IPO का मार्केट में जोरदार धमालः 366 कंपनियों ने जुटाए ₹1.9 लाख करोड़, बाजार में बढ़ा निवेशकों का भरोसा

खबर सार :-

वित्त वर्ष 2026 में 366 कंपनियों का आईपीओ के जरिए 1.9 लाख करोड़ रुपये जुटाना भारतीय पूंजी बाजार की मजबूत स्थिति दिखाता है। हालांकि, घटते लिस्टिंग गेन और ओवरसब्सक्रिप्शन ने संकेत दिया है कि निवेशक अब अधिक सतर्क हैं। भविष्य में आईपीओ की सफलता सही वैल्यूएशन, मजबूत कमाई, बेहतर गवर्नेंस और संस्थागत भागीदारी पर निर्भर करेगी। घरेलू निवेशकों की बढ़ती ताकत बाजार को सहारा देती रहेगी।
​​​​​​​IPO बाजार से 366 कंपनियों ने जुटाए ₹1.9 लाख करोड़

खबर विस्तार : -

India IPO 2026: भारत के आईपीओ बाजार ने वित्त वर्ष 2026 में फंड जुटाने के मामले में नया मुकाम हासिल किया है। कुल 366 कंपनियों ने मेनबोर्ड और एसएमई प्लेटफॉर्म के जरिए 1.9 लाख करोड़ रुपये जुटाए। खास बात यह रही कि मेनबोर्ड आईपीओ की लिस्टिंग संख्या ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई। हालांकि, रिकॉर्ड फंड जुटाने के बावजूद लिस्टिंग गेन और ओवरसब्सक्रिप्शन का उत्साह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले कम रहा, जो निवेशकों के बढ़ते सतर्क रुख का संकेत है।

366 कंपनियों ने बाजार से जुटाई बड़ी रकम

ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में भारत में कुल 366 कंपनियों ने आईपीओ के जरिए 1.9 लाख करोड़ रुपये जुटाए। इसमें मेनबोर्ड के साथ एसएमई प्लेटफॉर्म पर आए आईपीओ भी शामिल हैं। इस दौरान कंपनियों ने पूंजी बाजार का इस्तेमाल कारोबार विस्तार, वित्तीय जरूरतों और विकास योजनाओं के लिए पूंजी जुटाने के प्रमुख माध्यम के तौर पर किया। रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 2026 में मेनबोर्ड आईपीओ की लिस्टिंग गतिविधि अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर रही। इस अवधि में 109 कंपनियां मेनबोर्ड प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध हुईं और उन्होंने कुल 1.77 लाख करोड़ रुपये जुटाए। यह आंकड़ा भारतीय पूंजी बाजार में कंपनियों की बढ़ती भागीदारी और निवेशकों की मजबूत घरेलू उपस्थिति को दर्शाता है।

रिकॉर्ड फंड जुटा, लेकिन लिस्टिंग गेन हुआ कम

वित्त वर्ष 2026 की खासियत यह रही कि रिकॉर्ड स्तर पर फंड जुटाने की गतिविधि के साथ लिस्टिंग गेन में कमी देखने को मिली। रिपोर्ट के अनुसार, आईपीओ से लिस्टिंग के दिन मिलने वाला मुनाफा और ओवरसब्सक्रिप्शन का स्तर वित्त वर्ष 2025 के ऊंचे स्तरों से नीचे रहा। इस बदलाव को बाजार के अधिक परिपक्व और समझदार होने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। पहले जहां आईपीओ में निवेश का उत्साह कई बार लिस्टिंग गेन की उम्मीद से प्रेरित होता था, वहीं अब निवेशक कंपनी के वास्तविक कारोबार, आय और वैल्यूएशन को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।

अब वैल्यूएशन पर ज्यादा फोकस

रिपोर्ट के मुताबिक, आईपीओ की सफलता अब केवल इस बात से तय नहीं हो रही कि कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो गई या नहीं। निवेशक सही प्राइसिंग, कमाई की गुणवत्ता और संस्थागत भागीदारी जैसे पहलुओं पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। इसका मतलब है कि कंपनियों के लिए आईपीओ के जरिए पूंजी जुटाना आसान होने के बावजूद बाजार में टिकाऊ सफलता हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। मजबूत बिजनेस मॉडल, बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं। ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और सीएफओ एडवाइजरी लीडर करण मारवाह के अनुसार, आज के आईपीओ बाजार में सफलता सिर्फ लिस्टिंग तक सीमित नहीं है। एक कंपनी के लिए पब्लिक कंपनी के रूप में काम करने की तैयारी, गवर्नेंस, अनुशासन और विश्वसनीयता भी उतनी ही जरूरी है।

ग्लोबल चुनौतियों के बीच घरेलू निवेशकों का सहारा

रिपोर्ट में कहा गया कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और महंगाई के दबाव के बावजूद भारत के कैपिटल मार्केट मजबूत बने रहे। इसका एक बड़ा कारण घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी रही। घरेलू पूंजी की बढ़ती भूमिका ने वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय इक्विटी बाजार को सहारा दिया। हालांकि, निवेशकों का जोखिम लेने का रवैया अब पहले की तुलना में अधिक सोच-समझकर तय हो रहा है। वैश्विक घटनाक्रम, कमोडिटी कीमतों और करेंसी में उतार-चढ़ाव का असर बाजार की धारणा पर ज्यादा दिखाई दे रहा है। ऐसे में निवेशक आईपीओ में पैसा लगाने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं को परख रहे हैं।

रेगुलेटरी सुधारों से मजबूत हुआ IPO इकोसिस्टम

रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के नियामकीय सुधारों में आईपीओ इकोसिस्टम को ज्यादा पारदर्शी बनाने, निवेशकों की पहुंच बढ़ाने और उनकी सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इन सुधारों का उद्देश्य कंपनियों और निवेशकों के बीच भरोसा बढ़ाना तथा पूंजी बाजार को अधिक व्यवस्थित बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियामकीय बदलावों के साथ बढ़ता निवेशक आधार भारतीय आईपीओ बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, कंपनियों को अब निवेशकों की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप अपनी पेशकश और वैल्यूएशन को बेहतर तरीके से तैयार करना होगा।

IPO की पाइपलाइन आगे भी रहेगी मजबूत

मैक्रोइकोनॉमिक परिस्थितियां और वैश्विक घटनाक्रम आगे भी आईपीओ गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी, भारत का संरचनात्मक आर्थिक विकास और लगातार बढ़ता निवेशक आधार आईपीओ पाइपलाइन के लिए सकारात्मक माहौल तैयार कर रहे हैं। बाजार के परिपक्व होने के साथ आने वाले समय में केवल बड़ी संख्या में आईपीओ आना ही महत्वपूर्ण नहीं होगा। कंपनियों की कमाई, वैल्यूएशन, गवर्नेंस और कारोबार की स्थिरता निवेशकों के फैसलों में ज्यादा अहम भूमिका निभाएगी।

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