भोपाल में दिखा सफाई कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल का असर, न्यू मार्केट समेत कई इलाकों में लगे कचरे के ढेर

खबर सार :-

मध्य प्रदेश में सफाई कर्मचारियों ने 25 हजार रुपये न्यूनतम वेतन और स्थायी नियुक्ति समेत चार मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दिया है। हड़ताल की वजह से कई इलाकों से कूड़ा नहीं उठाया गया।
दीपावली से पहले MP में सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

खबर विस्तार : -

भोपाल: मध्य प्रदेश में दिवाली से ठीक पहले सफाई सेवाओं का संकट खड़ा हो गया है। राज्य भर के सफाई कर्मचारियों ने बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। उनकी चार मुख्य मांगें हैं, जिनमें वेतन वृद्धि, स्थायी रोजगार का दर्जा और सरकारी कर्मचारी के रूप में मान्यता मिलना शामिल है। हड़ताल का असर राजधानी भोपाल में सुबह से ही दिखने लगा; मोहल्लों और बाजारों से कचरा नहीं उठाया गया और घर-घर जाकर कचरा इकट्ठा करने वाली गाड़ियां ट्रांसफर स्टेशनों पर ही खड़ी रहीं। न्यू मार्केट सहित कई इलाकों में कचरा जमा होना शुरू हो गया है।

सफाई कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि वे काम पर तभी लौटेंगे, जब सरकार के साथ बातचीत के जरिए उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला लिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो यह हड़ताल अनिश्चित काल तक जारी रहेगी—यानी दिवाली के दिन भी कोई सफाई सेवा नहीं मिलेगी। त्योहार से ठीक पहले सफाई सेवाओं में आई यह रुकावट नगर निगम और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

मंत्री और प्रमुख सचिव के साथ होगी बातचीत

ऑल इंडिया सैनिटेशन वर्कर्स ट्रेड यूनियन (7262) के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झंझोट ने बताया कि राज्यव्यापी हड़ताल का फैसला संगठन के पदाधिकारियों की सहमति से लिया गया है। बुधवार को नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रमुख सचिव मनोज दुबे के साथ एक बैठक होनी है। अगर बातचीत से उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक नतीजा निकलता है, तो यूनियन आगे की रणनीति तय करेगी; वरना आंदोलन जारी रहेगा। यूनियन का दावा है कि राज्य भर के 16 नगरीय निकायों और 374 नगर परिषदों के 1 लाख से अधिक सफाई कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हैं। हड़ताल के दौरान घर-घर से कचरा उठाने का काम और सड़कों व सार्वजनिक जगहों की सफाई पूरी तरह बंद रहेगी।

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भोपाल में रोज निकलता है 850 टन कचरा

राजधानी में घर-घर से कचरा उठाने के लिए 400 से ज्यादा गाड़ियां लगाई गई हैं। इनमें से हर गाड़ी कचरा इकट्ठा करने के लिए रोज दो से तीन चक्कर लगाती है। शहर के 17 कचरा ट्रांसफर स्टेशनों से कचरा, बड़ी क्षमता वाले कैप्सूल टैंकरों के जरिए आदमपुर छावनी साइट तक पहुंचाया जाता है। भोपाल में रोज़ाना लगभग 850 टन कचरा निकलता है। ऐसे में, अगर हड़ताल लंबे समय तक चलती है, तो कचरा उठाने और उसके निपटान की पूरी व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।

सफाई कर्मचारियों की चार मुख्य मांगें हैं:

- सफाई कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।

- न्यूनतम मासिक वेतन 25,000 रुपये तय किया जाए।

- सभी सफाई कर्मचारियों को स्थायी किया जाए और ठेके (कॉन्ट्रैक्ट) पर आधारित नौकरी की व्यवस्था खत्म की जाए।

- जीवनसाथी की मृत्यु होने की स्थिति में, परिवार के किसी सदस्य को अनुकंपा के आधार पर नौकरी (compassionate appointment) देने का प्रावधान किया जाए।

मंगलवार को जहांगीराबाद चौराहे पर सड़क जाम

हड़ताल से एक दिन पहले, मंगलवार को भोपाल में सफाई कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। अपनी मांगें मनवाने के लिए राज्य भर से आए कर्मचारियों ने जहांगीराबाद चौराहे पर सड़क जाम कर दी। कर्मचारियों का कहना था कि वे मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन उसे लेने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा। इससे नाराज होकर कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की योजना बनाई। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड्स लगा दिए। इसके बाद, कर्मचारी लगभग दो घंटे तक सड़क पर ही बैठे रहे। काफी समझाने-बुझाने के बाद वे शाहजहानी पार्क चले गए, जहां उन्होंने रात तक अपना धरना जारी रखा।

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