​​​​​​​मजबूत घरेलू मांग, निवेश और सेवा क्षेत्र ने दिया दम; इंडस्ट्री चैम्बर्स ने विकास की रफ्तार को बताया उत्साहजनक

खबर सार :-

भारत की अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि के साथ मजबूत रफ्तार दिखाई है। घरेलू मांग, निवेश, निर्माण, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र इसके प्रमुख आधार बने। निर्यात में 25.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी और सेवा क्षेत्र की 10 प्रतिशत वृद्धि ने तस्वीर मजबूत की। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि नीतिगत सुधार और निजी निवेश बढ़ने पर भारत मध्यम अवधि में 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर कायम रख सकता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 7.8% GDP ग्रोथ

खबर विस्तार : -

India GDP growth 2026-27: भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन करते हुए 7.8 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर्ज की है। इंडस्ट्री चैम्बर्स ने इस आंकड़े का स्वागत करते हुए कहा कि मजबूत घरेलू मांग, औद्योगिक गतिविधियों में तेजी, निवेश में बढ़ोतरी और सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन ने आर्थिक विस्तार को मजबूती दी है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.9 प्रतिशत रही थी।

निवेश और घरेलू मांग बनी अर्थव्यवस्था की ताकत

उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक सार्वजनिक पूंजीगत व्यय, डिजिटलाइजेशन, सेवा निर्यात और वित्तीय क्षेत्र की बेहतर होती बैलेंस शीट आर्थिक वृद्धि के प्रमुख आधार बने हुए हैं। इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा ने कहा कि यदि नीतिगत सुधार निजी निवेश को प्रोत्साहित करने और विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सफल होते हैं, तो भारत मध्यम अवधि में 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर बनाए रख सकता है। पहली तिमाही में स्थिर कीमतों पर वास्तविक जीडीपी 81.36 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में दर्ज 75.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इससे अर्थव्यवस्था के आकार में निरंतर विस्तार का संकेत मिलता है।

निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियों में तेजी

पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जूनजा ने पहली तिमाही के आंकड़ों को अर्थव्यवस्था के व्यापक आधार पर मजबूत होने का संकेत बताया। उनके मुताबिक इस अवधि में सीमेंट उत्पादन सूचकांक में 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। आईआईपी के इंफ्रास्ट्रक्चर या निर्माण वस्तुओं में 7.2 प्रतिशत और बिजली क्षेत्र में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि बुनियादी ढांचे और निर्माण गतिविधियों में मांग बनी हुई है। सार्वजनिक निवेश के साथ निजी क्षेत्र की गतिविधियां बढ़ने से आने वाले समय में औद्योगिक उत्पादन को और गति मिलने की उम्मीद है।

वाहनों की मांग ने भी दिया मजबूती का संकेत

घरेलू मांग से जुड़े संकेतकों में भी तेजी देखने को मिली। पहली तिमाही में यात्री परिवहन वाहनों के पंजीकरण में सालाना आधार पर 13.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं, माल परिवहन वाहनों के पंजीकरण में 20.1 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार वाहनों की बिक्री और पंजीकरण में बढ़ोतरी उपभोक्ता मांग के साथ-साथ कारोबारी गतिविधियों में सुधार का संकेत देती है। माल परिवहन वाहनों की मजबूत मांग आर्थिक गतिविधियों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में बढ़ती जरूरतों को भी दर्शाती है।

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सेवा क्षेत्र 10% बढ़ा, आईटी और वित्तीय सेवाओं का योगदान

भारत के सेवा क्षेत्र ने भी आर्थिक वृद्धि को बड़ा सहारा दिया। स्थिर कीमतों पर सेवा क्षेत्र में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वित्तीय, रियल एस्टेट, आईटी और पेशेवर सेवाओं ने इस प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाई और इन क्षेत्रों में 12.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा कि मजबूत जीडीपी वृद्धि अर्थव्यवस्था में चक्रीय तेजी की पुष्टि करती है। उन्होंने कहा कि यही मजबूती कॉरपोरेट आय और कई उच्च-आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतकों में भी दिखाई दे रही है।

निर्यात में जोरदार उछाल

बाहरी क्षेत्र ने भी आर्थिक प्रदर्शन को मजबूती दी। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में सालाना आधार पर 25.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। परिवहन वस्तुओं के निर्यात में यह वृद्धि 52.2 प्रतिशत रही। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों के बीच निर्यात में मजबूत वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की बाहरी प्रतिस्पर्धात्मकता और सेवा क्षेत्र की क्षमता को दर्शाती है। मध्य पूर्व संकट के बावजूद आर्थिक गतिविधियों का मजबूत बने रहना भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

पूरे साल 7% से ज्यादा वृद्धि की उम्मीद

अरोड़ा के मुताबिक कंपनियां बढ़ी हुई इनपुट लागत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाने में सक्षम रही हैं। वहीं, एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने मजबूत जीडीपी और विनिर्माण वृद्धि के साथ तृतीयक क्षेत्र में 10 प्रतिशत तथा निर्माण क्षेत्र में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि को उत्साहजनक बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा तिमाही में 7 प्रतिशत से अधिक की मजबूत वृद्धि की रफ्तार पूरे वित्त वर्ष 2026-27 में भी जारी रह सकती है। उद्योग जगत का मानना है कि निवेश, घरेलू खपत, सेवाओं और विनिर्माण का संतुलित विस्तार भारत की विकास कहानी को आगे बढ़ा सकता है।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...

1. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP वृद्धि कितनी रही?

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जो पिछली वित्त वर्ष की समान तिमाही के 6.9 प्रतिशत से अधिक है।

2. भारत की GDP वृद्धि को किन क्षेत्रों से सबसे ज्यादा मजबूती मिली?

मजबूत घरेलू मांग, निवेश, विनिर्माण, निर्माण और सेवा क्षेत्र ने आर्थिक वृद्धि को सहारा दिया। सेवा क्षेत्र में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।

3. पहली तिमाही में भारत के निर्यात में कितनी वृद्धि हुई?

वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में सालाना आधार पर 25.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि परिवहन वस्तुओं के निर्यात में 52.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

4. क्या भारत की GDP वृद्धि आगे भी 7 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है?

विशेषज्ञों के अनुसार नीतिगत सुधार, निजी निवेश में तेजी और विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने पर भारत मध्यम अवधि में 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर बनाए रख सकता है।

 

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