झांसी विकास प्राधिकरण का क्राफ्ट मेला टेंडर विवाद: अंतिम तारीख से पहले वेबसाइट से ई-टेंडर गायब होने से उठे सवाल

खबर सार :-

झांसी विकास प्राधिकरण द्वारा क्राफ्ट मेला मैदान में आतिशबाजी की दुकानों के आवंटन के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया विवादों में आ गई है। विभाग ने आवेदन की अंतिम तिथि 3 नवंबर तय की थी, लेकिन 2 नवंबर की रात को ही टेंडर उत्तर प्रदेश की ई-टेंडर वेबसाइट से अचानक गायब हो गया।
झांसी क्राफ्ट मेला आतिशबाजी दुकान टेंडर विवाद, वेबसाइट से गायब हुई निविदा

खबर विस्तार : -

:झांसी : झांसी विकास प्राधिकरण (JDA) की कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा और संदेह के घेरे में आ गई है। शहर के क्राफ्ट मेला मैदान में आगामी दीपावली के दौरान आतिशबाजी की दुकानें लगाने के लिए दुकान आवंटन हेतु एक निविदा जारी की गई थी। इस पूरी प्रक्रिया में पहले नियमों में बदलाव किए गए और बाद में निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने से पहले ही टेंडर को वेबसाइट से हटा दिया गया, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग की ओर से इस बाजार के संचालन के लिए निविदा संदर्भ संख्या 1491/JDA/2026-27 और निविदा आईडी 2026_UPJDA_1200604_1 जारी की गई थी। प्रारंभिक योजना के अनुसार, इस प्रक्रिया के तहत आवेदन करने की अंतिम तिथि 2 नवंबर 2026 तय की गई थी। लेकिन इसके बाद विभाग स्तर पर कुछ ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे पूरा मामला बहस का विषय बन गया।

नियमों में संशोधन और नई समय-सीमा

प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए 31 अक्टूबर 2026 को एक शुद्धि-पत्र जारी किया गया। इस दस्तावेज पर अधिशासी अभियंता के हस्ताक्षर थे। शुद्धि-पत्र में तर्क दिया गया कि कुछ जनप्रतिनिधियों की ओर से अनुरोध किया गया था और प्रतियोगिता को बढ़ावा देने के लिए नियमों में बदलाव जरूरी है। इसके तहत सबसे बड़ा बदलाव अनुभव के मानक में किया गया। पहले इस कार्य के लिए तीन साल का पुराना अनुभव अनिवार्य किया गया था। इस नए संशोधन में उस शर्त को नरम करते हुए न्यूनतम एक साल का सफल अनुभव कर दिया गया। इसके अलावा, आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख को भी आगे बढ़ाकर 3 नवंबर 2026 को दोपहर 12 बजे तक कर दिया गया था। विभाग ने यह स्पष्ट किया था कि बाकी सभी शर्तें पहले जैसी ही रहेंगी।

वेबसाइट से टेंडर गायब होने पर उठे गंभीर सवाल

नया विवाद तब सामने आया जब संशोधित अंतिम तिथि 3 नवंबर होने के बावजूद, ठीक एक दिन पहले यानी 2 नवंबर की रात करीब आठ बजे यह टेंडर उत्तर प्रदेश के आधिकारिक ई-टेंडर पोर्टल पर दिखाई देना बंद हो गया। जब दस्तावेज पोर्टल पर ही उपलब्ध नहीं था, तो तय समय सीमा के भीतर कोई नया आवेदक आवेदन कैसे कर पाता? इस घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोगों और संबंधित पक्षों का कहना है कि जब विभाग ने खुद तारीख बढ़ाकर 3 नवंबर दोपहर तक की थी, तो 2 नवंबर की रात को ही निविदा का पोर्टल से गायब हो जाना किसी बड़ी चूक या गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। क्या यह कोई तकनीकी खराबी थी या फिर इसे जानबूझकर हटाया गया, इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

पारदर्शिता और विभाग की जिम्मेदारी

इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पहलू यह है कि जब अनुभव के नियम को तीन साल से घटाकर एक साल इसलिए किया गया था ताकि अधिक से अधिक लोग इस दौड़ में शामिल हो सकें, तो फिर पोर्टल से टेंडर का समय से पहले हट जाना उस उद्देश्य को ही विफल कर देता है। यदि समय रहते लोग आवेदन ही नहीं कर पाएंगे, तो नियमों में बदलाव का क्या औचित्य रह जाता है? अब झांसी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के सामने इन तमाम सवालों के जवाब देने की बड़ी चुनौती है। यह स्पष्ट होना अभी बाकी है कि आखिर किस अधिकारी के निर्देश पर और किन कारणों से अंतिम समय में टेंडर को पोर्टल से हटाया गया। साथ ही, क्या उन सभी लोगों को आवेदन का पूरा मौका मिला जो संशोधित शर्तों के तहत फॉर्म भरना चाहते थे? इन सभी बिंदुओं पर विभाग की चुप्पी कई तरह की शंकाओं को जन्म दे रही है।

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