भारतीय मुद्रा रुपये में फिर मजबूती आने की संभावना, RBI ने बताया CAD, FTA और निर्यात का दम

खबर सार :-

रुपये की हालिया कमजोरी के बावजूद आरबीआई डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने मजबूती की गुंजाइश बताई है। घटता CAD, सेवा निर्यात, रेमिटेंस, कम तेल निर्भरता और FTA से मिलने वाले अवसर भारतीय मुद्रा को आगे सहारा दे सकते हैं।
रुपये को मिलेगी मजबूती की राह! CAD घटने और FTA से बढ़ेंगे नए अवसर

खबर विस्तार : -

Indian Rupee: भारतीय रुपये में हालिया कमजोरी के बावजूद आने वाले वर्षों में इसके स्थिर होने और मजबूत होने की गुंजाइश बनी हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि भारत के चालू खाते का घाटा (CAD) आगे और कम हो सकता है। इसके साथ ही वस्तुओं के निर्यात में बढ़ती सफलता, सेवा निर्यात, रेमिटेंस और हालिया मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलने की उम्मीद है।

पूनम गुप्ता के मुताबिक, 31 मार्च 2025 से 16 सितंबर 2026 तक प्वाइंट-टू-प्वाइंट आधार पर भारतीय रुपया संचयी रूप से 13.1 प्रतिशत कमजोर हुआ है। ऐसे में मौजूदा स्तर से भारतीय मुद्रा के केवल स्थिर होने ही नहीं, बल्कि मजबूत होने की भी पर्याप्त गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि जब पूंजी प्रवाह से जुड़े उपाय पहली बार घोषित किए गए थे, तब बाजार विश्लेषकों ने भी रुपये के स्थिर होने और मजबूत होने की संभावना जताई थी।

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घटता CAD बनेगा रुपये का सहारा

आरबीआई डिप्टी गवर्नर ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत का चालू खाता घाटा और कम हो सकता है। इसकी वजह अर्थव्यवस्था की पारंपरिक मजबूती के साथ नई आर्थिक ताकतों का उभरना है। इनमें वस्तुओं के निर्यात में बढ़ती सफलता प्रमुख है। मुंबई में एसबीआई के एक सम्मेलन में उन्होंने कहा कि आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित परिस्थितियां सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक के पास कई दशकों के चालू खाते या भुगतान संतुलन के शुद्ध घाटे को पूरा करने की क्षमता है। भारत परंपरागत रूप से चालू खाते में मामूली घाटा और पूंजी खाते में बड़ा अधिशेष दर्ज करता रहा है। इससे देश का भुगतान संतुलन सकारात्मक रहने में मदद मिली है। समय के साथ जीडीपी के प्रतिशत के रूप में भारत का CAD कम हुआ है, जिससे बाहरी क्षेत्र की स्थिति को मजबूती मिली है।

सेवा निर्यात और रेमिटेंस बड़ी ताकत

पूनम गुप्ता ने कहा कि भारत का CAD उन स्तरों से काफी नीचे रहा है, जिन्हें आमतौर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए उचित माना जाता है। भारत के शुद्ध सेवा निर्यात और विदेशों से आने वाला रेमिटेंस लंबे समय से देश की संरचनात्मक ताकत बने हुए हैं। इन दोनों स्रोतों से मिलने वाली विदेशी मुद्रा आय इतनी महत्वपूर्ण है कि यह वस्तुओं के व्यापार घाटे को संतुलित करने में मदद करती है। आरबीआई डिप्टी गवर्नर के अनुसार, यही वजह है कि भारत का CAD जीडीपी के 1 प्रतिशत से नीचे बनाए रखने में मदद मिली है।

तेल-सोने के झटकों से बढ़ा दबाव

हालांकि हाल में तेल और सोने की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव ने भारत के चालू खाते पर अस्थायी दबाव बढ़ाया है। इसके अलावा, पिछले दो वर्षों में पूंजी खाते का अधिशेष CAD से कम रहा। इसका असर भुगतान संतुलन पर भी पड़ा। आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने 2024-25 में करीब 5.0 अरब डॉलर और 2025-26 में 23.6 अरब डॉलर का नकारात्मक भुगतान संतुलन दर्ज किया। इससे बाहरी क्षेत्र पर दबाव की स्थिति सामने आई, लेकिन आरबीआई के अनुसार दीर्घकालिक संरचनात्मक ताकतें अभी भी महत्वपूर्ण हैं।

आयातित तेल पर निर्भरता घटने की उम्मीद

गुप्ता ने कहा कि वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के बढ़ते इस्तेमाल और देश में तेल भंडार खोजने के प्रयासों से भारत की आयातित तेल पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है। इससे जीडीपी के प्रतिशत के रूप में तेल की मांग में लंबे समय से जारी गिरावट की प्रवृत्ति को और मजबूती मिल सकती है। अगर वैश्विक संघर्ष समाप्त होने के साथ तेल की कीमतों में स्थिरता आती है, तो भारत के बाहरी क्षेत्र को अतिरिक्त राहत मिल सकती है। इससे चालू खाते पर ऊर्जा आयात का दबाव कम होने की संभावना है।

FTA से निर्यात को मिल सकता है बढ़ावा

आरबीआई डिप्टी गवर्नर ने हालिया मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के सकारात्मक प्रभावों को भी रुपये और बाहरी क्षेत्र के लिए अहम बताया। उनके मुताबिक, आने वाले समय में इन समझौतों से पैदा होने वाले अवसरों का लाभ भारतीय निर्यात को मिल सकता है। वस्तुओं के निर्यात में बढ़ती सफलता, सेवा निर्यात, रेमिटेंस, कम होता CAD और अनुकूल विनिमय दर मिलकर भारत की बाहरी स्थिति को समर्थन दे सकते हैं। हालांकि रुपये की दिशा वैश्विक तेल कीमतों, पूंजी प्रवाह और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिस्थितियों जैसे कारकों पर भी निर्भर रहेगी।

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FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)....

1. रुपये की मजबूती को लेकर RBI ने क्या कहा?

RBI डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि मौजूदा स्तर से रुपये के स्थिर होने के साथ मजबूत होने की भी पर्याप्त गुंजाइश है।

2. रुपये को मजबूती देने वाले प्रमुख कारक कौन से हैं?

घटता चालू खाता घाटा, मजबूत सेवा निर्यात, रेमिटेंस, वस्तुओं के निर्यात में बढ़ोतरी और आयातित तेल पर घटती निर्भरता रुपये को सहारा दे सकते हैं।

3. FTA से भारत को क्या फायदा हो सकता है?

हालिया मुक्त व्यापार समझौतों से भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार और अवसर खुलने की उम्मीद है, जिससे विदेशी मुद्रा आय और बाहरी क्षेत्र को समर्थन मिल सकता है।

 

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