सेंसेक्स 533 अंक लुढ़का, निफ्टी 23,500 के नीचे; IT शेयरों पर दबाव, IPO से घटती लिक्विडिटी बनी चिंता
खबर सार :-
भारतीय शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। महंगा कच्चा तेल, अमेरिका-ईरान तनाव और IPO बाजार में बढ़ती पूंजी खपत बाजार के लिए बड़ी चुनौतियां बन गई हैं। हालांकि ऊर्जा, फार्मा और मेटल शेयरों में खरीदारी ने गिरावट को कुछ सीमित किया। आगे बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और प्राथमिक बाजार में पूंजी के प्रवाह पर निर्भर रह सकती है।
खबर विस्तार : -
Indian Stock Market: भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत भारी कमजोरी के साथ की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 533 अंक यानी 0.71 प्रतिशत फिसलकर 75,044 के स्तर पर आ गया। वहीं, निफ्टी 135 अंक यानी 0.57 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,498 पर कारोबार करता दिखाई दिया। कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों में सतर्कता बढ़ी और बाजार के प्रमुख सूचकांक लाल निशान में खुले।
आज के शुरुआती कारोबार में आईटी और सर्विसेज सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। निफ्टी आईटी और निफ्टी सर्विसेज शीर्ष गिरने वाले सेक्टरों में शामिल रहे। इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी एफएमसीजी में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मीडिया, निफ्टी कंजम्पशन, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग भी लाल निशान में कारोबार करते रहे। हालांकि, बाजार में पूरी तरह बिकवाली का माहौल नहीं रहा। एनर्जी, हेल्थकेयर और मेटल शेयरों ने गिरावट के बीच सहारा दिया। निफ्टी एनर्जी, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी पीएसई, निफ्टी फार्मा, निफ्टी मेटल और निफ्टी कमोडिटीज हरे निशान में रहे। इससे बाजार में सेक्टर आधारित खरीदारी की तस्वीर भी सामने आई।
सेक्टरवार सेंसेक्स की स्थिति
सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में एलएंडटी, एनटीपीसी, सन फार्मा, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), अदाणी पोर्ट्स और कोटक महिंद्रा बैंक बढ़त बनाने वाले शेयरों में रहे। दूसरी ओर एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस और टीसीएस जैसे प्रमुख आईटी शेयरों में कमजोरी ने बाजार पर खासा दबाव बनाया। इसके अलावा हिंदुस्तान यूनिलीवर, एमएंडएम, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल, एसबीआई, एक्सिस बैंक, आईटीसी, टाइटन, मारुति सुजुकी और एशियन पेंट्स भी शुरुआती कारोबार में नुकसान में रहे।
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एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख
भारतीय बाजार की कमजोर शुरुआत के बीच एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक और सोल के बाजार हरे निशान में रहे, जबकि जकार्ता का बाजार गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। इससे पहले मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी कमजोरी के साथ बंद हुए थे। डाउ जोन्स 1.18 प्रतिशत और नैस्डैक 0.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
कच्चे तेल और IPO ने बढ़ाई चिंता
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल भारतीय शेयर बाजार के सामने दो प्रमुख चुनौतियां हैं। पहली चुनौती अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से जुड़ी है। इस भू-राजनीतिक तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। महंगा कच्चा तेल भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ाता है और कंपनियों की लागत तथा महंगाई पर दबाव डाल सकता है। दूसरी बड़ी चुनौती तेजी से बढ़ता IPO बाजार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए इश्यू में निवेश बढ़ने से सेकेंडरी मार्केट में उपलब्ध लिक्विडिटी प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार, निफ्टी में लगातार कमजोरी के पीछे IPO बाजार से जुड़ी लिक्विडिटी खिंचने का असर कच्चे तेल की चिंता से भी अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। जानकारों ने बताया कि जून के बाद से IPO में लिस्टिंग गेन बढ़कर करीब 22 प्रतिशत हो गया है। इससे रिटेल और इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की दिलचस्पी प्राथमिक बाजार में बढ़ी है। इस साल अब तक निफ्टी का रिटर्न करीब -9.5 प्रतिशत रहा है, जिससे IPO में मिलने वाला आकर्षक रिटर्न निवेशकों को और खींच रहा है।
FII ने शेयर बेचे, IPO में लगाया पैसा
दिलचस्प बात यह है कि विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII भी इस प्रवृत्ति से अलग नहीं हैं। आंकड़ों के मुताबिक, FII ने इस साल अब तक एक्सचेंजों के जरिए करीब 2,84,000 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची है। इसके बावजूद उन्होंने IPO बाजार में लगभग 36,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक पूरी तरह बाजार से बाहर नहीं निकल रहे, बल्कि अपेक्षाकृत बेहतर रिटर्न की तलाश में पूंजी को प्राथमिक बाजार की ओर स्थानांतरित कर रहे हैं। फिलहाल बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और IPO से जुड़ी लिक्विडिटी पर निर्भर रहने की संभावना है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में सेक्टर आधारित उतार-चढ़ाव और निवेशकों की सतर्कता जारी रह सकती है।
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