TMC के तीन बैंक खाते फ्रीज, ED के फैसले में सुप्रीम कोर्ट का दखल से इनकार
खबर सार :-
सुप्रीम कोर्ट ने TMC के तीन बैंक खातों को फ्रीज करने के ED के फैसले में दखल से इनकार किया। पार्टी को रोजमर्रा और कानूनी खर्चों के लिए अंतरिम व्यवस्था जारी रखने की अनुमति मिली।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बैंक खातों को फ्रीज करने के प्रवर्तन निदेशालय (ED) के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने पार्टी के रोजमर्रा के खर्चों के लिए पहले से लागू अंतरिम व्यवस्था को जारी रखने की अनुमति दी है। इस व्यवस्था के तहत खातों के संचालन की निगरानी अदालत द्वारा नियुक्त विशेष अधिकारी करेंगे।
न्यायमूर्ति एमएम सुंद्रेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी नेतृत्व वाले गुट की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पार्टी ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें ईडी द्वारा तीन एचडीएफसी बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के खिलाफ तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हाई कोर्ट की ओर से बनाई गई मौजूदा व्यवस्था संतुलित है। इससे एक तरफ खातों पर नियंत्रण और निगरानी बनी रहती है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के रोजमर्रा के कामकाज पर पूरी तरह रोक नहीं लगती।
रोजमर्रा के खर्च के लिए जारी रहेगी व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट ने खातों को फ्रीज करने के फैसले को हटाने का आदेश नहीं दिया। हालांकि, पार्टी के दैनिक कामकाज से जुड़े खर्चों के लिए पहले से लागू अंतरिम व्यवस्था को जारी रखने की अनुमति दी गई है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित पक्ष अपनी आपत्तियां विशेष अधिकारी के समक्ष और कलकत्ता हाई कोर्ट में लंबित मुख्य मामले में उठा सकते हैं। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल खातों को लेकर चल रहे विवाद में अंतिम निर्णय देने के बजाय मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखना उचित समझा। पीठ ने माना कि वर्तमान व्यवस्था पार्टी के दैनिक कामकाज से जुड़ी समस्या का समाधान करती है। साथ ही खातों के संचालन पर न्यायिक निगरानी भी बनी हुई है।
कपिल सिब्बल ने उठाया मुद्दा
तृणमूल कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने अदालत के सामने कहा कि फ्रीज किए गए तीनों खातों में 400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है। सिब्बल ने दलील दी कि खातों को पूरी तरह फ्रीज किए जाने के कारण पार्टी अपने कर्मचारियों को वेतन और अन्य जरूरी भुगतान नहीं कर पा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी राशि को अपराध से जुड़ा बताया जा रहा है तो उससे कहीं अधिक रकम को फ्रीज क्यों किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राप्तकर्ता खातों को भी फ्रीज किया जा रहा है, जो उचित नहीं है। उनके मुताबिक खातों पर पूरी तरह रोक लगाए जाने से पार्टी के सामान्य कामकाज और वित्तीय दायित्व प्रभावित हो रहे हैं।
ED ने कहा- दैनिक खर्च के लिए राहत पहले से मौजूद
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत के सामने पार्टी को दी गई अंतरिम राहत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दैनिक खर्चों के लिए खातों के संचालन को लेकर तृणमूल कांग्रेस को पहले ही राहत मिली हुई है। राजू ने यह भी बताया कि करीब 120 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं। सुनवाई के दौरान उन्होंने पार्टी के भीतर चल रहे विवाद का भी उल्लेख किया। इसी आधार पर एक पक्ष की ओर से यह चिंता जताई गई कि बैंक खातों के संचालन को लेकर किसी एक गुट को विशेष अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए।
बागी नेता ने भी दायर की थी याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने TMC के बागी नेता बिस्वनाथ दास की अलग याचिका का भी निपटारा कर दिया। उन्होंने दावा किया था कि वही वास्तविक पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं। बिस्वनाथ दास ने भी कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। एक बागी TMC विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने दलील दी कि पार्टी के किसी एक गुट को बैंक खातों के संचालन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। बताया गया कि इसी विधायक की शिकायत के आधार पर पश्चिम बंगाल पुलिस ने खातों पर निकासी संबंधी पाबंदी लगाई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी के भीतर चल रहे गुटीय विवाद में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मौजूदा अंतरिम व्यवस्था पार्टी के रोजमर्रा के कामकाज से जुड़ी समस्या को हल करने के लिए पर्याप्त है।
कैसे शुरू हुआ बैंक खातों का विवाद?
यह पूरा विवाद TMC के तीन एचडीएफसी बैंक खातों से जुड़ा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, पश्चिम बंगाल पुलिस के निर्देश पर बैंक ने सबसे पहले इन खातों से निकासी पर पाबंदी लगाई थी। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने इन खातों को फ्रीज कर दिया। मामला कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचा। 9 जुलाई को हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस को इन तीन खातों का इस्तेमाल दैनिक खर्चों और कानूनी खर्चों के लिए करने की अनुमति दी थी। हालांकि, इसके साथ खातों के संचालन पर कड़ी निगरानी की व्यवस्था भी की गई थी। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार को 30 सितंबर तक खातों के संचालन के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त किया था।
विशेष अधिकारी की निगरानी में होगा संचालन
हाई कोर्ट की ओर से बनाई गई व्यवस्था के तहत तृणमूल कांग्रेस के दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता चेक पर हस्ताक्षर कर राशि निकाल सकते हैं। हालांकि, चेक को प्रभावी बनाने के लिए विशेष अधिकारी के प्रति-हस्ताक्षर की भी आवश्यकता होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य पार्टी के जरूरी खर्चों को पूरी तरह बाधित होने से बचाना और साथ ही खातों से होने वाले लेनदेन पर निगरानी बनाए रखना है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी अंतरिम व्यवस्था को जारी रखने की अनुमति दी है।
440 करोड़ रुपये की राशि पर विवाद
तीनों खातों में लगभग 440 करोड़ रुपये जमा होने की बात सामने आई है। इन खातों को लेकर पुलिस के पास शिकायत पहुंची थी कि रकम का दुरुपयोग किया जा सकता है। शिकायत में इन पैसों में भ्रष्टाचार और उगाही से जुड़ी रकम शामिल होने की आशंका भी जताई गई थी। इसी शिकायत के बाद खातों पर निकासी संबंधी पाबंदी लगाई गई और बाद में मामला ईडी की कार्रवाई तक पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के आदेश के बाद फिलहाल तीनों खातों को फ्रीज करने के ईडी के फैसले पर रोक नहीं लगी है। हालांकि, पार्टी के रोजमर्रा और कानूनी खर्चों के लिए पहले से लागू नियंत्रित व्यवस्था जारी रहेगी। अदालत ने संबंधित पक्षों को अपनी आपत्तियां विशेष अधिकारी और कलकत्ता हाई कोर्ट के समक्ष रखने की स्वतंत्रता दी है। इस तरह बैंक खातों को लेकर अंतिम स्थिति मुख्य मामले की आगे की सुनवाई और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
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