महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही समिति, रोजगार का प्रशिक्षण और फिर मिलता है बाजार

खबर सार :-

महिलाओं को छोटे-छोटे रोजगार करने के लिए समिति पहले प्रशिक्षण देती है। उसके बाद फिर तैयार किया गया माल बेचने के लिए बाजार भी उपलब्ध कराया जाता है। जिन दिनों में बाजार की उपलब्धता नहीं रहती है, समिति अपने किसी खास ब्रांड के जरिए माल बेचने में मदद करती है।
लखनऊ के दीवाली मेले में महिलाओं की मेहनत को मिलेगा नया बाज़ार

खबर विस्तार : -

लखनऊ, महिलाओं को रोज़गार के मौकों से जोड़ने वाली ‘आकांक्षा समिति’ की पहल, आने वाले दीवाली मेले में देखने को मिलेगी। त्योहार के मौके पर समिति नए ग्राहकों तक पहुंच बनाएगी। मेला के उद्घाटन 24 अक्टूबर को होना है। इसमें समिति के मसाला-मठरी केंद्र के उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। दावा किया गया है कि समिति ने करीब लखनऊ में मौजूद अब तक 120 से ज़्यादा महिलाओं को रोज़गार दिया है।

मेला, राजभवन कॉलोनी स्थित क्लब के लॉन में होगा

यह मेला महिला उद्यमियों के लिए है। इसमें कारीगरों और सामाजिक संगठनों को भी उनके तैयार किए गए उत्पाद पेश करने का मौका मिलेगा। लोगों के सामने पेश करने का यह एक आसान मंच मिलने जा रहा है। सुबह 11ः00 बजे से रात 10ः00 बजे तक चलने वाले इस आयोजन में खरीदारी, खाने-पीने के स्टॉल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बच्चों के लिए कई तरह के खेल व गतिविधियां होंगी।उत्तर प्रदेश ऑफिसर्स वाइव्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित यह दिवाली मेला, राजभवन कॉलोनी स्थित क्लब के लॉन में होगा।

पदाधिकारियों का कहना है कि हमारा लक्ष्य ज़रूरतमंद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। उनको मदद की जरूरत का आदी नहीं बनाना है। वह स्वावलंबी बनें और खुद अपना काम करें। एसोसिएशन और आकांक्षा समिति की अध्यक्ष डॉ. नीलू गोयल ने कहा कि महिलाओं को उनके लिए कमाई के रास्ते बनाना ज़रूरी है। सशक्तिकरण का मतलब महिलाओं के जीवन में ऐसा आर्थिक बदलाव लाना है, जिससे वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।

महिलाओं द्वारा हाथ से बनाई गई चीजें उपलब्ध होंगी

मसाले और खाद्य पदार्थों के उत्पादन के ज़रिए रोज़गार देने में मिली सफलता के बाद, अब ‘आकांक्षा’ सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। समिति की ओर से कहा गया है कि जो स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से मसालों और खाद्य उत्पादों को तैयार कर रही हैं, वह समिति के सहयोग से ब्रांड के तहत बेच सकेंगे। उनको बाजार तक पहुंचाने में मदद करना जारी रखा जाएगा। डॉ. गोयल का कहना है कि यदि ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पाद सीधे खरीदारों तक पहंुचते हैं, तो उनके काम को पहचान मिलेगी। 

दीवाली मेले में आकांक्षा के उत्पादों के साथ-साथ, महिला आश्रय गृह की महिलाओं द्वारा हाथ से बनाई गई चीजें उपलब्ध कराएंगी। यहां साड़ियां, चिकनकारी वाले कपड़े, आभूषण, कालीन, मिट्टी की सजावटी वस्तुएं, हस्तशिल्प और घर की सजावट का सामान भी बेचने को लाया जाएगा। 1987 में स्थापित आकांक्षा समिति सामाजिक सेवा विभाग के रूप में काम करती है। राज्य के कई जिलों में सक्रिय इसकी स्थानीय शाखाएं महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और रोजगार के लिए काम करती हैं। 

समिति एक कंपन की तरह काम कर रही है। इसका उद्देश्य साफ है। जब महिलाएं अपना काम सीख जाएंगी, वह खुद का रोजगार कर सकती हैं। उन पर किसी प्रकार की बाध्यता नहीं रहेगी। महिलाओं को यह नया रोजागर के रूप में मिलंगा। छोटे उद्यमी भी ऐसे काम करते है। सरकार की ओर से जरूरत पड़ने पर धन मुहैया कराया जाता है।

प्रशिक्षण के लिए धन जमा करने से बचें महिलाएं

कई ऐसे लोग बाजार में प्रशिक्षण दे रहे हैं। जिनका मिशन लोगों को ठगना है। जब तब कमाई नहीं हो रही, सोचना चाहिए कि गरीब पैसे कहां से दे पाएगा? इसलिए सरकार की ओर से कराए जा रहे प्रशिक्षण या फिर भरोसे योग्य संस्थाओं से ही प्रशिक्षण लें। सरकार से  भी लोन आदि लेने में बचें। इस कार्य में किसी को इन्वाल्व न करें। अपना  व्यवसाय खुद करें। किसी के भरोसे पर अचानक कोई बिजनेस चमका नहीं देगा। कई बार कंपनियां उधर करवा देती है। या फिर कर्ज करवा देती हैं। महिलाएं पहले से ही बेरोगारी झेलती रहती हैं। फिर कर्ज उतारती हैैं।

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