झांसी: अधिवक्ता संघ और पुलिस के बीच विवाद सुलझा, सोमवार से न्यायिक कार्यों में लौटेंगे वकील

खबर सार :-

झांसी में अधिवक्ता संघ और पुलिस के बीच का विवाद सुलझ गया है। सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद वकीलों ने कार्य बहिष्कार का फैसला वापस ले लिया है।
झांसी में अधिवक्ता संघ और पुलिस विवाद समाप्त, कार्य बहिष्कार का फैसला वापस

खबर विस्तार : -

झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में जिला अधिवक्ता संघ और पुलिस के बीच पिछले कई दिनों से चला आ रहा गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। दोनों पक्षों के बीच हुई सकारात्मक बातचीत और सीसीटीवी फुटेज के सामने आने के बाद वकीलों ने अपने प्रस्तावित कार्य बहिष्कार के फैसले को वापस ले लिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब जिला न्यायालयों में काम-काज सुचारू रूप से शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। जिला अधिवक्ता संघ की ओर से यह जानकारी दी गई है कि सभी अधिवक्ता अब अदालती कार्यवाही में हिस्सा लेंगे।

विवाद की शुरुआत और मुख्य कारण

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 28 अक्टूबर को हुई थी, जब जिला अधिवक्ता संघ के संयुक्त सचिव रोमेंश अग्रवाल अपने मुंशी विनय कोटी के साथ थाना कोतवाली पहुंचे थे। आरोप लगाया गया था कि वहां थाना प्रभारी ने उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया और मुंशी से बात करने की बात कहकर बाहर भेज दिया। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद वकीलों में रोष व्याप्त हो गया और उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए विरोध प्रदर्शन का मन बनाया। इस दौरान झांसी समाचार (Jhansi news) के माध्यम से भी इस घटना की चर्चा जोरों पर रही।

प्रदर्शन के दौरान बढ़ी तनातनी

विरोध प्रदर्शन और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के दौरान स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब वकीलों और पुलिसर्किमयों के बीच आमने-सामने की स्थिति बन गई। बताया गया कि जेल चौकी प्रभारी और उनके साथ मौजूद पुलिसकर्मी मोबाइल फोन से प्रदर्शन कर रहे वकीलों की तस्वीरें ले रहे थे। इस बात पर कुछ जूनियर अधिवक्ताओं ने आपत्ति जताई और पुलिसकर्मी का मोबाइल ले लिया, जिसके बाद मौके पर हल्की धक्का-मुक्की भी हुई। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने इस स्थिति को संभालने के लिए तुरंत कदम उठाए, जिससे मामला और अधिक न बिगड़े।

सीसीटीवी फुटेज से स्थिति हुई साफ

विवाद बढ़ने के बाद अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों ने थाना कोतवाली पहुंचकर वहां लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की गहन जांच की। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि फुटेज देखने के बाद पूरे घटनाक्रम का सच सामने आया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि शुरुआती जानकारी में कुछ भ्रम की स्थिति थी। इसके अलावा, जिलाधिकारी कार्यालय के पास हुई घटना की भी फुटेज से पुष्टि की गई। इस खुलासे के बाद वकीलों के रुख में नरमी आई और प्रशासन के साथ समाधान की दिशा में चर्चा आगे बढ़ी, जिसे स्थानीय हिंदी समाचार (Hindi news) पोर्टलों ने प्रमुखता से कवर किया।

कार्य बहिष्कार वापस और आगे की रणनीति

जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रमोद शिवहरे और सचिव छोटे लाल वर्मा द्वारा जारी पत्र के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद 2 नवंबर से प्रस्तावित न्यायिक कार्य बहिष्कार को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है। संघ ने पुलिसर्किमयों के साथ हुई कुछ असहज घटनाओं की समीक्षा करते हुए प्रशासन से यह अपेक्षा की है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो। पुलिस और प्रशासन (Police and administration) के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी बल दिया गया है।

न्यायिक कामकाज सामान्य होने की उम्मीद

संघ के पदाधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संघ की ओर से कोई नया कदम नहीं उठाया जाएगा। प्रशासन ने भी मामले की पारदर्शी जांच का भरोसा दिलाया है। विवाद के पूरी तरह से सुलझ जाने से वादकारियों और अधिवक्ताओं ने राहत की सांस ली है। सोमवार से झांसी के सभी न्यायालयों में न्यायिक कामकाज पूरी तरह से सामान्य रूप से संचालित होने की उम्मीद है।

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