भारत-ब्रिटेन व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार, TPCI-UKIBC समझौते से भारतीय निर्यातकों के लिए खुलेंगे नए बाजार
खबर सार :-
भारत-ब्रिटेन व्यापार को बढ़ावा देने के लिए TPCI और UKIBC का समझौता नई संभावनाएं खोलेगा। CETA के तहत शुल्क में राहत, B2B बैठकें और बाजार तक बेहतर पहुंच भारतीय खाद्य निर्यातकों, MSME कारोबारियों और रोजगार सृजन को गति दे सकती हैं।
खबर विस्तार : -
India-UK Trade: भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती देने के लिए ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (TPCI) और यूके-इंडिया बिजनेस काउंसिल (UKIBC) ने एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के लागू होने के बाद हुई इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके जरिए भारतीय कंपनियों को ब्रिटिश बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने और नए कारोबारी साझेदार तलाशने के अवसर मिल सकते हैं।
कंपनियों को जोड़ने और बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर जोर
TPCI के बयान के मुताबिक, समझौते के तहत दोनों देशों की कंपनियों के बीच संपर्क मजबूत करने, व्यापार मिशनों को प्रोत्साहित करने और बाजार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) के लिए नए अवसर विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। इस समझौते का मकसद संस्थागत स्तर पर ऐसा सहयोग ढांचा तैयार करना है, जिससे व्यापारिक संभावनाओं को वास्तविक कारोबारी साझेदारी में बदला जा सके। CETA से मिलने वाले लाभों को भारतीय निर्यातकों तक पहुंचाने और ब्रिटेन में भारतीय उत्पादों की मौजूदगी बढ़ाने में भी यह पहल अहम भूमिका निभा सकती है।
लंदन में 48 भारतीय निर्यातकों और 150 आयातकों की बैठक
समझौते के साथ ही TPCI ने लंदन में बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) मैचमेकिंग कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें भारत की 48 निर्यातक कंपनियों और ब्रिटेन के 150 आयातकों ने भाग लिया। इस आयोजन का उद्देश्य दोनों देशों के कारोबारियों को एक मंच पर लाकर संभावित व्यापारिक साझेदारियों को बढ़ावा देना था। ऐसे कार्यक्रम निर्यातकों को विदेशी खरीदारों की जरूरतों को समझने, बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद पेश करने और दीर्घकालिक कारोबारी संबंध बनाने में मदद कर सकते हैं। खासतौर पर छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने का यह एक उपयोगी माध्यम है।
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प्रोसेस्ड फूड बाजार में भारत के लिए बड़ी संभावनाएं
खाद्य एवं पेय पदार्थ क्षेत्र को भारत-ब्रिटेन व्यापार सहयोग के प्रमुख संभावनाशील क्षेत्रों में शामिल किया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ब्रिटेन हर साल लगभग 50.68 अरब डॉलर मूल्य के प्रोसेस्ड फूड का आयात करता है। इसके मुकाबले इस बाजार में भारत की हिस्सेदारी महज 0.6 प्रतिशत यानी लगभग 30.95 करोड़ डॉलर है। यह अंतर भारतीय खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने की संभावनाओं की ओर संकेत करता है। भारतीय कंपनियां ब्रिटेन में खुदरा कारोबार, खाद्य सेवा उद्योग और अन्य वितरण माध्यमों के जरिए अपनी पहुंच बढ़ा सकती हैं। हालांकि, इसके लिए उत्पाद गुणवत्ता, पैकेजिंग, खाद्य सुरक्षा मानकों और उपभोक्ताओं की पसंद के अनुरूप रणनीति बनाना जरूरी होगा।
CETA से कई भारतीय उत्पादों को शुल्क में राहत
भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के तहत कई भारतीय उत्पादों को ब्रिटिश बाजार में शुल्क संबंधी राहत मिलने की बात कही गई है। TPCI के अनुसार, प्रोसेस्ड फूड पर पहले लगने वाले 70 प्रतिशत तक के शुल्क, झींगा पर 4.2 से 8.5 प्रतिशत तक के शुल्क और इंस्टेंट कॉफी पर लागू ड्यूटी समाप्त कर दी गई है। शुल्क कम होने या समाप्त होने से भारतीय उत्पादों की कीमत प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिल सकती है। इससे निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार में दूसरे देशों के उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का बेहतर अवसर मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक लाभ उत्पाद श्रेणी, मांग, आपूर्ति लागत और कारोबारियों की बाजार रणनीति पर भी निर्भर करेगा।
ब्रिटिश कारोबारी संस्थाओं से भी हुई चर्चा
TPCI के अध्यक्ष मोहित सिंघला ने कहा कि यह समझौता भारत-ब्रिटेन व्यापारिक संबंधों को नीतिगत सहयोग से आगे बढ़ाकर वास्तविक साझेदारी में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि CETA लागू होने के बाद दोनों संगठन द्विपक्षीय व्यापार को गति देने और मुक्त व्यापार समझौते से मिलने वाले अवसरों को जमीन पर उतारने के लिए सक्रिय रूप से काम करेंगे। सिंघला के मुताबिक, अब भारतीय उत्पादों की 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच मिल रही है। उन्होंने कहा कि प्रोसेस्ड फूड पर 70 प्रतिशत तक के शुल्क समाप्त होने से भारतीय खाद्य निर्यातकों के लिए कारोबार की संभावनाएं बढ़ी हैं। लंदन दौरे के दौरान TPCI के प्रतिनिधिमंडल ने ब्रिटेन के डिपार्टमेंट फॉर बिजनेस, इनोवेशन, साइंस एंड ट्रेड (BIST), लंदन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (LCCI) और स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन के अधिकारियों से मुलाकात की। इन बैठकों में व्यापार सहयोग बढ़ाने और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए कारोबारी समर्थन तंत्र मजबूत करने पर चर्चा हुई।
48 अरब पाउंड तक पहुंचा द्विपक्षीय व्यापार
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 48 अरब पाउंड यानी करीब 65 अरब डॉलर तक पहुंच गया। CETA के लागू होने के बाद दोनों देशों के कारोबारी संबंधों में और विस्तार की संभावनाएं बनी हैं। उद्योग जगत का मानना है कि भारतीय निर्यातक ब्रिटेन में रहने वाले लगभग 18.6 लाख भारतीय मूल के लोगों के पारंपरिक बाजार से आगे बढ़कर मुख्यधारा के खुदरा और खाद्य सेवा क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत कर सकते हैं। इसके लिए कंपनियों को बाजार की मांग, वितरण नेटवर्क और गुणवत्ता मानकों पर विशेष ध्यान देना होगा। कुल मिलाकर, TPCI और UKIBC का समझौता भारत-ब्रिटेन व्यापारिक सहयोग को संस्थागत आधार देने की दिशा में एक अहम कदम है। यदि शुल्क संबंधी राहत, कारोबारी संपर्क और बाजार तक पहुंच के अवसरों का प्रभावी इस्तेमाल किया जाता है, तो भारतीय निर्यात, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)...
1. TPCI और UKIBC के बीच समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस समझौते का उद्देश्य भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार, निवेश और कारोबारी सहयोग बढ़ाना, कंपनियों को जोड़ना तथा भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार अवसर पैदा करना है।
2. भारत-ब्रिटेन CETA से भारतीय निर्यातकों को क्या लाभ मिलेगा?
CETA के तहत कई भारतीय उत्पादों पर ब्रिटेन में शुल्क संबंधी राहत मिली है। इससे प्रोसेस्ड फूड, झींगा और इंस्टेंट कॉफी जैसे उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
3. लंदन में आयोजित B2B कार्यक्रम में कितनी कंपनियों ने भाग लिया?
लंदन में आयोजित B2B मैचमेकिंग कार्यक्रम में भारत की 48 निर्यातक कंपनियों और ब्रिटेन के 150 आयातकों ने हिस्सा लिया, ताकि कारोबारी संपर्क और संभावित साझेदारियां बढ़ाई जा सकें।
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