तू डाल-डाल, मैं पात-पातः खनिज परिवहन पर नकेल कसने की तैयारी, तमिलनाडु सरकार लाएगी क्यूआर कोड वाला परमिट

खबर सार :-

तमिलनाडु में रेत और अन्य खनिजों का परिवहन करने वाले वाहनों के लिए जल्द ही क्यूआर-कोड वाला ऑनलाइन परमिट जरूरी होगा। इस नई व्यवस्था को कागजी ट्रांजिट दस्तावेजों की जगह दी जाएगी।
Chennai, क्यूआर कोड वाला परमिट होगा लागू, खनन माफियाओं का टेंशन बढ़ा

खबर विस्तार : -

चेन्नई, तमिलनाडु में सरकार और खनन माफियाओं के बीच लुका छुपी का खेल चल रहा है। एक तरफ खनन माफिया अपनी नई-नई तरकीब इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं सरकार नए-नए कानून लगाकर खनन पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रही है। यानी, तमिलनाडु में रेत और खनिजों पर परिवहन मनमानी तरीके से नहीं हो पाएगा। 

30 तक लगाना होगा जीपीएस डिवाइस

परिवहन करने वाले वाहनों के लिए जल्द ही सरकार की ओर से क्यूमआर कोड वाला ऑनलाइन परमिट जारी करने पर विचार किया जा रहा है। एक अधिकारी की ओर से कहा गया है कि यह सिस्टम कागजी ट्रांजिट दस्तावेजों की जगह लेगा। यानी, सरकार और खनन माफियाओं के बीच तू डाल डाल में पात पात वाली कहावत चरितार्थ की जा रही है। सरकार ने खनिज ले जाने वाले ट्रकों को 30 सितंबर तक जीपीएस डिवाइस लगाने का समय दिया गया हैै। 

वाहनों के मैन्युअल पास बंद कर दिए जाएंगे

 बताया जा रहा है कि सरकार जाली पास का इस्तेमाल कर रहे खनन माफियाओं को इस नई तरकीब से पकड़ सकेगी। अवैध खनन पर बड़े और छोटे दोनों तरह के खनिज इस्तेमाल किये जा रहे हैं। प्राकृतिक संसाधन मंत्री डीके प्रभु ने भी परमिट मिनरल मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल के जरिए इसे जारी करने की बात कही है। यदि यह सिस्टम लागू हो जाता है तो तमिलनाडु में मैन्युअल पास बंद कर दिए जाएंगे। अंदर खाने में क्या चल रहा है, बाहर अभी इसकी जानकारी नहीं है।

विभाग ने इसको लॉन्चिंग की तिथि भी नहीं जारी की है। यद्यपि डिजिटल पास के लिए कहा गया है कि इसमें परिवहन की मात्रा और खदान से मिलान की जांच करना आसान हो जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि यह नई व्यवस्था लागू होने से पूरे राज्य में पेमेंट रॉयल्टी और जीएसटी कलेक्शन पर निगरानी आसान हो जाएगी। इस कार्यशैली में वेट ब्रिज को भी परमिट मिनरल मैनेजमेंट सिस्टम एमआईएमएएस के जरिए जोड़ दिया जाएगा।

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वेट ब्रिज पहले से ही पोर्टल से जुड़े हुए

 इससे वाहनों की जानकारी के साथ ओवरलोड का पता लगाना आसान हो जाएगा। अधिकारियों के लिए इसमें नई व्यवस्था भी दी गई है। उन्होंने परिवहन पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम इस्तेमाल करने के लिए कहा है। इस तरह के वाहनों में चूना, पत्थर और खदान के वेट ब्रिज पहले से ही पोर्टल से जुड़े हुए हैं और विभाग छोटे खनिजों का उत्पादन करने वाली साइटों को भी इसमें शामिल करने की तैयारी कर रही है।

कहां जा रहे हैं कि इससे डिजिटल तकनीकी को बढ़ावा मिलेगा और खनन प्रशासन को खनन से लेकर परिवहन तक में कई सुविधाएं मिल जाएंगी। 30 सितंबर तक खदान से खनिज ले जाने वाले ट्रकों को जीपीएस डिवाइस लगाने के लिए कहा गया है। अब इस सिस्टम के माध्यम से वाहनों की यात्रा पर नजर रखी जा सकेगी। इस तरह से लागू की जाने वाली ऑनलाइन व्यवस्था पर रेट लारी ऑपरेटरांे ने दस्तावेजों की तरह बढ़ाने के कदमों का स्वागत किया है। यह दस्तावेज ऑनलाइन प्रक्रिया के आधार पर ही होंगे। 

14 ट्रक पकड़कर सख्ती दिखाने की हुई शुरूआत 

दूसरी ओर यह भी संभावना जताई जा रही है कि कहीं इस तरह की व्यवस्था में नुकसान ना हो जाए। ठेकेदारों द्वारा फर्जी कागज दिए जाने की जिम्मेदारी कैसे मिल पाएगी? वहीं तिरुवल्लूर जिले के फर्जी ट्रांजिट पास और परमिट पर मिट्टी ले जाने वाले 14 ट्रैकों को हिरासत में लिया गया है। इन वाहनों में चल रहे ड्राइवर और वाहन मालिकों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं।

कुछ ऑपरेटर की ओर से कहा गया है कि जो इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसपोर्ट दस्तावेज बनाए जा रहे हैं, उनके बारे में सरकारी पुष्टि की जानी आवश्यक है, ड्राइवर और मालिक लोड स्वीकार करने से पहले उनकी वैधता की जांच कर सकें। उन्होंने क्रसर यूनिटों पर निगरानी की मांग की है। कहां है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भेजे जाने वाले खनिज नियमों का पालन करते हैं? जबकि लारी ऑपरेटरों ने विभाग से कहा है कि वह पत्थर खदानों की वेट ब्रिज को पोर्टल से जोड़ने की प्रक्रिया जल्दी से जल्दी पूरा कर लें। इससे लोगों को सुविधा मिलेगी।

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