कुल्लू दशहरा उत्सव के पहले दिन बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु, यहां मिलता है भगवान रघुनाथ का आशीर्वाद

खबर सार :-

अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव की शुरूआत हो चुकी है। इसके पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु के पहुंचने की खबर है। यहां पर भगवान रघुनाथ का आशीर्वाद लेने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। देवी-देवताओं की पालकियां भी पहुंचने लगी है।
सुबह ही पहुंचने लगीं पालकियां, 347 देवी-देवताओं को किया गया आमंत्रित

खबर विस्तार : -

कुल्लू, विश्व प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव शुरू हो गया है। आज सुबह से ही सुल्तानपुर स्थित भगवान रघुनाथ के मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने पहुंचे। विभिन्न देवी-देवताओं की शोभायात्राएं भी यहां पहुंचने लगी हैं। यहां पहुंच रहे लोगों में भगवान के प्रति अपार श्रद्धा देखने को मिल रही हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी भगवान रघुनाथ का आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं।

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देवी हिडिम्बा का कुल्लू आगमन हो गया

भगवान रघुनाथ मंदिर के कारदार (प्रबंधक) दानवेंद्र सिंह ने बताया कि इस वर्ष के दशहरा उत्सव में शामिल होने के लिए 347 देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया है। विभिन्न क्षेत्रों से इन देवी-देवताओं की पालकियां सुबह से ही मंदिर पहुंच रही हैं। देवी हिडिम्बा का कुल्लू आगमन हो गया और इसके साथ ही पारंपरिक रथ यात्रा भी शुरू कर दी गई है। सभी को अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा की शुभकामनाएं दी जा रही हैं।

यहां पर दानवेंद्र सिंह ने बताया कि भगवान रघुनाथ कुल्लू घाटी के मुख्य देवता हैं। वह दूर-दूर से श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कई श्रद्धालु भगवान रघुनाथ के प्रति अपनी आस्था अलग तरीके से प्रकट करते हैं। उनके लिए 100 से 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा कुछ भी नहीं होती है। वह यहां पैदल ही सफर करके आते हैं। स्थानीय बोली में इस परंपरा को अठ चक्री कहा जाता है। यह सदियों पुरानी एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रथा है। 

भगवान रघुनाथ की शोभायात्रा निकली जाएगी

निश्चित समय पर भगवान रघुनाथ की एक भव्य शोभायात्रा मुख्य मंदिर से ढालपुर मैदान की ओर निकली जाएगी। इस शोभायात्रा को कुल्लू की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के रूप में जाना जाता है। यहां के सभी देवी-देवताओं की पूजा से जुड़ी अनूठी परंपराओं का निर्वहन करने के लिए बड़ी संख्या में जिम्मेदारी निभाने वाले लोग रहते हैं। भगवान रघुनाथ अपने पूरी प्रजा और सैनिकों के साथ ढालपुर मैदान पहुंचेंगे। जहां अगले सात दिनों तक विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

ढालपुर मैदान में भगवान रघुनाथ के लिए रोज़ाना विधिवत प्रार्थनाएं और अनुष्ठान किए जाएंगे। पूरे उत्सव के दौरान यह परंपरा निभाई जाएगी। एक स्थान निश्चत किया गया है, जहां पर भगवान एक खुले दरबार में भक्तों को दर्शन देंगे। पूरा इलाका भक्ति के माहौल में डूबा रहता है। इस दौरान यहां पर नाग देवता, भगवान नारायण और अन्य देवी-देवताओं की महिमा बिखरती रहती है। दोपहर में ऐतिहासिक रथ यात्रा शुरू की जाएगी। 

अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव है बड़ा आयोजन 

कुल्लू राजपरिवार की कुलदेवी, माता हिडिम्बा की पहुंच हो गई है। यह अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव बड़ा आयोजन होता है। इसमें शामिल होने के लिए कुल्लू दूर-दूर से लोग आते हैं। उनके आगमन पर भक्तों ने कई जगहों पर देवी का भव्य स्वागत किया। सुल्तानपुर पहुंचने के बाद, माता हिडिम्बा के राजपरिवार से मुलाकात करने की परंपरा है। इसके बाद शस्त्र पूजन होगा। इसके बाद माता हिडिम्बा ढालपुर मैदान के लिए प्रस्थान करेंगी। 

27 अक्टूबर तक यह अंतर्राष्ट्रीय उत्सव चलता रहेगा। इस दौरान, पूरी कुल्लू घाटी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उल्लास में डूबी रहेगी। घाटी शंख, खड़ताल, नरसिंघा और अन्य पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनियों से गूंज उठेगी। यहां का भक्तिपूर्ण माहौल हज़ारों भक्त और पर्यटकों को आकर्षित करता है। इस दिव्य संस्कृति के भव्य संगम के साक्षी बनने के लिए हजारों लोग पहुंचते हैं।

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