लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के फैसलों पर उठाए सवाल, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

खबर सार :-

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल उठाए और पीएम मोदी व गृह मंत्री अमित शाह पर जांच की बात कही।
राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस: पीएम मोदी और अमित शाह पर चुनावी गड़बड़ी की जांच की मांग

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश की चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाई गई आपत्तियां इस बात का प्रमाण हैं कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ियां हो रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए कहा कि इन कथित गड़बड़ियों की जांच की जाएगी।

यह पूरी प्रतिक्रिया हाल ही में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों का संबंध विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR), मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे अहम मुद्दों से जुड़ा हुआ था।

चुनाव आयोग के भीतर आपत्तियां और सरकारी गवाह की मांग

राहुल गांधी ने दोनों चुनाव आयुक्तों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने साहसिक कदम उठाया है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग करते हुए तंज कसा कि अब उन्हें सरकारी गवाह बन जाना चाहिए। राहुल के अनुसार, चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाए गए सवालों को पहले भी नजरअंदाज किया गया था, जो कि चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में यदि मतदान की प्रक्रिया ही प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर संविधान और देश की अन्य संस्थाओं पर पड़ता है।

उन्होंने 'वोट चोरी', 'कानून चोरी' और 'संस्था चोरी' के बीच की कड़ी को समझाते हुए कहा कि वोट लोकतंत्र की नींव है। यदि जनप्रतिनिधि संदिग्ध तरीके से संसद में पहुंचते हैं, तो उनके द्वारा बनाए गए कानूनों और संस्थागत बदलावों की वैधता पर भी प्रश्नचिह्न लग जाता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की मुख्य जिम्मेदारी नागरिकों के वोट की रक्षा करना है, क्योंकि यह केवल किसी उम्मीदवार को चुनने का अधिकार नहीं बल्कि लोकतांत्रिक भागीदारी का मूल आधार है।

एंटी-इनकंबेंसी और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने देश के विभिन्न राज्यों में चुनाव परिणामों और सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इनकंबेंसी) के गायब होने पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया के किसी भी जीवंत लोकतंत्र में सत्ता विरोधी लहर से बचा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी जैसी मजबूत नेता के समय भी युद्ध जीतने के कुछ ही वर्षों बाद भारी दबाव और एंटी-इनकंबेंसी का सामना करना पड़ा था।

उन्होंने आश्चर्य जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी पर सत्ता विरोधी लहर का असर क्यों नहीं दिखाई देता। राहुल ने कहा कि कई दशकों की राजनीति देखने के बाद भी ऐसा कभी नहीं देखा गया कि किसी नेता ने यह दावा किया हो कि आने वाले कई वर्षों तक देश में उन्हीं की सरकार रहेगी। उन्होंने कहा कि इस पहेली का जवाब वे दो चुनाव आयुक्त दे चुके हैं जिन्होंने फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

मीडिया रिपोर्ट और चुनावी प्रक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' की उस रिपोर्ट से जुड़ी है जिसमें चुनाव आयोग के आंतरिक कामकाज का खुलासा किया गया था। रिपोर्ट में बताया गया कि चुनाव आयोग के भीतर नीतिगत फैसलों को लेकर आम सहमति नहीं बन पा रही थी और दो चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची प्रबंधन से लेकर डेटा प्रबंधन जैसे मामलों पर लिखित दर्ज आपत्तियों के जरिए अपनी असहमति जताई थी।

राहुल गांधी ने इसी पृष्ठभूमि को आधार बनाते हुए यह तर्क दिया कि जब संस्था के भीतर से ही पारदर्शिता और फैसलों पर सवाल उठने लगे हैं, तो यह केवल एक प्रशासनिक मामला नहीं रह जाता। उन्होंने इसे भारतीय संविधान और चुनावी प्रणाली की शुद्धता से जुड़ा एक बड़ा विषय बताया, जिस पर शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
 

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