रुपये की रॉकेट जैसी छलांग! 6 महीने के हाई पर पहुंची भारतीय मुद्रा, डॉलर 93.87 तक फिसला
खबर सार :-
विदेशी निवेशकों की 14,975 करोड़ रुपये की खरीदारी से रुपया 53 पैसे मजबूत होकर छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा। हालांकि, 100 डॉलर पार कच्चा तेल और मजबूत डॉलर आगे भारतीय मुद्रा की तेजी के लिए चुनौती बने रह सकते हैं।
खबर विस्तार : -
Indian Rupee six-month high: विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने शानदार वापसी करते हुए छह महीने का उच्चतम स्तर छू लिया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की घरेलू शेयर बाजार में जोरदार खरीदारी से भारतीय मुद्रा को मजबूती मिली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बावजूद रुपया शुरुआती गिरावट से उबरकर 93.87 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया। कारोबार के दौरान दोपहर दो बजे यह अपने पिछले बंद स्तर से करीब 53 पैसे यानी 0.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ 93.88 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था। 7 मई के बाद रुपये का यह सबसे मजबूत इंट्रा-डे स्तर है।
शुरुआत में कमजोर पड़ा रुपया, फिर लगाया जोरदार यू-टर्न
विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में शुक्रवार को रुपये की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। भारतीय मुद्रा गुरुवार के 94.41 प्रति डॉलर के बंद स्तर के मुकाबले 9 पैसे फिसलकर 94.50 प्रति डॉलर पर खुली। शुरुआती कारोबार में अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिल रहे नकारात्मक संकेतों का असर दिखाई दिया। हालांकि, कुछ ही समय बाद विदेशी निवेशकों की ओर से घरेलू शेयर बाजार में आई बड़ी पूंजी ने रुपये को सहारा दिया। विदेशी मुद्रा का इनफ्लो बढ़ने से भारतीय मुद्रा ने अपनी शुरुआती गिरावट की भरपाई की और तेजी से मजबूत होने लगी। रुपया पहले 94.36 के स्तर पर पहुंचा और फिर कारोबार के दौरान 93.87 प्रति डॉलर तक चढ़ गया।
डॉलर के मुकाबले 53 पैसे मजबूत हुई भारतीय मुद्रा
कारोबार के दौरान भारतीय रुपये में करीब 0.56 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 94.41 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जबकि शुक्रवार को यह 93.88 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की खरीदारी से भारतीय शेयर बाजार में डॉलर की उपलब्धता बढ़ी। इससे घरेलू मुद्रा को मजबूती मिली। विदेशी पूंजी का लगातार प्रवाह रुपये की चाल को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक बन गया।
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पाउंड और यूरो के मुकाबले भी रुपये में तेजी
अमेरिकी डॉलर के साथ-साथ भारतीय रुपया ब्रिटिश पाउंड और यूरो के मुकाबले भी मजबूत हुआ। पिछले कारोबारी सत्र में 127.18 रुपये पर बंद हुआ ब्रिटिश पाउंड शुक्रवार को 84 पैसे यानी 0.66 प्रतिशत कमजोर होकर 126.34 रुपये पर आ गया। इसी तरह यूरो भी भारतीय मुद्रा के मुकाबले कमजोर हुआ। गुरुवार को 106.10 रुपये पर बंद हुआ यूरो शुक्रवार को 75 पैसे यानी 0.71 प्रतिशत गिरकर 105.34 रुपये पर कारोबार करता नजर आया। रुपये की इस मजबूती से ब्रिटेन और यूरोपीय देशों से आयात करने वाले कारोबारियों को राहत मिल सकती है।

महंगा कच्चा तेल और मजबूत डॉलर बने चुनौती
रुपये की शानदार रिकवरी के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां भारतीय मुद्रा के लिए चुनौती बनी हुई हैं। कारोबार के शुरुआती समय में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई और यह दोबारा 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतें बढ़ने पर देश का आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग में इजाफा होता है। इससे रुपये पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स भी 0.35 प्रतिशत बढ़कर 101.90 पर पहुंच गया। डॉलर की इस मजबूती ने शुरुआती कारोबार में भारतीय मुद्रा की राह मुश्किल बनाई।
विदेशी निवेशकों ने खरीदे 14,975 करोड़ रुपये के शेयर
रुपये की मजबूती के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी को अहम वजह माना जा रहा है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले कारोबारी दिन विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदार रहते हुए करीब 14,974.68 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। इस बड़े निवेश से घरेलू बाजार में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ा। बाजार जानकारों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी से रुपये को आगे भी समर्थन मिल सकता है।
आगे कैसी रहेगी रुपये की चाल?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार की मजबूती और विदेशी निवेशकों का निवेश रुपये के लिए सकारात्मक संकेत हैं। हालांकि, रूस-यूक्रेन तनाव और मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक हालात से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा बना रहता है और डॉलर की मजबूती जारी रहती है, तो रुपये की तेजी पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेश, कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर इंडेक्स की चाल भारतीय मुद्रा की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)...
1. भारतीय रुपया कितने महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है?
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले छह महीने के उच्चतम स्तर 93.87 पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसमें करीब 53 पैसे यानी 0.56 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई।
2. रुपये में मजबूती आने की सबसे बड़ी वजह क्या रही?
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारतीय शेयर बाजार में भारी खरीदारी रुपये की मजबूती की प्रमुख वजह रही। निवेशकों ने पिछले कारोबारी दिन करीब 14,974.68 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
3. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का रुपये पर क्या असर पड़ता है?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग और आयात बिल बढ़ता है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव पड़ सकता है।
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