म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने रचा नया इतिहास: AUM 73 लाख करोड़ के पार, इक्विटी और SIP में जबरदस्त उछाल
खबर सार :-
भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM 73 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंचना निवेशकों के बढ़ते भरोसे और इक्विटी बाजार की मजबूती को दर्शाता है। SIP और इक्विटी फंड्स में लगातार बढ़ता निवेश लंबी अवधि की रणनीति को मजबूत करता है। हालांकि, डेट फंड्स से निकासी एक संतुलन बदलाव का संकेत है, जो निवेश पैटर्न में बदलाव को दिखाता है।
खबर विस्तार : -
Mutual Fund AUM: भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने वित्त वर्ष 2026 में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इंडस्ट्री का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) सालाना आधार पर 12.2 प्रतिशत बढ़कर 73.73 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 8 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी को दर्शाता है, जो निवेशकों के मजबूत भरोसे और बाजार की स्थिरता की ओर इशारा करता है।
इक्विटी फंड्स में रिकॉर्ड निवेश, SIP बना निवेशकों की पहली पसंद
वैश्विक बाजारों में अस्थिरता के बावजूद, सक्रिय इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेशकों का रुझान तेजी से बढ़ा है। मार्च 2026 में इनफ्लो बढ़कर 40,450.26 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो जुलाई 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले फरवरी में यह आंकड़ा 25,977.81 करोड़ रुपए था। साथ ही, सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश भी बढ़ा है। मार्च में SIP इनफ्लो 32,087 करोड़ रुपए दर्ज किया गया, जो फरवरी के 29,845 करोड़ रुपए से अधिक है। यह दर्शाता है कि खुदरा निवेशक बाजार की अनिश्चितताओं के बावजूद लंबी अवधि के निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।
वैश्विक तनाव के बीच ‘डिप में खरीदारी’ का ट्रेंड मजबूत
विश्लेषकों का मानना है कि इक्विटी इनफ्लो में आई इस तेजी के पीछे कई कारक हैं। वित्त वर्ष के अंत में पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण बाजार में आई गिरावट, और कम वैल्यूएशन पर खरीदारी के अवसर-इन सभी ने निवेशकों को आकर्षित किया है। ‘बाय ऑन डिप’ की रणनीति के चलते निवेशकों ने गिरावट को अवसर के रूप में इस्तेमाल किया, जिससे इक्विटी फंड्स में मजबूत प्रवाह देखने को मिला।
डेट फंड्स में भारी निकासी, कुल इंडस्ट्री में नेट आउटफ्लो
हालांकि, मार्च महीने में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को कुल मिलाकर 2.39 लाख करोड़ रुपए का नेट आउटफ्लो झेलना पड़ा। फरवरी में जहां 94,530 करोड़ रुपए का नेट इनफ्लो था, वहीं मार्च में यह स्थिति उलट गई। इसका मुख्य कारण डेट म्यूचुअल फंड्स से 2.94 लाख करोड़ रुपए की भारी निकासी रहा। यह दर्शाता है कि निवेशक अल्पकालिक सुरक्षित निवेश से निकलकर इक्विटी जैसे उच्च रिटर्न वाले विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।
गोल्ड ETF की चमक फीकी, इक्विटी कैटेगरी में फ्लेक्सी-कैप सबसे आगे
मार्च में गोल्ड ETF में निवेश घटकर 2,266 करोड़ रुपए रह गया, जो फरवरी में 5,254.95 करोड़ रुपए था। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल सोने की बजाय इक्विटी बाजार को ज्यादा आकर्षक मान रहे हैं। इक्विटी कैटेगरी में फ्लेक्सी-कैप फंड्स ने सबसे ज्यादा निवेश आकर्षित किया। मार्च में इसमें 10,054.12 करोड़ रुपए का इनफ्लो हुआ, जो फरवरी के 6,924.65 करोड़ रुपए से काफी अधिक है। इसके अलावा, स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स में भी मजबूत निवेश देखने को मिला। स्मॉल-कैप में 6,263.56 करोड़ रुपए और मिड-कैप में 6,063.53 करोड़ रुपए का इनफ्लो हुआ। वहीं, लार्ज-कैप फंड्स में 2,997.84 करोड़ रुपए का निवेश आया।
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