लगातार बारिश से उफनाईं स्वर्णरेखा, खतरे के निशान के पार पहुंची खरकई
खबर सार :-
स्वर्णरेखा और खरकई नदियों का जलस्तर पिछले दिनों थमा था, वहीं अब इसमें बाढ नजर आने लगी है। शुक्रवार को इनका जलस्तरा बढ़ जाने से यह निचले स्थानों में बाढ़ का रूप ले रही हैं।
खबर विस्तार : -
पूर्वी सिंहभूम, पिछले दो दिनों से जारी मूसलधार बारिश परेशानी देने लगी है। लागातार की बारिश के कारण नदियों पर उफान नजर आने लगा है। इसका ज्यादा असर जमशेदपुर की स्वर्णरेखा और खरकई नदियों पर पड़ रहा है। दूसरी ओर कई स्थानों पर अभी बारिश का सिलसिला दो दिन यूं ही रहने की संभावना बन रही है।
यह भी पढ़ें : तटीय इलाकों से टकराकर कमजोर पड़ा चक्रवात ‘अर्नब’, आज 22 राज्यों में बारिश; ओडिशा के 10 जिलों में स्कूल बंद
एक खतरे के निशान के करीब तो दूसरी ने किया पार
शुक्रवार सुबह खरकई नदी आदित्यपुर पुल के समीप करीब लगे निशान 129.00 मीटर को पार कर 129.12 मीटर पर पहुंच गई। वहीं, मानगो पुल के पास स्वर्णरेखा का जलस्तर 120.40 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 121.50 मीटर से महज 1.10 मीटर नीचे है। जैसे-जैसे दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है, वैसे ही निचले और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ रही है।
डैम खोलकर पानी निकाला जा रहा
लगातार बारिश के साथ चांडिल डैम, गालूडीह बराज और गांजिया बराज में पानी का दबाव बढ़ने के बाद इनके गेट खोलकर पानी निकाला जा रहा है। चांडिल डैम के जलस्तर में वृद्धि के बाद पहले आठ और बाद में नौ गेट खोले जाने की जानकारी सामने आई है। डैम का जलस्तर करीब 181 मीटर पहुंचने के बाद पानी की निकासी बढ़ाई गई।
आदित्य पुल के पास खतरे के निशान के पार
इनमें शुक्रवार से ही जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया था। इसी तरह बारिश की गति भी बढ़ती रही है। खरकाई नदी आदित्य पुल के समीप अब खतरे के निशान 129.00 मीटर को पार कर 129.12 मीटर पर पहुंच गई है। नदी का जलस्तर इस तरह से बढ़ जाना लोगों को टेंशन देने लगा है। मैंगोपुल के पास भी स्वर्ण रेखा का जलस्तर बढ़ता हुआ 120.40 मीटर पर पहुंच गया है।
यह खतरे के निशान 121. 50 मीटर से महज 1.10 मीटर नीचे है। नदियों का जल इस तरह से बढ़ जाना, सबसे ज्यादा निचली बस्तियों के लिए मुसीबत लेकर आता है। तटीय इलाकों में रहने वाले लोग बस्ती में जलभराव के डर से परेशान हैं। यदि निचले स्थानों में पानी भर जाएगा तो रहने की मुश्किल हो जाएगी।
चांडिल डैम के आठ गेट खोल दिए गए
चांडिलडैम ग्लूडीह़बराज और गांजयाबराज में पानी का दबाव बढ़ गया है। प्रशासन की ओर से उनके गेट खोलने के लिए कहा गया है। धीरे-धीरे पानी निकाला जा रहा है। चांडिल डैम के जलस्तर में वृद्धि के कारण आठ गेट खोले जाने की जानकारी सामने आई है। यह भी कहा जा रहा है कि एक और गेट खोल दिया गया है।
बताया जा रहा है कि जलस्तर 181 मी पहुंचने के बाद पानी की निकासी बढ़ाई गई है। इस बात से यह जाहिर हो रहा है कि जल स्तर बढ़ने के कारण कहीं पानी कम करने की कोशिश की जा रही है, दूसरी ओर यह भी चिंता की बात है कि पानी कहीं और जाकर परेशानी न बन जाए। बताया जा रहा है कि खरकाई नदी पर बने बराज के सभी पांच गेट खोल दिए गए हैं। इस कारण से अब नदियों का जलस्तर भी बढ़ सकता है।
निगरानी प्रबंधन को सचेत रहने के लिए कहा गया
जलाशय और बराजों से पानी छोड़े जाने के कारण इनका प्रभाव नदियों पर पड़ना स्वाभाविक है। इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए स्वर्ण रेखा परियोजना के मुख्य अभियंता फ्लड की ओर से पूर्वी सिंहभूमि और सरायकेला खरसावां के अलावा पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के आपदा प्रबंधन अधिकारियों को भी बाढ और कटान की परिस्थितियों पर नजर रखने के लिए कहा गया है।
फ्लड कंट्रोल सेल नदियों के जल स्तर और प्रवाह पर निगरानी बनाए रखने को कहा गया है। इनका सीधा संबंध बस्तियों की ओर हो सकता है। खरकाई के खतरे के निशान को पार करने और स्वर्ण रेखा की जलस्तर के तेजी से बढ़ने से कई स्थानों पर बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। इन बस्तियों में बागबेड़ा, जुगसलाई, शास्त्रीनगर, कदमा, सोनारी, मानगो और सिदगोड़ा है।
निचले इलाकें का संकट बढने लगा
यह निचले इलाके के अंतर्गत आते हैं। प्रशासन की ओर से भी लोगों को आगाह किया गया है, जबकि नदी किनारे रहने वाले लोग सावधानी बरत रहे हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने नदी के घाटों, जलभराव वाले क्षेत्र, तेज बहाव वालों से पानी के करीब नहीं जाने की अपील की है। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण आंतरिक उड़ीसा तट दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर बना दीप डिप्रेशन कमजोर होकर डिप्रेशन में बदल गया है।
उत्तर प्रदेश पश्चिम दिशा में यह बढ़ रहा है। उधर, झारखंड एरिया में भी बारिश का दौर जारी है। यद्यपि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आज सुबह से ही बरसात हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार, कुछ इलाकों में 26 और 27 तक यह स्थिति बनी रह सकती है। तेज हवाएं भी चलने की संभावना जताई जा रही है। लगातार ऊपरी जल ग्रहण क्षेत्र से पानी के आने और पानी का नदियों में छोड़े जाने के कारण स्थितियां बदल सकती हैं।
यह भी पढ़ें : बृजभूषण शरण सिंह की बढ़ी मुश्किलें, महिला पहलवानों ने की ये अपील, कोर्ट में फैसले को दी चुनौती
अन्य प्रमुख खबरें
-
बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ महिला पहलवानों की अपील, फैसले को चुनौती
2026-09-25
-
ओडिशा-आंध्र प्रदेश में भारी बारिश, आज 22 राज्यों में बारिश का अनुमान
2026-09-25
-
अभिजीत दिपके किया देशव्यापी आंदोलन का ऐलान, ज्ञानेश कुमार का मांग इस्तीफा
2026-09-25
-
‘मेक इन इंडिया’ के 12 वर्ष: दुनिया के लिए भी उत्पाद तैयार कर रहा भारत
2026-09-25
-
राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस: पीएम मोदी और अमित शाह पर चुनावी गड़बड़ी की जांच की मांग
2026-09-24
-
यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड, दो चालक और परिचालक गिरफ्तार
2026-09-24
-
INS त्रिशूल पहुंचा फ्रांस, ‘वरुण’ अभ्यास में दिखेगी भारत की ताकत
2026-09-24
-
एक खून माफ होता तो ज्ञानेश कुमार को गोली मार देता-मुकेश सहनी
2026-09-24
-
सिंबल विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण, पूछ कब होगा फैसला
2026-09-24
-
ग्रेटर नोएडा बस अग्निकांड पर PM मोदी और सीएम योगी ने जताया दुख
2026-09-24
-
सड़क हादसों पर जमशेदपुर में कोहराम, तमिलनाडु के रामानाथपुरम में मातम
2026-09-24
-
Chennai, क्यूआर कोड वाला परमिट होगा लागू, खनन माफियाओं का टेंशन बढ़ा
2026-09-24
-
Greater noida : यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में लगी fire, 9 यात्रियों की जलकर मौत
2026-09-24
-
नीमच : महिलाओं ने बनाए मिट्टी के बर्तन, मसाले की पैकिंग में भी लाभ कमाया
2026-09-23
-
पंजाब में नशे पर शिकंजाः 98 हजार से ज्यादा गिरफ्तारियां
2026-09-23