गोल्ड ETF का जलवा! 3 साल में 2.6 गुना बढ़ी निवेशकों की संख्या, लार्ज-कैप फंड भी पीछे

खबर सार :-

गोल्ड ETF में तीन साल में फोलियो 2.6 गुना बढ़ना सोने के प्रति निवेशकों का बढ़ता आकर्षण दिखाता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने FOMO से बचने, पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी 5-10% रखने और निवेश संतुलित करने की सलाह दी है।
गोल्ड ETF का क्रेज: 3 साल में निवेशक 2.6 गुना बढ़े

खबर विस्तार : -

Gold ETF investment: सोने की कीमतों में लगातार तेजी का असर अब निवेश के आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। निवेशकों के बीच गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। पिछले तीन वर्षों में गोल्ड ETF के निवेशक फोलियो की संख्या 2.6 गुना हो गई है। इस मामले में गोल्ड ETF ने लार्ज-कैप इक्विटी फंडों को भी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की ओर निवेशकों का बढ़ता झुकाव कहीं न कहीं तेजी छूट जाने के डर यानी फियर ऑफ मिसिंग आउट (FOMO) का नतीजा है। उन्होंने निवेशकों को पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखने की सलाह दी है।

तीन साल में 2.6 गुना बढ़े गोल्ड ETF के फोलियो

ओम्नीसाइंस कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2023 से अब तक गोल्ड ETF के फोलियो की संख्या 2.6 गुना बढ़ी है। इसके मुकाबले लार्ज-कैप इक्विटी फंडों के फोलियो में केवल 1.3 गुना वृद्धि हुई है। यह अंतर बताता है कि बीते कुछ वर्षों में निवेशकों का रुझान पारंपरिक इक्विटी निवेश से आगे बढ़कर सोने की ओर तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गोल्ड ETF की प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियों (AUM) में वृद्धि भी इक्विटी फंडों के मुकाबले काफी तेज रही है। अंतर्निहित परिसंपत्तियों से मिले रिटर्न का असर अलग करने के बाद भी गोल्ड ETF में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी स्पष्ट दिखाई देती है। यानी सोने की कीमतों में तेजी के साथ-साथ निवेशक इस श्रेणी में नया पैसा भी लगा रहे हैं।

1.9 लाख करोड़ रुपये पहुंचा गोल्ड ETF का AUM

रिपोर्ट के अनुसार, गोल्ड ETF का कुल AUM बढ़कर लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह लार्ज-कैप इक्विटी फंडों के करीब 4 लाख करोड़ रुपये के AUM का लगभग 47 प्रतिशत है। ओम्नीसाइंस कैपिटल का मानना है कि सोने का यह आकार निवेश के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हो गया है। विश्लेषकों के मुताबिक, गोल्ड ETF की तेजी से बढ़ती हिस्सेदारी पर निवेशकों को गंभीरता से विचार करना चाहिए। सोने को आमतौर पर पोर्टफोलियो में वैकल्पिक परिसंपत्ति के रूप में शामिल किया जाता है, न कि मुख्य निवेश विकल्प के तौर पर।

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FOMO के कारण बढ़ रहा निवेश का रुझान

ओम्नीसाइंस कैपिटल के अध्यक्ष और मुख्य पोर्टफोलियो प्रबंधक अश्विनी शामी ने निवेशकों के इस व्यवहार को FOMO से जोड़कर देखा है। उनके मुताबिक, जब किसी परिसंपत्ति की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो निवेशकों में उसमें निवेश करने की होड़ लग जाती है। उन्हें डर रहता है कि कहीं वे संभावित मुनाफे से वंचित न रह जाएं। शामी ने कहा कि गोल्ड ETF की ओर निवेशकों का आक्रामक झुकाव अनुशासित एसेट एलोकेशन रणनीति से विचलन का संकेत है। उनका मानना है कि निवेशकों को केवल पिछली तेजी देखकर किसी परिसंपत्ति में निवेश नहीं बढ़ाना चाहिए।

Gold Silver Prices

पोर्टफोलियो में 5 से 10% सोना रखने की सलाह

विशेषज्ञों के मुताबिक, सामान्य निवेश रणनीति में सोने की हिस्सेदारी कुल पोर्टफोलियो का 5 से 10 प्रतिशत रखने की सलाह दी जाती है। वहीं, प्राइवेट इक्विटी, स्ट्रक्चर्ड डेट, स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF), रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) जैसी सभी वैकल्पिक परिसंपत्तियों की संयुक्त हिस्सेदारी आमतौर पर 10 से 20 प्रतिशत तक रखने की बात कही जाती है। इसलिए गोल्ड ETF में तेजी से बढ़ता निवेश पोर्टफोलियो के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से निवेश की समीक्षा करनी चाहिए।

सोने में लंबी अवधि का भरोसा, लेकिन तेजी पर सतर्कता जरूरी

अश्विनी शामी ने सोने को लेकर दीर्घकालिक सकारात्मक नजरिया बनाए रखा है, लेकिन उन्होंने भविष्य में कीमतों में लगातार तेजी की उम्मीद पर सावधानी बरतने को कहा है। उनके मुताबिक, यह मानना उचित नहीं होगा कि आने वाले वर्षों में सोने की कीमतें, महंगाई और ब्याज दरें एक साथ लगातार बढ़ती रहेंगी। रिपोर्ट में केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीदारी का भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि केंद्रीय बैंकों की मजबूत मांग अकेले सोने की कीमतों को लगातार ऊंचे स्तर पर बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती। यदि निवेशक बेहतर प्रतिफल की तलाश में फिक्स्ड इनकम और अल्प एवं मध्यम अवधि वाले ऋण साधनों की ओर रुख करते हैं, तो सोने की मांग प्रभावित हो सकती है। इससे केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का प्रभाव भी संतुलित हो सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक सोने की तेजी देखकर जल्दबाजी में निवेश न बढ़ाएं। बेहतर रणनीति यही है कि पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखें और निवेश के फैसले अपने वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर लें।

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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)....

1. पिछले तीन वर्षों में गोल्ड ETF के निवेशकों की संख्या कितनी बढ़ी है?

सितंबर 2023 से अब तक गोल्ड ETF के फोलियो की संख्या 2.6 गुना बढ़ी है, जबकि लार्ज-कैप इक्विटी फंडों के फोलियो में 1.3 गुना वृद्धि हुई है।

2. गोल्ड ETF का कुल AUM कितना पहुंच गया है?

ओम्नीसाइंस कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, गोल्ड ETF का कुल AUM बढ़कर लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

3. निवेश पोर्टफोलियो में सोने की कितनी हिस्सेदारी रखनी चाहिए?

विशेषज्ञों के मुताबिक, सामान्य निवेश पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी 5 से 10 प्रतिशत रखना उचित माना जाता है। निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार फैसला लेना चाहिए।

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