‘मेक इन इंडिया’ के 12 वर्ष: भारत दुनिया के लिए बना रहा उत्पाद, गुणवत्ता के लिए पहचाने जाएंगे भारतीय उत्पाद

खबर सार :-

मेक इन इंडिया के 12 वर्ष पूरे होने पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि आज भारत अपनी जरूरतों के लिए ही विनिर्माण नहीं कर रहा है बल्कि दुनिया के लिए भी उत्पाद तैयार कर रहा है।
‘मेक इन इंडिया’ के 12 वर्ष: दुनिया के लिए भी उत्पाद तैयार कर रहा भारत

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: मेक इन इंडिया ने 12 वर्ष का सफर पूरा कर लिया है। मेक इन इंडिया की 12वीं वर्षगांठ पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत न सिर्फ अपनी जरूरतों के लिए विनिर्माण कर रहा है, बल्कि दुनिया के लिए भी उत्पाद तैयार कर रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ की 12वीं वर्षगांठ पर पीयूष गोयल ने कहा कि यह पहल इस सरल विश्वास पर आधारित एक दृष्टिकोण है कि भारत दुनिया के लिए विनिर्माण कर सकता है। गोयल ने कहा, “यह केवल एक उपलब्धि नहीं है। यह हमें याद दिलाती है कि जब कोई देश अपनी क्षमताओं पर विश्वास करता है और सरकार निरंतर सुधारों और ठोस कदमों के जरिए उस विश्वास को मजबूती प्रदान करती है, तो क्या कुछ नहीं हासिल किया जा सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा, “2014 को पीछे मुड़कर देखें तो भारत की विनिर्माण क्षमता को लेकर होने वाली बहसें याद आ सकती हैं। उस दौरान भारत में इस्तेमाल होने वाले कई उत्पाद आयात किए जाते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे हमारी नियति मानने से इनकार कर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसे भारत की कल्पना की थी, जहां दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले उत्पाद गर्व से ‘मेड इन इंडिया’ का टैग लगाएंगे और अपनी गुणवत्ता के लिए पहचाने जाएंगे।       

उत्साहजनक तस्वीर पेश करते हैं एफडीआई के आंकड़े

गोयल ने कहा, “हम उस दृष्टिकोण को आकार लेते हुए देख रहे हैं। आंकड़े उत्साहजनक तस्वीर पेश करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में अब तक का सबसे अधिक 94.53 अरब डॉलर का वार्षिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया, जबकि वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक कुल एफडीआई प्रवाह 843 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम के तहत देशभर में ग्रीनफील्ड औद्योगिक स्मार्ट शहर स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ सुधारों ने नियमों को सरल बनाया है और अनुपालन का बोझ कम किया है। वहीं, प्रमुख क्षेत्रों में किए गए सुधारों ने निवेश और विनिर्माण के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

14.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हुए

पीएलआई (उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन) योजनाओं ने इसमें और गति दी है। 31 मार्च 2026 तक इन योजनाओं के तहत 2.40 लाख करोड़ रुपए का वास्तविक निवेश हुआ, 23.8 लाख करोड़ रुपए का उत्पादन/बिक्री दर्ज की गई और 15.2 लाख करोड़ रुपए का निर्यात हुआ। साथ ही, 14.6 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हुए। गोयल ने कहा, “इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल, आईटी हार्डवेयर और स्पेशियलिटी स्टील जैसे क्षेत्रों को पीएलआई योजनाओं से काफी लाभ हुआ है। ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) छोटे उद्यमों को बड़ा प्रोत्साहन दे रहा है और इस प्लेटफॉर्म के जरिए 470 करोड़ से अधिक ऑर्डर किए जा चुके हैं। लेकिन ‘मेक इन इंडिया’ की असली कहानी इन आंकड़ों से आगे जाती है।

दुनिया से प्रतिस्पर्धा कर सकता है भारत

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “यह उस आत्मविश्वास की कहानी है, जो इस पहल ने पैदा किया है। हमारे स्टार्टअप संस्थापकों, उद्यमियों, निर्माताओं, नवोन्मेषकों, निर्यातकों और सबसे महत्वपूर्ण रूप से हमारे लोगों में यह विश्वास पैदा हुआ है कि भारत बना सकता है, भारत नवाचार कर सकता है और भारत दुनिया से प्रतिस्पर्धा कर सकता है। गोयल ने जोर देकर कहा, “‘मेक इन इंडिया’ की यात्रा जारी है और अब इसका लक्ष्य और भी बड़ा है जिसमें भारत को वैश्विक विनिर्माण महाशक्ति बनाना शामिल है, जो 2047 तक विकसित भारत के हमारे विजन को भी मजबूत करेगा। 

भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार करीब 20 ट्रिलियन डॉलर 

भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार क्रय शक्ति समता के आधार पर करीब 20 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच गया है, जो इसे दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाते हैं। यह बयान वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दिया। क्रय शक्ति समता (पीपीपी) मुद्रा बदलने की वे दरें हैं जिनका उद्देश्य अलग-अलग देशों में कीमतों के स्तर के अंतर को खत्म करके अलग-अलग मुद्रा की खरीदने की क्षमता को बराबर करना है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे भारत 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ेगा, इन उपायों के बीच का अंतर कम होता जाएगा। खास बात यह है कि व्यापार वार्ता को लेकर भारत का नजरिया देश की बदलती आर्थिक स्थिति और वैश्विक बाजारों के साथ जुड़ाव को मजबूत करने के उसके लक्ष्य को दर्शाता है। उन्होंने सामान, सेवाओं, पर्यटकों, शिक्षण संस्थानों और खेलों के आसानी से आवागमन के लिए व्यापक आर्थिक साझेदारी की संभावनाओं पर जोर दिया।

एआई इकोसिस्टम में क्षमताएं विकसित करने की जरूरत पर जोर

राष्ट्रीय राजधानी 13वें ‘पीएएफआई एनुअल फोरम 2026’ में बोलते हुए, गोयल ने कहा कि भारत ऐसी अर्थव्यवस्था के तौर पर व्यापार और आर्थिक साझेदारी के लिए बातचीत कर रहा है, जिसके 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है। अभी चल रही बातचीत में कनाडा, चिली, पेरू, सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन (एसएसीयू), मेक्सिको, मालदीव, यूरेशिया, मध्य एशिया, रूस, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) और इजरायल के साथ बातचीत शामिल है। इन बातचीत का मकसद भारत के लिए ग्लोबल वैल्यू चेन और सप्लाई चेन में शामिल होने के मौके बढ़ाना और सामान व सेवाओं के आवागमन को आसान बनाना है। इस बीच, अगले पांच सालों में भारत में सेमीकंडक्टर की सालाना खपत की मांग बढ़कर 150 अरब डॉलर से ज्यादा होने की उम्मीद है। गोयल ने एआई इकोसिस्टम में क्षमताएं विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया, जिसमें बड़े लैंग्वेज मॉडल और एजेंटिक मॉडल शामिल हैं। अब ध्यान इनोवेशन और डीप-टेक इकोसिस्टम में भारतीय स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत प्राइवेट सेक्टर द्वारा अंतरिक्ष में रॉकेट लॉन्च करने वाला तीसरा देश बन गया है। इसके अलावा, भारत की युवा आबादी ग्लोबल घटनाक्रमों और अवसरों के बारे में तेजी से जागरूक हो रही है। उन्होंने युवाओं की अपने भविष्य के बारे में सही फैसले लेने की क्षमता पर भरोसा जताया। मंत्री ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की ग्रोथ का भी जिक्र किया।
 

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