​​​​​​​RBI का ₹1 लाख करोड़ का दांव, OMO से सोखेगा नकदी, बॉन्ड यील्ड में आया तेज उछाल

खबर सार :-

RBI की 1 लाख करोड़ रुपये की OMO बॉन्ड बिक्री बैंकिंग सिस्टम की अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने की दिशा में बड़ा कदम है। तीन चरणों में होने वाली इस बिक्री से तरलता पर दबाव घटाने और ब्याज दरों को नीतिगत स्तर के करीब रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, बॉन्ड यील्ड में तेजी से निवेशकों के लिए बाजार की दिशा और सरकारी प्रतिभूतियों की कीमतों पर दबाव महत्वपूर्ण निगरानी का विषय रहेगा।
₹1 लाख करोड़ की बॉन्ड बिक्री से RBI का बड़ा ‘कैश कंट्रोल’ प्लान

खबर विस्तार : -

RBI OMO Bond Sales:  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को सोखने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड की ओपन मार्केट सेल (OMO) करने की घोषणा की है। केंद्रीय बैंक वित्त वर्ष 2028-29 से 2031-32 के बीच मैच्योर होने वाली सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री करेगा। इस कदम का मकसद वित्तीय प्रणाली में बढ़ी अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करना और अल्पकालिक ब्याज दरों को RBI के नीतिगत स्तर के आसपास बनाए रखना है।

तीन चरणों में होगी बॉन्ड बिक्री

RBI के मुताबिक, OMO बॉन्ड बिक्री तीन चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में 17 सितंबर 2026 को 50,000 करोड़ रुपये, दूसरे चरण में 21 सितंबर को 25,000 करोड़ रुपये और तीसरे चरण में 28 सितंबर को 25,000 करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड बेचे जाएंगे। नीलामी मल्टी-सिक्योरिटी और मल्टीपल-प्राइस पद्धति से आयोजित होगी। पात्र प्रतिभागियों को 17 सितंबर को सुबह 9:30 बजे से 10:30 बजे के बीच ई-कुबेर सिस्टम के जरिए अपनी बोलियां जमा करनी होंगी। नीलामी के परिणाम भी उसी दिन घोषित किए जाएंगे।

दो साल बाद RBI की बड़ी OMO बिक्री

यह पिछले करीब दो वर्षों में RBI की पहली शुद्ध ओपन मार्केट बॉन्ड बिक्री होगी। इससे पहले सितंबर 2024 में केंद्रीय बैंक ने द्वितीयक बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री की थी। वहीं, वित्त वर्ष 2020-21 और 2021-22 में RBI ने सरकारी बॉन्ड की खरीद और बिक्री दोनों को साथ लेकर चलने वाली रणनीति अपनाई थी। इस बार केंद्रीय बैंक का प्रमुख उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में जमा अतिरिक्त रुपये की तरलता को वापस खींचना है। अतिरिक्त नकदी की वजह से मनी मार्केट में ब्याज दरों पर दबाव बन रहा था और ओवरनाइट दरें RBI की रेपो रेट से नीचे चली गई थीं।

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बॉन्ड बाजार में दिखा तत्काल असर

RBI की घोषणा का असर सरकारी बॉन्ड बाजार में तुरंत देखने को मिला। बॉन्ड बिकवाली की खबर के बाद सरकारी प्रतिभूतियों की यील्ड में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। 10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6 आधार अंक बढ़कर 7.035 प्रतिशत हो गई। वहीं, पांच वर्षीय बॉन्ड की यील्ड करीब 10 आधार अंक बढ़कर 6.6222 प्रतिशत तक पहुंच गई। यील्ड में यह तेजी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है, क्योंकि RBI की ओर से बड़ी मात्रा में सरकारी बॉन्ड बाजार में आने का मतलब है कि प्रतिभूतियों की सप्लाई बढ़ेगी। इससे बॉन्ड कीमतों और यील्ड पर दबाव बन सकता है।

बैंकिंग सिस्टम में क्यों बढ़ी नकदी?

भारतीय बैंकिंग प्रणाली इस समय अतिरिक्त तरलता से जूझ रही है। हाल ही में बैंकों ने RBI की विशेष विदेशी मुद्रा जुटाव योजना के तहत उम्मीद से कहीं अधिक रकम जुटाई। इससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा और इसके साथ बैंकिंग प्रणाली में रुपये की तरलता भी बढ़ी। जब सिस्टम में नकदी जरूरत से ज्यादा हो जाती है, तो RBI के लिए उसे अवशोषित करना जरूरी हो जाता है। ज्यादा तरलता से अल्पकालिक ब्याज दरें नीचे आ सकती हैं और मौद्रिक नीति के प्रभावी संचालन में चुनौती पैदा हो सकती है।

महंगाई और कच्चे तेल की चुनौती भी शामिल

RBI का यह कदम ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। महंगा तेल भारत की आयात लागत बढ़ा सकता है और इससे महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे माहौल में केंद्रीय बैंक के लिए सिस्टम में अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित रखना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

हालिया रिपोर्टों में कहा गया था कि RBI अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी और स्थायी दोनों तरह के उपाय अपना सकता है। इनमें फॉरेन करेंसी स्वैप, मार्केट स्टेबिलाइजेशन स्कीम (MSS) बॉन्ड, OMO और कैश रिजर्व रेशियो (CRR) में संभावित बदलाव जैसे विकल्प शामिल हैं। फिलहाल 1 लाख करोड़ रुपये की OMO बिक्री से RBI ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह बैंकिंग सिस्टम की अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय कदम उठाने को तैयार है। आने वाले दिनों में बॉन्ड यील्ड, मनी मार्केट की दरों और बैंकिंग सिस्टम की तरलता पर इस कदम का असर बाजार की प्रमुख निगरानी में रहेगा।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)....

1. RBI ने 1 लाख करोड़ रुपये के OMO की घोषणा क्यों की है?

बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को सोखने और अल्पकालिक ब्याज दरों को नीतिगत स्तर के करीब बनाए रखने के लिए।

2. OMO बॉन्ड बिक्री कितने चरणों में होगी?

बिक्री तीन चरणों में होगी—17 सितंबर को ₹50,000 करोड़, 21 सितंबर को ₹25,000 करोड़ और 28 सितंबर को ₹25,000 करोड़।

3. OMO बिक्री का बॉन्ड यील्ड पर क्या असर पड़ा?

घोषणा के बाद सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेजी आई। 10 वर्षीय बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7.035% हो गई।

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