ओडिशा में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ और बाढ़ से नुकसान का आकलन, अधिकारियों ने केंद्रीय टीम को सौंपी रिपोर्ट

खबर सार :-

केंद्रीय टीम ने ओडिशा में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ और उसके बाद आए बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया। राज्य के अधिकारियों ने केंद्रीय टीम को नुकसान की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी।
केंद्रीय टीम ने ओडिशा में तूफान ‘अर्नब’ व बाढ़ से नुकसान का लिया जायजा

खबर विस्तार : -

भुवनेश्वर: चक्रवात 'अर्नब' और उसके बाद आई बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए ओडिशा के दौरे पर आई आठ सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (IMCT) ने गुरुवार को लोक सेवा भवन में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान अपने फील्ड निरीक्षण के निष्कर्ष साझा किए। मुख्य सचिव अनु गर्ग की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में, विशेष राहत आयुक्त (SRC) कार्यालय द्वारा तैयार की गई नुकसान के आकलन की एक प्रारंभिक रिपोर्ट भी केंद्रीय टीम को सौंपी गई। केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव रवि शंकर के नेतृत्व वाली इस टीम ने 3 नवंबर को गजपति जिले और 4 नवंबर को गंजाम जिले के प्रभावित इलाकों का दौरा किया था। बैठक के दौरान, टीम ने राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ नुकसान के दायरे, प्रभावित क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति और वहां के स्थानीय हालात पर विस्तार से चर्चा की।

केंद्रीय टीम में कृषि और किसान कल्याण विभाग, चावल विकास निदेशालय (पटना), व्यय विभाग (केंद्रीय वित्त मंत्रालय), जल शक्ति मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय और राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (ISRO) के वरिष्ठ अधिकारी और वैज्ञानिक शामिल थे। बैठक में विकास आयुक्त और अतिरिक्त मुख्य सचिव देवरंजन कुमार सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व विभाग) डॉ. अरविंद कुमार पाधी, विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल और राज्य सरकार के अन्य सचिव व वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

कृषि, सड़कों और सिंचाई के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान

फील्ड निरीक्षण के दौरान केंद्रीय टीम ने पाया कि चक्रवात 'अर्नब' और उसके बाद आई बाढ़ से कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा, सड़कों, बिजली आपूर्ति प्रणालियों, नदी के तटबंधों और सिंचाई नहरों सहित बुनियादी ढांचे के विभिन्न हिस्सों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। जिला कलेक्टरों ने बताया कि तबाही के बड़े पैमाने को देखते हुए, नुकसान का पूरा आकलन पूरा करने में अभी कुछ और दिन लगेंगे। केंद्रीय टीम ने प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर जाकर सर्वेक्षण करने की सलाह दी, ताकि वास्तविक नुकसान का विस्तृत और सटीक आकलन किया जा सके। बैठक में प्रभावित क्षेत्रों में नदी के तटबंधों और सिंचाई नहरों की ऊंचाई बढ़ाने और उन्हें मजबूत करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई। केंद्रीय टीम ने संकेत दिया कि केंद्र सरकार तटबंधों के पुनर्निर्माण और उन्हें मजबूत करने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करेगी।

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सड़कों, पुलों, पेयजल और पशुधन पर प्रभाव

इस प्राकृतिक आपदा से पेयजल आपूर्ति प्रणालियों, राष्ट्रीय राजमार्गों और विभिन्न सड़कों व पुलों को नुकसान पहुंचा है—इनमें लोक निर्माण विभाग (PWD) तथा ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभागों के अंतर्गत आने वाली सड़कें और पुल भी शामिल हैं। कुछ जगहों पर अस्थायी मरम्मत का काम पूरा हो चुका है, जबकि अन्य जगहों पर मरम्मत का काम अभी भी चल रहा है। बैठक में दीर्घकालिक आवश्यकताओं पर भी ध्यान दिया गया, जिसमें स्थायी पुनर्निर्माण और मरम्मत के प्रयासों पर जोर दिया गया। प्रभावित क्षेत्रों में मछली पालन के तालाबों और पशुधन को भी भारी नुकसान पहुंचा है। विभिन्न विभागों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों और नुकसान के आकलन के आधार पर विशेष राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा तैयार की गई एक प्रारंभिक रिपोर्ट केंद्रीय टीम को सौंपी गई।

आपदा प्रबंधन और भविष्य की तैयारियों पर जोर

मुख्य सचिव अनु गर्ग ने केंद्रीय टीम को ओडिशा में आई विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं—1999 के सुपर साइक्लोन से लेकर अब तक की आपदाओं और उनसे निपटने में राज्य के अनुभवों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ओडिशा को हर साल कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है; इसलिए, राज्य आपदा प्रबंधन, सक्रिय तैयारियों, त्वरित तैनाती, और बचाव व राहत कार्यों को प्राथमिकता देता है। मुख्य सचिव ने कहा कि भविष्य में आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने और लोगों के जीवन व संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य लगातार आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे और संस्थागत क्षमता का विकास कर रहा है। बैठक के दौरान, केंद्रीय टीम और राज्य सरकार के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण, और भविष्य में ऐसी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने की रणनीतियों पर चर्चा की।

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