ई25 का असर: FY31 तक 17.9 अरब लीटर हो सकती है भारत की एथेनॉल मांग
खबर सार :-
भारत में ई25 से FY31 तक एथेनॉल मांग 17.9 अरब लीटर पहुंच सकती है। मौजूदा क्षमता ई20-ई25 के लिए पर्याप्त है, लेकिन ई30 पर मांग 21.5 अरब लीटर होने से नई डिस्टिलेशन क्षमता, निवेश और फीडस्टॉक प्रबंधन की जरूरत बढ़ेगी।
खबर विस्तार : -
Ethanol Demand India: भारत का एथेनॉल उद्योग अब नई क्षमता खड़ी करने के शुरुआती दौर से आगे बढ़कर मौजूदा क्षमता के बेहतर इस्तेमाल के चरण में पहुंच गया है। ब्रिकवर्क रेटिंग्स की बुधवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, अगर देश में ई25 एथेनॉल ब्लेंडिंग लागू होती है तो वित्त वर्ष 2031 तक एथेनॉल की मांग बेस केस में बढ़कर 17.9 अरब लीटर हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक देश में मौजूदा डिस्टिलेशन क्षमता करीब 18.25 अरब लीटर है। यह क्षमता ई25 की संभावित मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है। बेस केस में मौजूदा क्षमता का करीब 98 प्रतिशत इस्तेमाल होने का अनुमान है। इसका मतलब है कि निकट अवधि में उद्योग को बड़े पैमाने पर नई क्षमता जोड़ने के बजाय मौजूदा संयंत्रों की क्षमता उपयोगिता बढ़ाने पर जोर देना पड़ सकता है।
ई20 पर मांग 14.3 अरब लीटर रहने का अनुमान
अगर एथेनॉल ब्लेंडिंग ई20 के स्तर पर बनी रहती है, तो बेयर केस में वित्त वर्ष 2031 तक मांग करीब 14.3 अरब लीटर रहने का अनुमान है। इस स्थिति में मौजूदा डिस्टिलेशन क्षमता का लगभग 78 प्रतिशत उपयोग होगा। यानी ई20 पर उद्योग के पास मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त अतिरिक्त क्षमता बनी रहेगी। वहीं, ब्लेंडिंग नीति अगर ई30 तक पहुंचती है तो तस्वीर बदल सकती है। रिपोर्ट के बुल केस अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2031 तक एथेनॉल की मांग 21.5 अरब लीटर तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा 18.25 अरब लीटर क्षमता से लगभग 18 प्रतिशत अधिक होगी। इस स्तर पर उद्योग को मौजूदा परिसंपत्तियों के बेहतर इस्तेमाल से आगे बढ़कर नई डिस्टिलेशन क्षमता में निवेश करना पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, ई30 वह महत्वपूर्ण स्तर होगा जहां अतिरिक्त पूंजीगत खर्च की जरूरत ज्यादा स्पष्ट हो जाएगी।
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ब्लेंडिंग नीति तय करेगी अगला निवेश चक्र
रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, आने वाले वर्षों में ब्लेंडिंग नीति की रफ्तार एथेनॉल उद्योग में अतिरिक्त पूंजीगत व्यय और वृद्धि का प्रमुख निर्धारक बनी रह सकती है। ई20 का लक्ष्य काफी हद तक पूरा होने और पर्याप्त क्षमता उपलब्ध होने के बाद कंपनियों का ध्यान क्षमता उपयोग, फीडस्टॉक का बेहतर मिश्रण और मौजूदा परिसंपत्तियों से आय बढ़ाने पर रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट में फीडस्टॉक के बदलते स्वरूप को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। ईएसवाई26 के पहले चरण के आवंटन में अनाज आधारित रूट की हिस्सेदारी 72 प्रतिशत, जबकि चीनी आधारित रूट की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत रही। यह 2021 के रोडमैप में निर्धारित 55:45 के चीनी-अनाज अनुपात से अलग है। कुल आवंटन में अकेले मक्के की हिस्सेदारी 45.7 प्रतिशत रही। हालांकि, अनाज आधारित डिस्टिलरीज पर फीडस्टॉक लागत का दबाव दिखाई दिया है। इन इकाइयों का EBITDA मार्जिन वित्त वर्ष 2021 के 9.2 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 6.7 प्रतिशत रह गया।
नियंत्रित खरीद और वित्तपोषण से क्रेडिट आउटलुक स्थिर
ब्रिकवर्क रेटिंग्स ने एथेनॉल सेक्टर का क्रेडिट आउटलुक स्थिर रखा है। इसके पीछे सरकार की नियंत्रित खरीद और मूल्य निर्धारण व्यवस्था, ई20 ब्लेंडिंग लक्ष्य की दिशा में प्रगति और वित्तीय संस्थानों का समर्थन प्रमुख कारक हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने एथेनॉल क्षेत्र के लिए 420 अरब रुपये से अधिक की मंजूरी दी थी। हालांकि, ई30 की दिशा में बढ़ने पर अतिरिक्त क्षमता के लिए नए निवेश की जरूरत बढ़ सकती है। कुल मिलाकर, उद्योग के सामने अगला चरण केवल उत्पादन बढ़ाने का नहीं, बल्कि उपलब्ध क्षमता, फीडस्टॉक लागत और परिसंपत्तियों की लाभप्रदता को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने का होगा।
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