सरयू के तट पर भव्य दीपोत्सव: 36 लाख से अधिक दीपों की रोशनी से जगमगाई रामनगरी अयोध्या

खबर सार :-

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में शनिवार को दीपोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान सरयू के तट पर 36 लाख से अधिक दीये जलाए गए और ड्रोन शो व लेजर शो के जरिए रामायण के प्रसंगों को दिखाया गया।
अयोध्या दीपोत्सव: सरयू तट पर जले 36 लाख दीये, त्रेतायुग जैसा नजारा

खबर विस्तार : -

अयोध्या: अयोध्या में शनिवार को सरयू नदी के तट पर दीपोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें 36 लाख से अधिक दीप जलाए गए। यह आयोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार दसवीं बार हुआ। इस मौके पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम की पैड़ी पर दीप जलाए और भगवान श्रीराम का प्रतीकात्मक राज्याभिषेक किया। इस कार्यक्रम में देश-विदेश से आए पर्यटकों और श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और रामनगरी के अलौकिक सौंदर्य को देखा।

अयोध्या के 56 घाटों पर की गई थी विशेष तैयारी

इस भव्य आयोजन के लिए अयोध्या के 56 घाटों पर विशेष तैयारी की गई थी। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, विभिन्न महाविद्यालयों और स्वयंसेवी संस्थाओं के 35 हजार से अधिक स्वयंसेवकों ने मिलकर इन दीपों को सजाया और उनमें तेल-बाती डालकर प्रज्ज्वलन का कार्य पूरा किया। रामकथा पार्क में मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों ने भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण की आरती उतारी और उन्हें पुष्पमाला अर्पित की। इसके बाद हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई और अतिथियों ने रथ खींचकर अपनी खुशी जाहिर की।

कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर आधारित 3डी होलोग्राफी प्रोजेक्शन मैपिंग और लाइव परफॉर्मेंस का प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही स्वदेशी ड्रोन के जरिए आकाश में भगवान श्रीराम की विभिन्न आकृतियां बनाई गईं, जिसे देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। इस अवसर पर आतिशबाजी भी की गई, जिससे पूरी रामनगरी रोशनी से जगमगा उठी। देश के अलग-अलग राज्यों और विदेशों से आए कलाकारों ने रामलीला का मंचन किया और अपनी लोकसंस्कृति की प्रस्तुतियां दीं।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत धार्मिक जयकारों के साथ की

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामकथा पार्क और राम की पैड़ी पर अपने संबोधन की शुरुआत धार्मिक जयकारों के साथ की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' का जिक्र करते हुए कहा कि इस दीपोत्सव में देश के विभिन्न प्रांतों, भाषाओं और समुदायों के लोग शामिल हुए हैं। उप राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी इस आयोजन की सराहना की और इसे सांस्कृतिक एकता का बड़ा प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन देश की समृद्ध परंपरा को दुनिया के सामने रखते हैं।

रामलला के आगमन की खुशी में अयोध्या के मठ, मंदिरों, चौराहों और मुख्य मार्गों को फूलों और आकर्षक रोशनी से सजाया गया था। सुबह के समय शहर में 21 भव्य झांकियां निकाली गईं, जिनमें रामायण काल के विभिन्न दृश्यों को जीवंत किया गया था। शहर के प्रमुख मार्गों और चौराहों पर रंगोली बनाकर समृद्धि की कामना की गई। स्थानीय लोगों ने भी अपने घरों में दीये जलाकर इस उत्सव में हिस्सा लिया। सरयू के घाटों पर वेदाचार्यों द्वारा विशेष आरती का आयोजन किया गया, जिसमें उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री ने भी हिस्सा लिया।

दीपोत्सव की रूपरेखा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

इस वर्ष के दीपोत्सव में ढाई हजार से अधिक कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर मिला। उत्तर प्रदेश के अलावा देश के अन्य राज्यों के कलाकारों ने भी अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिससे पूरा वातावरण संगीत और उल्लास से भर गया। रामनगरी के हर कोने में 'जय श्रीराम' और 'सियावर रामचंद्र की जय' के नारे गूंज रहे थे। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि देश और दुनिया से पहुंचे लाखों श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के इस उत्सव का हिस्सा बन सकें।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव मनाने की परंपरा की शुरुआत की

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में दीपोत्सव मनाने की परंपरा की शुरुआत की थी। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या की पौराणिक और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करना है। शुरुआती वर्षों की तुलना में इस आयोजन का दायरा और भव्यता लगातार बढ़ती गई है। पिछले कुछ वर्षों में अयोध्या में विकास कार्यों और इस वार्षिक दीपोत्सव के आयोजन से धार्मिक पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिला है, जिससे देश-विदेश के पर्यटकों का ध्यान इस ऐतिहासिक शहर की ओर आकर्षित हुआ है। 

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