‘राम की पैड़ी’ पर 2500 वर्ग फुट में बनाई गई भव्य रंगोली, 150 विद्यार्थियों ने रंगों से उकेरी परंपरा

खबर सार :-

अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। राम की पैड़ी पर 150 विद्यार्थियों ने 2500 वर्ग फुट में देवताओं के स्वागत के लिए भव्य रंगोली बनाई है।
दीपोत्सव में देवताओं के स्वागत में रंगों से सजा 2500 वर्ग फीट का चौक

खबर विस्तार : -

अयोध्या: भगवान राम की नगरी में 'राम की पैड़ी' पर रंगों का एक दिव्य आंगन आकार ले चुका है। इसके केंद्र में एक कमल खिला है, जिसके चारों ओर ब्रह्मांड की झलक दिखाई देती है। इसमें नौ ग्रहों और चार मुख्य दिशाओं को प्रतीकात्मक रूप में दर्शाया गया है। दीपोत्सव की जगमगाहट के बीच, 2,500 वर्ग फुट में फैली यह रंगोली एक ऐसे दिव्य आंगन की तरह है, जो देवताओं के स्वागत के लिए तैयार है। 

अयोध्या में दीपोत्सव को भव्य, दिव्य और भारतीय परंपराओं से गहराई से जोड़ने के लिए प्रयासरत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन और नेतृत्व में डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग ने 'चौक पूरना' नामक लोक कला को 'राम की पैड़ी' पर जीवंत कर दिया है। पवित्र अवसरों पर देवताओं के आगमन के लिए घर के आंगन में 'चौक' (एक सजावटी और शुभ आकृति) बनाने की पारंपरिक प्रथा, अब भगवान राम की नगरी में हो रहे इस भव्य उत्सव का एक अहम हिस्सा बन गई है।

'राम की पैड़ी' पर दिव्य स्वागत

भारतीय संस्कृति में शुभ अवसरों पर देवताओं को आमंत्रित करने के लिए आंगन में 'चौक' बनाने की परंपरा है। यह परंपरा शुभता, मंगलकामनाओं और आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक है। भगवान राम की नगरी के लिए दीपोत्सव भी अत्यंत शुभ अवसर है। इसी भावना को अपनाते हुए, 'राम की पैड़ी' पर 50 गुणा 50 फुट की एक रंगोली बनाई गई है। जीवंत रंगों से सजी यह 'चौक' देवताओं के स्वागत के लिए तैयार एक दिव्य आंगन जैसी है—एक ऐसा स्थान जहां लोक परंपरा और आध्यात्मिक भक्ति का मिलन होता है।

सृष्टि का कमल, ब्रह्मांड और चार दिशाएं

इस रंगोली के हर तत्व का गहरा अर्थ है। इसकी गोलाकार सीमा ब्रह्मांड और नौ ग्रहों को दर्शाती है, जबकि वर्गाकार आकृति घर और चार मुख्य दिशाओं का प्रतीक है। केंद्र में बना कमल सृष्टि के उद्गम को दर्शाता है; भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में कमल का संबंध सीधे तौर पर सृष्टि की रचना और उत्पत्ति से माना जाता है। इस प्रकार, रंगोली ब्रह्मांड, ग्रहों, मुख्य दिशाओं और सृष्टि के मूल सार को एक साथ पिरोती है। 

लोक परंपरा में देवी-देवताओं का आह्वान

डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रीमा सिंह बताती हैं कि भारतीय परंपरा में शुभ अवसरों पर घर के आंगन में 'चौक' (एक पारंपरिक अनुष्ठानिक डिजाइन) बनाकर देवी-देवताओं का आह्वान करने की प्रथा है। 'दीपोत्सव' (प्रकाश का पर्व) भी एक अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक आयोजन है। 'राम की पैड़ी' पर इसी परंपरा को रंगोली के माध्यम से दर्शाया गया है। डॉ. सिंह बताती हैं कि रंगोली में बनी गोलाकार आकृतियां ब्रह्मांड और नौ ग्रहों (नवग्रह) का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि वर्गाकार आकृतियां घर और चार मुख्य दिशाओं का प्रतीक हैं। इसके केंद्र में बना कमल का फूल सृष्टि के उद्भव को दर्शाता है। इस पूरी रचना के माध्यम से भारतीय लोक संस्कृति और उसकी आध्यात्मिक मान्यताओं को प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया है।

150 विद्यार्थियों के समर्पण से जीवंत हुई सांस्कृतिक विरासत

अवध विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग के लगभग 150 विद्यार्थियों ने मिलकर इस भव्य रंगोली का निर्माण किया है। इसकी परिकल्पना डॉ. सरिता द्विवेदी और डॉ. रीमा सिंह ने की थी। यह परियोजना कुलपति कर्नल डॉ. विजेंद्र सिंह की प्रेरणा से पूरी की गई और प्रोफेसर सुरेंद्र मिश्रा ने इसकी देखरेख की। घर के आंगन से निकलकर 'राम की पैड़ी' तक पहुँचने वाली यह 'चौक' बनाने की परंपरा, अब नई पीढ़ी के लिए भारत की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का एक माध्यम बन गई है।

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