शेयर बाजार में घरेलू निवेशकों का दिखा दम! DII ने लगातार तीसरे साल पार किया ₹5 लाख करोड़ का आंकड़ा

खबर सार :-

घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 2026 में अब तक 5.13 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर भारतीय बाजार में अपना दबदबा और मजबूत किया है। लगातार तीसरे साल 5 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार होना निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है। म्यूचुअल फंड प्रवाह, मजबूत अर्थव्यवस्था और बेहतर कॉरपोरेट आय के बीच DII की खरीदारी आगे भी बाजार को सहारा दे सकती है।
विदेशी बिके, देसी डटे! DII का निवेश ₹5.13 लाख करोड़ के पार

खबर विस्तार : -

DII Investment 2026: भारतीय शेयर बाजार में घरेलू निवेशकों का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है। घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने 2026 में 7 अगस्त तक 5.13 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध इक्विटी निवेश कर नया भरोसा दिखाया है। खास बात यह है कि लगातार तीसरे साल उनका निवेश 5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा है। विदेशी पूंजी के उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू संस्थागत निवेश बाजार को मजबूती देने के साथ बिकवाली के दबाव को भी संतुलित कर रहे हैं।

2026 में DII का निवेश 5.13 लाख करोड़ रुपये

स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कैलेंडर वर्ष 2026 में 7 अगस्त तक भारतीय इक्विटी बाजार में 5.13 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है। DII की श्रेणी में बैंक, घरेलू वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियां, पेंशन फंड और म्यूचुअल फंड शामिल हैं। पिछले साल यानी 2025 की समान अवधि में घरेलू संस्थागत निवेशकों का शुद्ध निवेश 4.48 लाख करोड़ रुपये रहा था। इस लिहाज से इस साल का निवेश स्तर काफी मजबूत है। 2025 के पूरे कैलेंडर वर्ष में DII ने भारतीय शेयर बाजार में कुल 7.88 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था। इससे पहले 2024 में घरेलू संस्थागत निवेशकों का कुल निवेश 5.26 लाख करोड़ रुपये रहा था। लगातार तीन वर्षों में 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश घरेलू पूंजी बाजार में बढ़ते भरोसे का संकेत माना जा रहा है।

36 महीनों में 19.21 लाख करोड़ का निवेश

घरेलू निवेशकों की ताकत को पिछले 36 महीनों के आंकड़ों से भी समझा जा सकता है। अगस्त 2023 से अब तक DII ने भारतीय इक्विटी बाजार में कुल 19.21 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसके विपरीत, इसी अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI ने करीब 10 लाख करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे हैं। ऐसे में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने विदेशी बिकवाली से पैदा होने वाले दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बाजार में विदेशी पूंजी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव के बावजूद DII की लगातार खरीदारी ने बाजार को अपेक्षाकृत स्थिर आधार दिया है। यही वजह है कि घरेलू निवेशकों को अब भारतीय इक्विटी बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख खिलाड़ियों में गिना जा रहा है।

म्यूचुअल फंड बना निवेश का बड़ा आधार

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और म्यूचुअल फंड के जरिये खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी DII निवेश की प्रमुख वजहों में शामिल है। इक्विटी और बैलेंस्ड फंड योजनाओं में लगातार निवेश आने से फंड हाउसों के पास शेयर बाजार में लगाने के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि म्यूचुअल फंड में व्यवस्थित निवेश योजनाओं समेत खुदरा भागीदारी बढ़ने से घरेलू पूंजी का प्रवाह मजबूत हुआ है। इससे बाजार में विदेशी निवेशकों के मुकाबले घरेलू निवेशकों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।

मजबूत अर्थव्यवस्था से बढ़ा भरोसा

विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय बाजार में निवेशकों का भरोसा कायम है। हाल के महीनों में जीएसटी संग्रह मजबूत रहा है और अर्थव्यवस्था से जुड़ी कोई बड़ी नकारात्मक स्थिति सामने नहीं आई है। इसके अलावा ऊर्जा कीमतों में नरमी, कॉरपोरेट आय में सुधार और 2024 के उच्च स्तरों की तुलना में शेयरों के मूल्यांकन में आया सुधार भी भारतीय बाजार को निवेशकों के लिए आकर्षक बना रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि वैश्विक जोखिमों में कमी आती है और घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत बने रहते हैं, तो आने वाले महीनों में DII निवेश का सिलसिला जारी रह सकता है।

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इन सेक्टरों में DII की ज्यादा खरीदारी

जून 2026 तिमाही के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कई प्रमुख सेक्टरों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। आंकड़ों के मुताबिक, उपभोक्ता क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, ऊर्जा, दूरसंचार, धातु और प्रौद्योगिकी कंपनियां DII की प्रमुख पसंद रहीं। वहीं दूसरी ओर, निजी बैंक, एनबीएफसी, कैपिटल गुड्स, केमिकल, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर और ऑटोमोबाइल शेयरों में घरेलू निवेशकों का निवेश अपेक्षाकृत कम रहा। सेक्टरवार यह रणनीति बताती है कि घरेलू संस्थागत निवेशक बाजार में केवल व्यापक स्तर पर खरीदारी नहीं कर रहे, बल्कि आर्थिक परिस्थितियों और कंपनियों की संभावनाओं को देखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में पूंजी का आवंटन भी कर रहे हैं।

विदेशी निवेशकों ने भी बदला रुख

इस बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII का रुख भी कुछ सकारात्मक होता दिखाई दे रहा है। लगातार चार महीने की बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों ने दोबारा खरीदारी शुरू की है। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी आगे भी बनी रहती है और घरेलू संस्थागत निवेश मजबूत रहता है, तो भारतीय शेयर बाजार को दोहरे स्तर पर सहारा मिल सकता है। इससे बाजार की धारणा मजबूत होने और निवेशकों के भरोसे में सुधार की संभावना है। फिलहाल घरेलू निवेशकों की लगातार बढ़ती भागीदारी भारतीय बाजार के लिए अहम सहारा बनी हुई है। विदेशी पूंजी के उतार-चढ़ाव के दौर में DII का यह मजबूत निवेश बाजार की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

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