Crude Oil की कीमतों में गिरावट से ऑयल स्टॉक्स में आई बहार, IOC, BPCL और HPCL के शेयरों में जोरदार उछाल
खबर सार :-
कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट और वैश्विक तनाव कम होने की उम्मीद ने भारतीय तेल विपणन कंपनियों के शेयरों को नई ऊर्जा दी है। एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसीएल के शेयरों में आई तेजी दर्शाती है कि निवेशक भविष्य की संभावनाओं को लेकर आशावादी हैं। यदि तेल कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो ऊर्जा क्षेत्र और भारतीय बाजार दोनों को आगे भी लाभ मिल सकता है।
खबर विस्तार : -
Crude oil stocks rally: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेतों के बीच बुधवार को सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के शेयरों ने कारोबार के दौरान मजबूत बढ़त दर्ज की, जिससे निवेशकों में उत्साह का माहौल दिखाई दिया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सबसे अधिक फायदा तेल विपणन कंपनियों को मिलता है, क्योंकि इससे उनकी लागत कम होती है और मार्जिन बेहतर होने की संभावना बढ़ जाती है। यही वजह है कि तेल कीमतों में नरमी आते ही निवेशकों ने इन कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ा दी।

HPCL और BPCL ने दिखाई सबसे मजबूत तेजी
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में कारोबार के दौरान एचपीसीएल का शेयर 2 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 410.50 रुपए के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। वहीं बीपीसीएल का शेयर 2.46 प्रतिशत की मजबूती के साथ 319.50 रुपए के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसीएल) के शेयर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। कंपनी का शेयर 1.61 प्रतिशत बढ़कर 147.47 रुपए के उच्च स्तर तक पहुंच गया। तीनों सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों में एक साथ आई इस तेजी ने ऊर्जा क्षेत्र के निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया।
ईरान-अमेरिका समझौते की उम्मीद से बढ़ी राहत
बाजार में सकारात्मक माहौल की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौते पर चर्चा चल रही है, जिसके तहत ईरान को फिर से कच्चे तेल के निर्यात की अनुमति मिल सकती है। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ेगी और आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम होंगी। निवेशकों का मानना है कि अतिरिक्त आपूर्ति से तेल की कीमतों पर दबाव बना रहेगा, जिसका लाभ तेल आयात करने वाले देशों और कंपनियों को मिलेगा।
ब्रेंट और WTI क्रूड में तेज गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गई है। यह पिछले तीन महीनों के निचले स्तरों के आसपास कारोबार कर रही है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में ब्रेंट क्रूड में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल भी लगभग 1 प्रतिशत कमजोर होकर 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। विशेषज्ञों के अनुसार पिछले पांच दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 16 प्रतिशत तक गिर चुकी है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।

Hormuz जलडमरूमध्य पर भी नजर
विश्लेषकों का कहना है कि प्रस्तावित समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह खुलने की संभावना भी बढ़ सकती है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि यहां से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है तो वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता कम होगी। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल परिवहन की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
भारतीय बाजार को मिल रहा दोहरा फायदा
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसी बड़ी तेल आयातक अर्थव्यवस्था के लिए राहत लेकर आई है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे भुगतान संतुलन (बीओपी) घाटे की चिंता कम होगी और महंगाई पर दबाव भी घट सकता है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली में भी कमी देखने को मिल रही है। मजबूत होते रुपये और बेहतर आर्थिक संकेतकों के कारण विदेशी निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौटता दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहा। ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंता कम होने और वैश्विक निवेशकों के सकारात्मक रुख ने बाजार की धारणा को मजबूत किया है। आने वाले दिनों में यदि तेल कीमतों में नरमी बनी रहती है तो तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में और मजबूती देखने को मिल सकती है।
अन्य प्रमुख खबरें
-
कमजोर ग्लोबल संकेतों का असर, सेंसेक्स 492 अंक टूटा; निफ्टी भी फिसला
2026-10-08
-
₹10,000 करोड़ का SME Growth Fund, छोटे उद्योगों को मिलेगी नई उड़ान
2026-10-07
-
क्विक कॉमर्स की रफ्तार होगी और तेज, FY31 तक 90 अरब डॉलर का बाजार!
2026-10-07
-
अमेरिकी मसाला उद्योग की मांग, भारतीय मसालों पर टैरिफ छूट रहे कायम
2026-10-07
-
बजाज फाइनेंस FD पर बढ़ा ब्याज, सीनियर सिटिजन्स को 8.15% तक रिटर्न
2026-10-07
-
RBI का संदेश: अभी ब्याज दरों में कटौती नहीं, EMI पर बढ़ सकता है बोझ
2026-10-07
-
महंगाई का वार: RBI ने बढ़ाया रेपो रेट, कर्ज-EMI पर बढ़ेगा बोझ
2026-10-07
-
RBI MPC से पहले बाजार में भूचाल, सेंसेक्स 462 अंक फिसला
2026-10-07
-
अक्टूबर में 0.25 प्रतिशत तक ब्याज दर बढ़ने का अनुमान
2026-10-06
-
टाटा संस लिस्टिंग विवाद: ट्रस्टियों के बीच बढ़ी तकरार, समाधान पर नजर
2026-10-06
-
जीएसटी परिषद की बैठक की तारीख बदली, अब 8 अक्टूबर को होगा मंथन
2026-10-06
-
सर्विसेज सेक्टर ने पकड़ी रफ्तार, सितंबर में PMI तीन महीने के शिखर पर
2026-10-06
-
ग्लोबल संकेतों से चढ़ा बाजार, प्राइवेट बैंकों में जमकर खरीदारी
2026-10-06
-
अमेरिका को पछाड़ भारत का नंबर-1 LNG सप्लायर बना ओमान
2026-10-05
-
GST का अगला सुधार: कारोबार आसान, रिफंड तेज, अनुपालन होगा सरल
2026-10-05