Fitch Ratings India GDP: वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि पर अंतरराष्ट्रीय भरोसा कायम है। प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.4 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। एजेंसी का कहना है कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू मांग के दम पर स्थिर विकास पथ पर बनी रहेगी।
फिच ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा कि मार्च में किए गए अनुमान की तुलना में यह वृद्धि दर 0.3 प्रतिशत कम है, लेकिन इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा।
रिपोर्ट के अनुसार भारत की आर्थिक वृद्धि का सबसे बड़ा आधार घरेलू मांग है। उपभोक्ता खर्च, निजी निवेश और सरकारी पूंजीगत व्यय आने वाले वर्षों में अर्थव्यवस्था को गति देते रहेंगे। फिच का मानना है कि शुद्ध बाहरी मांग यानी निर्यात और आयात के बीच संतुलन भी धीरे-धीरे सकारात्मक योगदान देगा, क्योंकि आयात में अपेक्षित कमी देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक झटकों के मुकाबले अपेक्षाकृत अधिक लचीली है, जिसका कारण मजबूत घरेलू बाजार और बढ़ता मध्यम वर्ग है।
फिच ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2028 में पश्चिम एशिया संकट में कमी आने के बाद वैश्विक परिस्थितियां बेहतर होंगी, जिससे भारत की आर्थिक वृद्धि में और तेजी देखने को मिलेगी। इस दौरान मजबूत उपभोक्ता खर्च और निवेश गतिविधियों के चलते जीडीपी वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसके बाद वित्त वर्ष 2029 में वृद्धि दर सामान्य स्तर पर लौटते हुए 6.4 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है, जो भारत की दीर्घकालिक स्थिर विकास क्षमता को दर्शाता है।

फिच के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कूल्टन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक आर्थिक विकास पर दबाव डाल रही हैं। तेल कीमतों में वृद्धि न केवल महंगाई बढ़ाती है, बल्कि निवेश और उपभोक्ता मांग पर भी असर डालती है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) खर्च में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को कुछ हद तक सहारा मिल रहा है। विशेष रूप से एशियाई देशों में डिजिटल निवेश आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर रहा है।
फिच ने कहा कि भारत में फिलहाल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई बहुत अधिक नहीं है, लेकिन आने वाले महीनों में इसमें बढ़ोतरी की संभावना है। एजेंसी का अनुमान है कि वर्ष 2026 के अंत तक महंगाई 5.3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसके पीछे प्रमुख कारणों में ऊर्जा कीमतों में वृद्धि, वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और खाद्य आपूर्ति पर मौसम का प्रभाव शामिल हैं।
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि सामान्य से कम मानसून और देश के कुछ हिस्सों में अत्यधिक गर्मी खाद्य उत्पादों की कीमतों को बढ़ा सकती है। इसका सीधा असर महंगाई दर पर पड़ेगा, जिससे उपभोक्ता खर्च प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार कृषि उत्पादन में उतार-चढ़ाव भारत की मुद्रास्फीति संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

फिच ने भारतीय मुद्रा रुपये को लेकर अपेक्षाकृत स्थिर दृष्टिकोण रखा है। एजेंसी का कहना है कि इस वर्ष रुपये में किसी बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है, हालांकि सीमित उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। विदेशी मुद्रा भंडार की मजबूती और निर्यात प्रदर्शन रुपये को स्थिर बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।
गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत रखा है, जो फिच के अनुमान से थोड़ा अधिक है। आरबीआई के अनुसार, विभिन्न तिमाहियों में वृद्धि दर में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, लेकिन कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी।
केंद्रीय बैंक ने भी चेतावनी दी है कि वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और जलवायु संबंधी झटके विकास दर को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था संरचनात्मक रूप से मजबूत बनी हुई है।
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