Gross Domestic Product : केंद्र सरकार आज जारी करेगी वित्त वर्ष 2026 के जीडीपी आंकड़े, अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर रहेगी सबकी नजर
खबर सार :-
केंद्र सरकार शुक्रवार को वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही के जीडीपी आंकड़े और पूरे वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि दर जारी करेगी। अर्थशास्त्रियों ने वैश्विक अनिश्चितताओं और बाहरी जोखिमों के कारण अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर कम रहने का अनुमान लगाया है। पूरे वित्त वर्ष के जीडीपी आंकड़े 2022-23 को नया आधार वर्ष मानते हुए जारी किए जाएंगे। आंकड़ों पर नीति निर्माताओं, बाजार विशेषज्ञों, अर्थशास्त्रियों की खास नजर रहेगी।
खबर विस्तार : -
Gross Domestic Product : केंद्र सरकार शुक्रवार को वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही (चौथी तिमाही) के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े और पूरे वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि दर जारी करेगी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और बाहरी जोखिमों के कारण अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर पहले के अनुमान से कुछ कम रह सकती है।
2022-23 को नया आधार वर्ष मानकर जारी किए जाएंगे जीडीपी आंकड़े
इसके अलावा, पूरे वित्त वर्ष के जीडीपी आंकड़े 2022-23 को नया आधार वर्ष मानकर जारी किए जाएंगे। राष्ट्रीय आय की गणना में यह एक महत्वपूर्ण सांख्यिकीय संशोधन माना जा रहा है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर लगभग 7.4 प्रतिशत रह सकती है, जो दूसरे अग्रिम अनुमान (एसएई) में दिए गए अनुमान से करीब 0.20 प्रतिशत कम है।
नीति निर्माताओं, बाजार विशेषज्ञों, अर्थशास्त्रियों की आंकड़ों पर रहेगी खास नजर
इन आंकड़ों पर नीति निर्माताओं, बाजार विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों की खास नजर रहेगी, जिससे यह पता चलेगा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊंची ऊर्जा कीमतों के बीच देश में घरेलू मांग, निवेश गतिविधियों और उपभोग की स्थिति कैसी रही।
हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। वहीं, अर्थशास्त्रियों ने कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर मानसून की आशंका को अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम बताया है।
आर्थिक गतिविधियों का माना जाता है सबसे व्यापक संकेतक
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) किसी देश में एक निश्चित अवधि के दौरान उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को दर्शाता है। इसे आर्थिक गतिविधियों का सबसे व्यापक संकेतक माना जाता है, और यह राजकोषीय नीति, मौद्रिक नीति तथा निवेश संबंधी फैसलों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है। जीडीपी के प्रमुख घटकों में निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) आर्थिक गतिविधियों में सबसे बड़ा योगदान देता है। वास्तविक आधार पर इसका हिस्सा जीडीपी में लगभग 55 से 56 प्रतिशत है।
अर्थव्यवस्था को समर्थन देती दिख रही हैं निवेश गतिविधियां
दूसरे अग्रिम अनुमान (एसएई) के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में पीएफसीई की वृद्धि दर 8.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 9.7 प्रतिशत थी। सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) के जरिए मापी जाने वाली निवेश गतिविधियां भी अर्थव्यवस्था को समर्थन देती दिख रही हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में इसकी वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 6.4 प्रतिशत थी।
सरकारी खर्च भी मजबूत रहने की उम्मीद
सरकारी खर्च भी मजबूत रहने की उम्मीद है। सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (जीएफसीई) वित्त वर्ष 2025-26 में 9.6 प्रतिशत बढ़ सकता है, हालांकि यह वित्त वर्ष 2024-25 के स्तर से थोड़ा कम रहेगा। सकल मूल्य वर्धन (जीवीए), जो विभिन्न क्षेत्रों के उत्पादन को दर्शाता है, वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। एक साल पहले यह वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत थी।
चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि के मिलेंगे संकेत
ये आंकड़े यह स्पष्ट तस्वीर पेश करेंगे कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था ने घरेलू मांग, निवेश की गति और वैश्विक चुनौतियों का किस तरह सामना किया। साथ ही, इससे चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि के लिए भी संकेत मिलेंगे। इससे पहले, मई में सरकार ने वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनंतिम अनुमानों (पीई) और चौथी तिमाही (क्यूबी) के तिमाही अनुमानों की जारी करने की तिथि को हर साल मई के अंतिम कार्य दिवस से संशोधित करके 7 जून (या यदि 7 जून को छुट्टी का दिन हो तो उससे पहले के कार्य दिवस) कर दिया था।
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