भारतीय रेलवे की कैटरिंग पॉलिसी में संशोधन, अब ई-ऑक्शन से मिलेंगे मिल्क स्टॉल और जनरल माइनर यूनिट

खबर सार :-

रेलवे ने 9 साल पुरानी कैटरिंग पॉलिसी में संशोधन किया है। अब मिल्क स्टॉल और जनरल माइनर यूनिट का आवंटन ई-ऑक्शन के माध्यम से होगा।
रेलवे ने बदली कैटरिंग पॉलिसी, अब ऑनलाइन होगी स्टॉलों की नीलामी

खबर विस्तार : -

झांसी: भारतीय रेलवे प्रशासन ने अपने खानपान प्रबंधनों में बड़ा कदम उठाते हुए अपनी लगभग नौ वर्ष पुरानी नीति में संशोधन किया है। इसके तहत अब देश के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर तयशुदा खानपान इकाइयों का आवंटन केवल डिजिटल माध्यम से ही किया जाएगा। यह नया बदलाव वाणिज्यिक अनुबंधों को लेकर दो अप्रैल 2025 को जारी किए गए निर्देशों के अनुरूप लागू किया गया है।

पारदर्शी होगी आवंटन प्रक्रिया

इस नई व्यवस्था के लागू होने से खानपान स्टॉल आवंटन की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। अभी तक की पुरानी व्यवस्था के स्थान पर अब योग्य कारोबारी घर बैठे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नीलामी प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। रेलवे का मानना है कि इस कदम से पूरी प्रणाली में सुधार होगा और निष्पक्ष तरीके से स्टॉल वितरित किए जा सकेंगे।

रेलवे बोर्ड के ताजा निर्देशों के दायरे में सभी श्रेणियों के स्टेशनों पर स्थापित होने वाले दूध के स्टॉल और चुनिंदा स्टेशनों के जनरल माइनर यूनिट शामिल किए गए हैं। हालांकि, बोर्ड ने अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया है कि स्टेशन की सभी दुकानों या सभी खानपान इकाइयों को इस नई डिजिटल नीलामी प्रणाली के दायरे में अभी नहीं लाया गया है।

नई व्यवस्था और नियम

संशोधित नियमों के अनुसार, ए-1, ए, बी और सी श्रेणी के स्टेशनों पर आने वाली जनरल माइनर यूनिट्स और सभी श्रेणियों के स्टेशनों पर मिल्क स्टॉल की बुकिंग अब ऑनलाइन माध्यम से ही होगी। हालांकि, यह पूरी प्रक्रिया तभी शुरू की जाएगी जब संबंधित स्टेशन पर कोई इकाई खाली होगी और उसके बाद ही जोनल रेलवे द्वारा नीलामी की कार्यवाही को आगे बढ़ाया जाएगा।

इस विषय पर जानकारी देते हुए वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक अमन वर्मा ने बताया कि रेलवे बोर्ड के नए दिशा-निर्देशों के आधार पर खानपान इकाइयों के आवंटन के तौर-तरीकों में बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा कि निर्धारित श्रेणी के स्टॉल अब डिजिटल नीलामी के जरिए ही बांटे जाएंगे, जिससे पूरी कार्यप्रणाली में स्पष्टता बढ़ेगी और पात्र लोग आसानी से इसमें हिस्सा ले सकेंगे।

संबंधित नियम

इस संपूर्ण नीतिगत बदलाव के बावजूद, स्टॉल के लाइसेंस की कुल अवधि, लाइसेंस शुल्क तय करने के नियम और उसकी अधिकतम सीमा से जुड़े पुराने प्रावधान वर्ष 2017 की कैटरिंग पॉलिसी के दिशा-निर्देशों के मुताबिक ही चलते रहेंगे। इसके अलावा, दूध के स्टॉल के लिए उपलब्ध मानक बोली दस्तावेजों के आधार पर ही संबंधित जोनल रेलवे को अनुबंध की विशेष शर्तें तैयार करनी होंगी। नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए रेलवे बोर्ड द्वारा तय की गई सभी जरूरी योग्यताओं और पात्रता शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा।

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