हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने से बढ़ी चिंता, सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमलों ने बिगाड़ा माहौल
खबर सार :-
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। भारत की क्रूड ऑयल बास्केट का 100 डॉलर के पार पहुंचना आयात लागत में बढ़ोतरी का संकेत है। हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने और सऊदी तेल ठिकानों पर हमलों से आपूर्ति जोखिम गहरा गया है। यदि तनाव लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा सकती है।
खबर विस्तार : -
India Crude Oil Basket: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत के लिए कच्चे तेल की लागत पर दिखाई देने लगा है। भारत की क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 7 सितंबर को भारतीय क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत 106.26 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई। इस तेजी से संकेत मिल रहा है कि क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए कच्चे तेल का आयात महंगा होता जा रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी का असर घरेलू ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंची कीमत
भारत की क्रूड ऑयल बास्केट की औसत कीमत में पिछले कुछ महीनों के दौरान लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। अगस्त में इसकी औसत कीमत 90.19 डॉलर प्रति बैरल रही थी, जबकि जुलाई में यह 82.04 डॉलर और जून में 83.22 डॉलर प्रति बैरल थी। इससे पहले मई में अमेरिका-ईरान युद्ध के चरम के दौरान भारतीय क्रूड बास्केट की औसत कीमत बढ़कर 106.23 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। मौजूदा स्तर इस बात का संकेत है कि वैश्विक तनाव का असर एक बार फिर तेल बाजार पर तेजी से पड़ रहा है।

ब्रेंट और WTI भी चढ़े
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। दोपहर 2:20 बजे बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.75 प्रतिशत की बढ़त के साथ 97.73 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड की कीमत 1.78 प्रतिशत बढ़कर 93.11 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई।
बाजार में सबसे बड़ी चिंता मध्य पूर्व के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर है। इस मार्ग से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का आवागमन होता है। इसके बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ने और कीमतों में और तेजी आने की आशंका है।
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सऊदी अरब पर हमलों से बढ़ा जोखिम
अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई रणनीतिक और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलों में अभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, किंग खालिद एयर बेस के अलावा अभा और जिजान में स्थित सऊदी अरामको की तेल सुविधाएं भी शामिल थीं। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ा दी है। भारत के लिए तेल की कीमतों में यह उछाल महत्वपूर्ण है, क्योंकि लंबे समय तक कच्चे तेल के महंगे रहने से आयात बिल, व्यापार संतुलन और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति और वैश्विक तेल आपूर्ति बाजार की दिशा पर सभी की नजर रहेगी।
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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...
1. भारत की क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत कितनी पहुंच गई है?
7 सितंबर को भारत की क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत 106.26 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई।
2. क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने की मुख्य वजह क्या है?
मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव, हॉर्मुज स्ट्रेट का बंद होना और सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमले प्रमुख वजह हैं।
3. हॉर्मुज स्ट्रेट भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
हॉर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का आवागमन होता है। इसके बंद होने से वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
4. महंगे कच्चे तेल का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारत का आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
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