मध्य प्रदेश में देवउठनी ग्यारस पर बाल विवाह रोकने को प्रशासन अलर्ट, फ्लाइंग स्क्वाॅड टीमें रखेंगी नजर
खबर सार :-
मध्य प्रदेश में देवउठनी ग्यासर पर बाल विवाह रोकने लिए अभियान चलाया जाएगा। फ्लाइंग स्क्वाॅड की टीमें जिला और ब्लाॅक स्तर पर नजर रखेंगी। इसके अलावा जागरूकता रैलियां भी निकाली जाएंगी।
खबर विस्तार : -
भोपाल: मध्य प्रदेश महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव जी.वी. रश्मि ने बुधवार को बताया कि विभाग राज्य में 'देवउठनी ग्यारस' के अवसर पर बाल विवाह को रोकने के लिए एक व्यापक विशेष अभियान शुरू करेगा। 'देवउठनी ग्यारस' (जो 20 नवंबर, 2026 को है) के दिन बड़ी संख्या में सामूहिक विवाह होने की संभावना को देखते हुए, विभाग ने सभी जिलों को विशेष सतर्कता बरतने और बाल विवाह रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
इस अभियान के तहत गांव और वार्ड स्तर पर जानकारी जुटाने वाली टीमें बनाई जाएंगी। इसके अलावा, विवाह कार्यक्रमों पर नजर रखने के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर 24/7 कंट्रोल रूम और 'फ्लाइंग स्क्वॉड' (त्वरित प्रतिक्रिया टीमें) तैनात किए जाएंगे। सचिव जी.वी. रश्मि ने निर्देश दिए हैं कि भारत सरकार के 'बाल विवाह मुक्त भारत' अभियान के अनुरूप, राज्य में बाल विवाह की घटनाओं को पूरी तरह खत्म करने के लिए जन-जागरूकता और निगरानी गतिविधियों को तेज किया जाए। यह अभियान स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तैयार किया जाएगा, खासकर उन जिलों में जिन्हें बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है।
पंचायतों में बाल विवाह रोकने की शपथ ली जाएगी
जनसंपर्क अधिकारी सुनील बिंदू ने बुधवार को बताया कि 20 नवंबर को 'देवउठनी ग्यारस' के अवसर पर सभी ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों में चुने गए प्रतिनिधि, पंच, सरपंच, पंचायत सचिव, नगर पालिका अध्यक्ष और पार्षद बाल विवाह रोकने की शपथ लेंगे। इस शपथ की प्रतियां पंचायत और वार्ड कार्यालयों में लगाई जाएंगी। विवाह की शुभ तिथियों से कम से कम एक सप्ताह पहले, स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से जागरूकता रैलियां निकाली जाएंगी। सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों को बाल विवाह के बुरे परिणामों और ऐसी घटनाओं की सूचना देने के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन नंबरों के बारे में बताया जाएगा। इसके अलावा, स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाएं गांवों में समूह चर्चा करेंगी, ताकि परिवारों को बाल विवाह न करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
कमजोर परिवारों की पहचान और परामर्श
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, ग्राम कोटवारों (गांव के रक्षक) और पंचायत सचिवों की मदद से, 18 वर्ष से कम उम्र की अविवाहित किशोरियों का डेटा इकट्ठा किया जाएगा। यह जानकारी जिला पुलिस अधीक्षकों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) को उपलब्ध कराई जाएगी। प्रभावित परिवारों को परामर्श दिया जाएगा और उन्हें बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों तथा इसके बुरे परिणामों के बारे में बताया जाएगा; साथ ही, बाल विवाह को रोकने के लिए विशेष निगरानी रखी जाएगी।
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'सूचना टीमें' और 'फ्लाइंग स्क्वॉड' रखेंगे नजर
हर गांव और वार्ड में 'सूचना टीमें' बनाई जाएंगी। इनमें शिक्षक, स्वास्थ्य कर्मी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्वयं सहायता समूह, 'शौर्य दल' (सामुदायिक स्वयंसेवक समूह), पंचायत प्रतिनिधि और जागरूक नागरिक शामिल होंगे। ये टीमें शादी-ब्याह के कार्यक्रमों पर नजर रखेंगी और अगर बाल विवाह का कोई भी संदेह होता है, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करेंगी। जिला और ब्लॉक स्तर पर बनाए गए कंट्रोल रूम 24/7 काम करेंगे। 'बाल विवाह निषेध अधिकारियों' के नेतृत्व में 'फ्लाइंग स्क्वॉड' उन जगहों का निरीक्षण करेंगे जहां सामूहिक विवाह आयोजित किए जाते हैं। यदि कहीं बाल विवाह होता पाया जाता है, तो 'बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006' के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बाल विवाह निषेध अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण
जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन कार्यशालाओं में उन अधिकारियों को 'मास्टर ट्रेनर' के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, जिन्हें 6 अक्टूबर, 2026 को विभाग द्वारा आयोजित राज्य-स्तरीय कार्यशाला में प्रशिक्षित किया गया था। इन कार्यशालाओं का मुख्य उद्देश्य राजस्व, पुलिस, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, शहरी प्रशासन, और महिला एवं बाल विकास विभागों के अधिकारियों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करना होगा।
हेल्पलाइन और सोशल मीडिया के जरिए जागरूकता बढ़ाना
बाल विवाह को रोकने के लिए स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और दीवारों पर संदेश लिखकर बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इसके अलावा, धार्मिक नेताओं, सामाजिक संगठनों, जन प्रतिनिधियों और शादी-ब्याह से जुड़े अन्य प्रभावशाली लोगों से भी सहयोग लिया जाएगा। नागरिक हेल्पलाइन 181, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, आपातकालीन सेवा 112 पर कॉल करके या स्थानीय कंट्रोल रूम से संपर्क करके बाल विवाह की घटनाओं की सूचना दे सकते हैं। इसके अलावा, 'बाल विवाह मुक्त भारत' पोर्टल पर भी शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं। विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि वे इस अभियान के तहत की गई जन-जागरूकता गतिविधियों की जानकारी और रोके गए बाल विवाहों का विवरण पोर्टल पर दर्ज करें; साथ ही, उन्हें 'देवउठनी ग्यारस' के अवसर पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी सौंपने के लिए कहा गया है।
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