आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ के बीच भारत ने दिखाई मजबूती, निवेश और विकास के नए अवसर रहे उभर

खबर सार :-

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत ने आर्थिक ताकत दिखायी है। एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने आर्थिक चुनौतियों का सामना बखूबी किया है।
एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत ने दिखाई आर्थिक ताकत

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए बढ़ते वैश्विक निवेश कॉम्पिटिशन और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारत ने ज़बरदस्त आर्थिक ताकत दिखाई है। HSBC ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की कहानी AI से पीछे छूटने की नहीं है, बल्कि मज़बूती, मौकों और लगातार ग्रोथ की है। रिपोर्ट में, HSBC के अर्थशास्त्री ने कहा, "हाल के सालों में, AI निवेश का एक बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा देशों और सीमित सेक्टर्स में ही रहा है, जिससे ग्लोबल कैपिटल फ्लो का बैलेंस प्रभावित हुआ है। इससे निवेशकों को चिंता हुई है कि AI हार्डवेयर सेक्टर में सीमित मौजूदगी और सर्विसेज़ एक्सपोर्ट पर संभावित दबाव भारत की ग्रोथ की संभावनाओं पर असर डाल सकता है। हालांकि, अब इन अंदाज़ों पर फिर से सोचने का समय आ गया है।

पिछले सालों की तरह बेकाबू नहीं हुआ है करंट अकाउंट डेफिसिट 

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अब तक इन चुनौतियों का कामयाबी से सामना किया है। हालांकि पश्चिम एशिया में लड़ाई के दौरान ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने कुछ समय के लिए आर्थिक गतिविधियों पर असर डाला था, लेकिन तब से अर्थव्यवस्था तेज़ी से ठीक हो गई है। भारत ने ऊर्जा की ऊंची कीमतों के असर को काफ़ी अच्छे से मैनेज किया है, और करंट अकाउंट डेफिसिट पिछले सालों की तरह बेकाबू नहीं हुआ है। HSBC के अर्थशास्त्री ने कहा, "इस मजबूती का एक मुख्य कारण सर्विसेज़ एक्सपोर्ट है, जो मज़बूत बना हुआ है। अब तक, AI की वजह से सर्विसेज़ एक्सपोर्ट पर कुल मिलाकर कोई खास बुरा असर नहीं पड़ा है। इसके उलट, सर्विसेज़ एक्सपोर्ट लगातार बढ़ रहा है और अब यह सालाना आधार पर मर्चेंडाइज़ एक्सपोर्ट के लेवल के करीब है।

क्रेडिट ग्रोथ-कॉर्पोरेट रेवेन्यू ग्रोथ में हुआ है सुधार 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्राइवेट सेक्टर की क्रेडिट ग्रोथ और कॉर्पोरेट रेवेन्यू ग्रोथ में सुधार हुआ है। गाड़ियों की बिक्री मज़बूत बनी हुई है, और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च बढ़ रहा है, जिससे घरेलू आर्थिक गतिविधियों को सपोर्ट मिल रहा है। एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस खास तौर पर ध्यान देने लायक है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल ट्रेड का एक बड़ा हिस्सा अभी AI हार्डवेयर से चलता है, जबकि भारत इस फील्ड में कोई बड़ा प्लेयर नहीं है। इसके बावजूद, भारतीय एक्सपोर्ट में सुधार यह दिखाता है कि देश धीरे-धीरे ग्लोबल मार्केट शेयर हासिल कर रहा है। महामारी में तेज़ी के बाद कुछ सालों तक सामान का एक्सपोर्ट रुका रहा, लेकिन हाल के महीनों में इसने फिर से रफ़्तार पकड़ ली है। दूसरी ओर, सर्विस एक्सपोर्ट लगातार अच्छी ग्रोथ दर्ज कर रहा है।

भारतीय प्रोफेशनल्स की उत्पादकता बढ़ाकर नए मौके पैदा करेगा AI 

HSBC का मानना ​​है कि AI से भारत के सर्विस सेक्टर को नुकसान होने का डर बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सच है कि AI-बेस्ड बॉट कुछ पारंपरिक कामों, जैसे कॉल सेंटर में इंसानी काम करने वालों की जगह ले सकते हैं, लेकिन AI भारतीय प्रोफेशनल्स की प्रोडक्टिविटी बढ़ाकर नए मौके भी पैदा करेगा। इससे उन सेक्टर्स में कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ेगी जहां भारतीय वर्कफोर्स को पहले चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। घरेलू आर्थिक गतिविधियां भी मज़बूत हो रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रेडिट ग्रोथ में तेज़ी भविष्य में इन्वेस्टमेंट खर्च में बढ़ोतरी का संकेत देती है। खास तौर पर, प्राइवेट कंपनियों के कैपिटल खर्च (capex) बढ़ाने की संभावना है। HSBC के मुताबिक, डिटेल्ड डेटा से पता चलता है कि बड़ी कंपनियों को कॉर्पोरेट लोन बढ़े हैं। ऐसी कंपनियां आम तौर पर बड़े इन्वेस्टमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंड करती हैं, इसलिए इस ट्रेंड को भविष्य की इकोनॉमिक एक्टिविटी के लिए एक पॉजिटिव संकेत माना जा रहा है।

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