झाँसी बार एसोसिएशन में आंतरिक कलह: पुलिस समझौते के विरोध में अधिवक्ताओं का प्रदर्शन

खबर सार :-

3 नवंबर को झाँसी बार एसोसिएशन में अध्यक्ष प्रमोद शिवहरे और महामंत्री छोटे लाल वर्मा के खिलाफ वकीलों का गुस्सा फूटा, कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद पुलिस के साथ समझौते पर नाराजगी जताई।
झाँसी बार एसोसिएशन में बगावत, अध्यक्ष और महामंत्री का पुतला फूंका

खबर विस्तार : -

झांसी: पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच चल रहे विवाद ने अब झांसी बार एसोसिएशन के भीतर भी टकराव का रूप ले लिया है। कचहरी परिसर में मंगलवार को अधिवक्ताओं का आक्रोश खुलकर सामने आया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद शिवहरे और महामंत्री छोटे लाल वर्मा के खिलाफ लामबंद हुए अधिवक्ताओं ने दोनों पदाधिकारियों का पुतला दहन कर जमकर नारेबाजी की। विरोध प्रदर्शन के दौरान बार नेतृत्व पर अधिवक्ताओं के सम्मान और हितों से समझौता करने के गंभीर आरोप लगाए गए।

अधिवक्ताओं की नाराजगी की मुख्य वजह पुलिस के साथ कथित समझौता और उसमें बार नेतृत्व की भूमिका बताई जा रही है। प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं का आरोप है कि अध्यक्ष और महामंत्री ने बिना आम अधिवक्ताओं तथा एल्डर कमेटी को विश्वास में लिए पुलिस अधिकारियों के सामने झुकते हुए माफी मांगकर समझौता कर लिया। इस घटनाक्रम की जानकारी सामने आने के बाद अधिवक्ताओं में नाराजगी फैल गई और मंगलवार को विरोध प्रदर्शन के रूप में गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया।

17 अक्टूबर को खत्म हो चुका बार एसोसिएशन का कार्यकाल

विरोध कर रहे अधिवक्ताओं ने बार एसोसिएशन के मौजूदा नेतृत्व की वैधानिक और नैतिक भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बार एसोसिएशन का कार्यकाल 17 अक्टूबर को ही समाप्त हो चुका है। आरोप है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी उन्होंने अधिवक्ताओं और एल्डर कमेटी को जानकारी दिए बिना पुलिस से समझौता किया। इसी को लेकर अधिवक्ताओं में असंतोष बढ़ता चला गया।

पहले पुलिस से टकराव, अब अपने ही नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा

दरअसल, झांसी में पिछले कई दिनों से पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच विवाद चल रहा है। शहर कोतवाली में अधिवक्ता रोशन अग्रवाल के साथ कथित अभद्रता और धमकी देने के आरोप से शुरू हुआ मामला कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिसकर्मी के साथ मारपीट और मोबाइल तोड़ने तक पहुंच गया। अधिवक्ता पक्ष का आरोप था कि 28 अक्टूबर को संयुक्त सचिव (प्रकाशन) रोशन अग्रवाल अपने क्लर्क के साथ शहर कोतवाली पहुंचे थे। वहां इंस्पेक्टर ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और दोबारा थाने आने पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने तथा वकालत छुड़वा देने की धमकी दी। इस मामले में जिला अधिवक्ता संघ की ओर से एसएसपी विकास कुमार को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की गई थी।

30 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट में भिड़ंत, पुलिस ने दर्ज कराया मुकदमा

विवाद के बीच 30 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस की तहरीर के मुताबिक, प्रदर्शन की वीडियो बना रहे आरक्षी भूपेंद्र कुमार के साथ कुछ लोगों ने मारपीट की और उनका मोबाइल छीनकर तोड़ दिया। इस मामले में अविनाश यादव समेत चार नामजद और अन्य के खिलाफ थाना नवाबाद में बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अधिवक्ताओं की नाराजगी और बढ़ गई।

बस स्टैंड के होटलों पर छापेमारी ने भी बढ़ाई थी हलचल

इसी विवाद के बीच अधिवक्ताओं की ओर से रोडवेज बस स्टैंड के आसपास कथित अनैतिक गतिविधियां संचालित होने के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद शुक्रवार रात सीओ सिटी प्रिया सिंह के नेतृत्व में पुलिस की कई टीमों ने करीब एक दर्जन होटलों में छापेमारी कर जांच की थी। कमरों, होटल रजिस्टर, ग्राहकों के पहचान पत्रों और सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की गई थी।

सीसीटीवी फुटेज वायरल होने के बाद आरोप-प्रत्यारोप तेज

शहर कोतवाली में अधिवक्ता के साथ कथित अभद्रता के मामले में एसएचओ के कक्ष का सीसीटीवी फुटेज वायरल होने की बात भी सामने आई है। इस फुटेज को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि फुटेज के अनुसार अधिवक्ता करीब 26 सेकंड तक एसएचओ के कक्ष में मौजूद रहे। हालांकि, केवल इस अवधि के आधार पर कथित अभद्रता या धमकी के आरोपों की पुष्टि अथवा खंडन नहीं किया जा सकता।

बार के भीतर दो फाड़, अब आगे क्या होगा?

मंगलवार को अध्यक्ष और महामंत्री का पुतला दहन होने के बाद झांसी बार एसोसिएशन के भीतर का विरोध सार्वजनिक हो गया है। अब तक अधिवक्ताओं का विवाद पुलिस प्रशासन के साथ था, लेकिन अब बार नेतृत्व की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। एक पक्ष पुलिसकर्मी से मारपीट के मामले में दर्ज मुकदमे को लेकर नाराज है, तो दूसरा पक्ष बार पदाधिकारियों पर बिना सहमति समझौता करने का आरोप लगा रहा है। फिलहाल, अध्यक्ष प्रमोद शिवहरे और महामंत्री छोटे लाल वर्मा का पुतला दहन, समझौते के आरोपों और कार्यकाल को लेकर उठाए गए सवालों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बार नेतृत्व इन आरोपों पर क्या सफाई देता है और अधिवक्ताओं के बीच उपजे इस विरोध को शांत करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। 

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