IPO की शानदार मांग के बाद शेयर पर दबाव, ₹1,790 तक आया; मार्केट कैप ₹4.49 लाख करोड़ के करीब
खबर सार :-
NSE शेयरों में लिस्टिंग के दूसरे दिन मुनाफावसूली से दबाव दिखा। हालांकि IPO को 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला और मार्केट कैप करीब ₹4.49 लाख करोड़ पहुंचा। आगे कंपनी की आय, ट्रेडिंग वॉल्यूम और बाजार गतिविधियां शेयर के प्रदर्शन के अहम कारक होंगे।
खबर विस्तार : -
NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के शेयरों में लिस्टिंग के अगले ही दिन शुक्रवार को गिरावट देखने को मिली। शुरुआती उत्साह के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे शेयर कारोबार के दौरान करीब 1.6 फीसदी तक फिसलकर 1,790 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर पर पहुंच गया। बाद में खबर लिखे जाने तक यह करीब 1,796 रुपये पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले लगभग 1.20 फीसदी नीचे था।
NSE के शेयर गुरुवार को अपने इश्यू प्राइस से करीब 0.8 फीसदी प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए थे। हालांकि लिस्टिंग अपेक्षाकृत सीमित बढ़त के साथ हुई, लेकिन पहले कारोबारी दिन शेयर ने दिन के दौरान 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी दिखाई। कारोबार खत्म होने तक इसमें करीब 1.8 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई थी। इसके बाद शुक्रवार को निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली देखने को मिली।
देश का दूसरा सबसे बड़ा IPO
NSE का आईपीओ भारत के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम रहा। इससे पहले 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का 27,870 करोड़ रुपये का आईपीओ सबसे बड़ा रहा था। NSE के इश्यू ने बाजार में काफी रुचि पैदा की और निवेशकों से मजबूत प्रतिक्रिया हासिल की। 17 से 21 सितंबर तक खुले NSE के आईपीओ को कुल 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। 22,568.94 करोड़ रुपये के इश्यू साइज के मुकाबले निवेशकों ने 90,287.33 करोड़ रुपये की बोलियां लगाईं। मजबूत सब्सक्रिप्शन के बावजूद लिस्टिंग के बाद शेयर में शुरुआती कारोबार में सीमित बढ़त और फिर मुनाफावसूली देखने को मिली।
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₹4.49 लाख करोड़ के करीब पहुंचा मार्केट कैप
लिस्टिंग के बाद NSE का बाजार पूंजीकरण करीब 4.49 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। इस मूल्यांकन के साथ एक्सचेंज भारत की 10वीं सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बन गया है। बाजार मूल्य के लिहाज से NSE ने सन फार्मास्युटिकल्स और टाइटन जैसी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। मार्केट कैप के आधार पर NSE फिलहाल रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और हिंदुस्तान यूनिलीवर के बाद स्थान पर है। हालांकि शेयर बाजार में कंपनियों की रैंकिंग शेयर कीमत और बकाया शेयरों की संख्या के आधार पर लगातार बदलती रहती है।

विशेषज्ञों की नजर में मुनाफावसूली सामान्य
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी बड़े आईपीओ की लिस्टिंग के बाद शुरुआती तेजी के पश्चात कुछ निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली बाजार की सामान्य गतिविधि हो सकती है। NSE की मजबूत बाजार स्थिति और भारत में पूंजी बाजार के लगातार विस्तार को देखते हुए इसके कारोबार को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बनी रहने की बात विशेषज्ञों ने कही है।हालांकि शेयर के प्रदर्शन का आकलन केवल शुरुआती लिस्टिंग के आधार पर करना पर्याप्त नहीं होगा। आगे कंपनी की आय, बाजार हिस्सेदारी, ट्रेडिंग वॉल्यूम, नियामकीय बदलाव और पूंजी बाजार की गतिविधियां शेयर के प्रदर्शन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हो सकते हैं।
मोबाइल-फर्स्ट प्लेटफॉर्म पर काम
NSE के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आशीष कुमार चौहान ने बताया कि एक्सचेंज एक व्यापक मोबाइल-फर्स्ट प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य निवेशकों को उनके ट्रेडिंग डेटा, पोर्टफोलियो से जुड़ी जानकारी और एनालिटिकल सुविधाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है। यह पहल एक्सचेंज के डिजिटल इकोसिस्टम को विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे निवेशकों को बाजार से संबंधित जानकारी और अपने पोर्टफोलियो की निगरानी के लिए एकीकृत डिजिटल अनुभव उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
ट्रांजैक्शन फीस से आती है बड़ी कमाई
NSE के कारोबार मॉडल में ट्रांजैक्शन शुल्क की अहम भूमिका है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की परिचालन आय का 78.65 फीसदी हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्जेज से आया था। इससे एक्सचेंज की कमाई में ट्रेडिंग गतिविधियों और बाजार में लेनदेन की महत्वपूर्ण भूमिका स्पष्ट होती है। लिस्टिंग के बाद शेयर में आई गिरावट के बावजूद NSE के आईपीओ की मजबूत मांग और बाजार पूंजीकरण ने इसे भारतीय शेयर बाजार में एक प्रमुख सूचीबद्ध कंपनी के रूप में स्थापित किया है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन और बाजार गतिविधियों के साथ शेयर के मूल्यांकन पर रहेगी।
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