बैंक फ्रॉड में बड़ा फैसला, पूर्व DGM समेत 6 दोषियों को 10 साल की सजा, 2.70 करोड़ जुर्माना

खबर सार :-

चेन्नई की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने 2.39 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व डीजीएम समेत छह दोषियों को 10 साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने कुल 2.70 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया। सीबीआई के मुताबिक, फर्जी दस्तावेजों के जरिए क्रेडिट सुविधाएं हासिल कर बैंक को नुकसान पहुंचाया गया था। मामला 2010 में दर्ज हुआ था।
बैंक फ्रॉड मामले में पूर्व DGM समेत 6 को 10 साल की सजा

खबर विस्तार : -

Chennai Bank Fraud Case: चेन्नई की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने करीब 2.39 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व डिप्टी जनरल मैनेजर (डीजीएम) एन. वेंकटाचलम समेत छह दोषियों को 10 साल की कड़ी सजा सुनाई है। कोर्ट ने सभी छह दोषियों पर कुल 2.70 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला लंबे समय तक चले मुकदमे के बाद आया है।

सीबीआई के अनुसार, दोषियों में बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व डीजीएम एन. वेंकटाचलम, शोलिंगनल्लूर तालुक ऑफिस के रिकॉर्ड क्लर्क एम. शिवकुमार, पझावंथंगल के तत्कालीन विलेज एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर (वीएओ) टी. दशरथन और तमिलनाडु सरकार के पूर्व वीएओ एम. मनिचावेलु शामिल हैं। मामले में दो निजी व्यक्तियों ओ.पी. थमारई पू और पी. थंडापानी को भी दोषी ठहराया गया है।

बैंक की शिकायत पर दर्ज हुआ था केस

बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर सीबीआई ने 19 मई 2010 को मामला दर्ज किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, मुख्य आरोपी ई. मुथुस्वामी और अन्य आरोपियों पर बैंक अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर बैंक की रकम को गलत तरीके से दूसरी जगह लगाने की साजिश रचने का आरोप था। अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में आरोप लगाया कि आरोपियों ने बैंक से विभिन्न तरह की क्रेडिट सुविधाएं हासिल करने के लिए झूठे और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। इन कथित धोखाधड़ी वाले लेन-देन के कारण बैंक ऑफ इंडिया को 238.97 लाख रुपये यानी करीब 2.39 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

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12 आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई थी चार्जशीट

जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने 28 दिसंबर 2011 को 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इनमें पांच सरकारी कर्मचारी और सात निजी व्यक्ति शामिल थे। मामले की सुनवाई कई वर्षों तक चली। अंततः कोर्ट ने छह जीवित आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 10 साल की सजा सुनाई और सामूहिक रूप से 2.70 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। मामले में शामिल एक अन्य आरोपी वी. उमापति के खिलाफ कार्रवाई को अलग कर दिया गया था। उमापति लैंड एंड सर्वे डिपार्टमेंट में सीनियर ड्राफ्ट्समैन के पद पर कार्यरत थे और उन्हें निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ अलग मामले में कार्रवाई चल रही है। यह मामला सीसी नंबर 18 ऑफ 2016 के रूप में दर्ज है।

जाली दस्तावेजों से क्रेडिट सुविधाएं लेने का आरोप

सीबीआई के मुताबिक, इस मामले की जांच का केंद्र बैंक से कथित तौर पर धोखाधड़ी के जरिए हासिल की गई क्रेडिट सुविधाएं और उनसे हुए वित्तीय नुकसान को बनाया गया था। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से बैंकिंग प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया। हालांकि, सीबीआई की ओर से जारी बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि छह दोषियों को किन-किन विशिष्ट धाराओं या अपराधों के तहत दोषी ठहराया गया। साथ ही, कथित तौर पर धोखाधड़ी से जुड़े लोन अकाउंट और इसमें शामिल संपत्तियों की विस्तृत जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई है।

लंबे मुकदमे के बाद आया फैसला

करीब 2.39 करोड़ रुपये के नुकसान से जुड़े इस मामले में एफआईआर दर्ज होने से लेकर फैसले तक करीब 16 साल का समय लगा। सीबीआई की चार्जशीट 2011 में दाखिल हुई थी, जबकि छह जीवित आरोपियों के खिलाफ अब कोर्ट ने फैसला सुनाया है। कोर्ट का यह फैसला बैंकिंग व्यवस्था में कथित धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेजों और अधिकारियों के साथ मिलीभगत के मामलों में न्यायिक कार्रवाई की गंभीरता को भी रेखांकित करता है। छह दोषियों को 10-10 साल की सजा और 2.70 करोड़ रुपये के जुर्माने का आदेश दिया गया है।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...

1. बैंक ऑफ इंडिया धोखाधड़ी मामले में कितने लोगों को सजा हुई?

चेन्नई की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व डीजीएम समेत छह दोषियों को 10 साल की सजा सुनाई।

2. इस बैंक फ्रॉड से कितना नुकसान हुआ था?

सीबीआई के मुताबिक, कथित धोखाधड़ी वाले लेन-देन से बैंक ऑफ इंडिया को करीब 2.39 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

3. दोषियों पर कितना जुर्माना लगाया गया?

कोर्ट ने छह दोषियों पर कुल 2.70 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।

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