सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर झांसी के अस्पतालों में आईसीयू की जांच तेज, मानकों पर परख रही व्यवस्था

खबर सार :-

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर झांसी के अस्पतालों में आईसीयू मानकों की जांच तेज हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने तीन स्तरों पर व्यवस्थाओं को परखना शुरू किया है।
झांसी के अस्पतालों में आईसीयू मानकों की जांच शुरू, स्वास्थ्य विभाग सख्त

खबर विस्तार : -

झांसी: झांसी जिले के स्वास्थ्य विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में अस्पतालों में गहन चिकित्सा इकाइयों यानी आईसीयू (ICU) के मानकों की जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की गाइडलाइंस के तहत देश भर में सरकारी और निजी चिकित्सा संस्थानों में व्यवस्थाओं को तीन स्तरों में विभाजित कर परखा जा रहा है। इसी क्रम में झांसी में भी स्वास्थ्य महकमा सक्रिय हो गया है और अस्पतालों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जा रही है। इस पूरी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य मरीजों को बेहतर और सुरक्षित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

आईसीयू के तीन स्तर और निर्धारित मानक

स्वास्थ्य विभाग द्वारा लागू की गई व्यवस्था के अनुसार, आईसीयू को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। लेवल 1 आईसीयू में सामान्यतः छह से आठ बेड होते हैं, जिनका उपयोग मरीजों को प्राथमिक रूप से स्थिर करने के लिए किया जाता है। यहाँ चौबीस घंटे डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, न्यूनतम वेंटीलेटर सुविधा और बिजली का वैकल्पिक प्रबंध होना अनिवार्य है। इसके अलावा, लेवल 2 में मरीजों की गहन निगरानी के साथ-साथ नॉन-इवेसिव या इवेसिव वेंटीलेटर और ऑर्गन सपोर्ट की आवश्यकता होती है। इस स्तर पर तैनात चिकित्सकों के पास क्रिटिकल केयर का विशेष अनुभव या योग्यता होना आवश्यक माना गया है।

लेवल 3 और ऑपरेशन थिएटर के कड़े नियम

स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के सर्वोच्च क्रम में आने वाले लेवल 3 आईसीयू को मल्टी ऑर्गन फेलियर, गंभीर ट्रॉमा, डायलिसिस और न्यूरो क्रिटिकल केयर जैसी एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट प्रणालियों से लैस होना जरूरी होता है। यह इकाई विशेषज्ञों की सीधी देखरेख में चौबीस घंटे संचालित की जाती है। स्वास्थ्य विभाग के स्पष्ट आदेश हैं कि यदि किसी चिकित्सा संस्थान में ऑपरेशन थिएटर संचालित हो रहा है, तो वहाँ कम से कम लेवल 1 का आईसीयू होना अनिवार्य है। यदि ऑपरेशन थिएटर के बावजूद आईसीयू उपलब्ध नहीं पाया जाता है, तो संबंधित संस्थानों का पंजीकरण निरस्त करने की सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

अस्पतालों की स्थिति और शपथ पत्र की प्रक्रिया

वर्तमान में जिले के भीतर संचालित लगभग 190 से अधिक निजी चिकित्सा संस्थानों में से 180 स्थानों पर ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू की सुविधा उपलब्ध है। इनमें से करीब 170 संस्थानों में लेवल 1 और 18 संस्थानों में लेवल 2 श्रेणी की इकाइयां संचालित हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और केंद्रीय गाइडलाइंस मिलने के बाद नोडल अधिकारी डॉक्टर आशीष अग्निहोत्री ने मैदानी स्तर पर निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच प्रारंभ कर दी है। अब तक 50 से अधिक निजी अस्पताल संचालकों की ओर से निर्धारित मानकों को पूरा करने से संबंधित शपथ पत्र विभाग को सौंप दिए गए हैं।

प्रशासन की बैठक और अल्टीमेटम

इस दिशा में आगे बढ़ते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉक्टर शिशिर पुरी और नोडल अधिकारी डॉक्टर आशीष अग्निहोत्री ने निजी अस्पताल संचालकों के साथ एक अहम बैठक की। बैठक के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत सभी संस्थानों को तीन से नौ महीने के भीतर मरीजों के लिए सभी आवश्यक मानक पूरे करने होंगे। यदि निर्धारित समयावधि के भीतर सुधार नहीं किया जाता है, तो विभाग बिना किसी विलंब के पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई पूरी करेगा।

अधिकारियों का पक्ष और आगे की कार्रवाई

इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए झांसी के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर आशीष अग्निहोत्री ने जानकारी दी कि शीर्ष अदालत के आदेशों के अनुपालन में विभाग द्वारा अस्पतालों के आईसीयू की सतत जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि अब तक 50 से अधिक अस्पतालों ने अपनी व्यवस्थाओं में सुधार कर इससे जुड़े शपथ पत्र भी आधिकारिक रूप से जमा करा दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की इस सक्रियता से चिकित्सा क्षेत्र में पारदर्शिता और गुणवत्ता बढ़ने की उम्मीद है, जिससे आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिल सकेगा।

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