Lucknow :समूह की सखियों ने कर्मचारी का दर्जा मांगा, सड़क जाम कर प्रदर्शन किया

खबर सार :-

प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई समूह की सखियों ने लखनऊ के इको गार्डन में धरना दिया। इसके बाद अपनी कई मांगों को लेकर इको गार्डन के बाहर जाम लगा दिया।
Lucknow : समूह की सखियां हुईं उग्र, ईको गार्डन के बाहर जाम लगाया

खबर विस्तार : -

लखनऊ, अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर समूह की सखियों ने लखनऊ के इको गार्डन में एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है। यह महिलाएं ग्रामीण आजीविका मिशन उत्तर प्रदेश के बैनर तले यहां धरना देने पहुंचीं थी। महिला यूनियन की ओर से प्रदेश के विभिन्न जिलों से समूह की सखियां प्रदेश अध्यक्ष एवं संरक्षक नीतू सिंह के नेतृत्व में यहां पहुंचीं। इस दौरान इनकी कई प्रमुख मांग हैं।

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 महिलाओं ने सड़क जाम करने हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार फील्ड वर्क ही रहता है। इसके बावजूद उन्हें आवश्यक पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है। संविधान के अनुच्छेद 21, 23 और 39(घ) का हवाला भी महिलाओं ने दिया। कहा इसके अनुसार, वह उक्त मांगों की हकदार हैं। 

महिलाओं का धरना लखनऊ के ईको गार्डन में चल रहा

धरना के वक्त यह प्रदेश के उच्चस्तरीय अधिकारियों से मिलना चाह रही थी। उनकी प्रमुख मांग है कि ग्रामीण स्तर पर आजीविका मिशन की जिम्मेदारियां काफी हैं। इसके बाद भी उनको महत्वपूर्ण सुविधाओं से वंचित कर रखा गया है। महिलाओं का कहना है कि उनको उचित मानदेय नहीं दिया जा रहा है। वह एक कर्मचारी के रूप में काम कर रही हैं। इनको किसी प्रकार की सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। सामाजिक सुरक्षा के नाम पर भी इनके साथ अन्याय हो रहा है। आंदोलन कर रहीं समूह की सखियों का प्रदर्शन सोमवार को उग्र हो गया। इन महिलाओं का धरना लखनऊ के ईको गार्डन में चल रहा है। अपनी मांगों के संबंध में महिला कर्मियों ने पहले जोरदार नारेबाजी की।

सोमवार को परिसर के बाहर आ गई। इस दौरान यहां पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने रोकने की कोशिश की, लेकिन महिलाएं उग्र थी। वह सड़क पर आकर बैठ गईं। इनके यहां पर बैठते ही जाम लग गया। शहर का इस मार्ग से आवागमन बाधित हो गया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने दो टूक कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। कई अधिकारी भी मौके पर आए, लेकिन उनकी भी नहीं सुनी। इस बीच पुलिस प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाने का प्रयास करती रही। महिलाएं कह रही थी कि मानदेय वृद्धि, कर्मचारी का दर्जा और सामाजिक सुरक्षा इनकी मुख्य मांग हैं।

वह ग्रामीण आजीविका मिशन महिला कैडर यूनियन उत्तर प्रदेश के बैनर तले यहां आईं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंची समूह सखियों का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष एवं संरक्षक नीतू सिंह कर रही हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण स्तर पर आजीविका मिशन कई खास जगहों पर अपनी भूमिका अदा कर रही हैं। उन्हें न तो पर्याप्त मानदेय मिल रहा है और न ही कर्मचारी के रूप में सुविधाएं दी जा रही हैं। सामाजिक के नाम पर केवल भाषण सुनती हैं।

दूरदराज के क्षेत्रों में काम करने के लिए यात्रा भत्ता पर जोर दिया

संगठन की प्रमुख मांग महिला कैडर का मासिक मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपये किया जाए। उसका भुगतान प्रत्येक महीने निर्धारित समय पर सीधे उनके बैंक खातों में किया जाए। महिलाओं की एक और प्रमुख मांग है। इसमें सभी समूह सखियों को कर्मचारी का दर्जा देकर श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली सुविधाएं और अधिकार उपलब्ध कराए जाएं। इनकी जरूरत के अनुसार, स्मार्टफोन, टैबलेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एवं इनके रिचार्ज भत्ता की व्यवस्था दी जाए।

मांगों के क्रम में कई और बातें हैं। इनमें दूरदराज के क्षेत्रों में काम करने के लिए यात्रा भत्ता, महंगाई भत्ता पर भी जोर दिया। महिलाओं ने पर्याप्त दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य बीमा तथा महिला कैडर की मृत्यु की स्थिति में परिवार को आर्थिक सहायता की गई है। नीतू सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि महिला कैडर अब केवल आश्वासन से संतुष्ट होने वाली नहीं हैं। इन्होंने मांगों पर लिखित और सकारात्मक आश्वासन मांगा है। इसके बाद ही धरने के निर्णय पर विमर्श करेंगी। प्रदर्शन में अंजली, रेनू यादव, पुष्पा सरोज, कृष्णवती, अनु सिरोही, मीरा शामिल रहीं।

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