलवे ने 54,809 कोच बनाए। 2004-14 के दौरान रेलवे कोच का औसत सालाना उत्पादन 3,300 से कम था, जो 2014-24 में बढ़कर 5,481 हो गया। 2025-26 में रेलवे ने 1,674 लोकोमोटिव बनाए। डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में भी उत्पादन मूल्य बढ़ा है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में बने रक्षा उत्पादों का मूल्य 2014-15 में 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया।

मैन्युफैक्चरिंग GVA में भी तेज वृद्धि

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, संशोधित राष्ट्रीय लेखा श्रृंखला के आधार पर स्थिर कीमतों पर मैन्युफैक्चरिंग ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) ने 2022-23 से 2025-26 के बीच 10.88 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की। अप्रैल-जुलाई 2026 में भी विनिर्माण क्षेत्र के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 7 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई। सरकार के मुताबिक, ‘मेक इन इंडिया’ के साथ PLI, पीएम गतिशक्ति, नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम और इंडस्ट्रियल लैंड बैंक जैसी पहलों ने निवेश और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भूमिका निभाई है। आगे सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, विशेष स्टील और अन्य उभरते क्षेत्रों पर भी जोर दिया जा रहा है।

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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)....

1. ‘मेक इन इंडिया’ की शुरुआत कब हुई थी?

‘मेक इन इंडिया’ की शुरुआत 25 सितंबर 2014 को भारत को मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनाने के उद्देश्य से हुई थी।

2. मेक इन इंडिया के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन कितना बढ़ा?

इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया।

3. मोबाइल फोन उत्पादन में कितनी वृद्धि हुई?

मोबाइल फोन उत्पादन 2014-15 के करीब 18,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में लगभग 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया।

4. मेक इन इंडिया किन क्षेत्रों में लागू है?

यह पहल 27 क्षेत्रों में लागू है, जिनमें 15 मैन्युफैक्चरिंग और 12 सर्विस सेक्टर शामिल हैं।

 

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