भारत के ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनने की राह में ‘सिलिकॉन टू सिस्टम्स’ विजन पर जोर देना जरूरी
खबर सार :-
भारत के सेमीकंडक्टर विस्तार का अगला चरण चिप निर्माण से आगे पूरी वैल्यू चेन को जोड़ने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों के अनुसार डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग और एप्लिकेशन के बीच सहयोग से इकोसिस्टम मजबूत होगा।
खबर विस्तार : -
SemiconIndia 2026: भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर हब के रूप में स्थापित करने के लिए केवल किसी एक क्षेत्र में क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। उद्योग विशेषज्ञों ने पूरी वैल्यू चेन को एक साथ जोड़ते हुए उद्योग-स्तरीय सहयोग और समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई है। बुधवार को जारी आधिकारिक फैक्टशीट के मुताबिक, सेमीकॉन इंडिया 2026 में उद्योग जगत के नेताओं ने कहा कि इकोसिस्टम के अलग-अलग हिस्से अंततः एक साझा लक्ष्य की दिशा में काम कर रहे हैं—भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र तैयार करना।
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र फिलहाल विस्तार के नए चरण में है। बड़े निवेश, बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और भारत में वैश्विक कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी से इस इकोसिस्टम में तेजी आई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगले चरण की वृद्धि को केवल सेमीकंडक्टर निर्माण तक सीमित नहीं रखा जा सकता। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, कंपोनेंट्स, मटेरियल्स, चिप डिजाइन, पैकेजिंग और अंतिम उपयोग वाले एप्लिकेशन एक-दूसरे से तेजी से जुड़ रहे हैं। ऐसे में तकनीकी क्षमता के साथ-साथ इन क्षेत्रों के बीच सहयोग भी महत्वपूर्ण हो गया है।
ये भी पढ़ें...चिपइन से जुड़े 500 से अधिक संस्थान, 6 राज्यों में 12 प्रोजेक्ट्स; ₹1.64 लाख करोड़ का महा-निवेश
चिप से सिस्टम तक जुड़ी पूरी वैल्यू चेन
चर्चा में टेक्नोलॉजी क्षेत्रों के बीच बढ़ते तालमेल को प्रमुख विषय के तौर पर रखा गया। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, चिप का वास्तविक मूल्य उसके डिवाइस, उत्पाद और सिस्टम में प्रभावी एकीकरण से सामने आता है। इसी तरह फैब्रिकेशन के लिए सहायक मटेरियल और उपकरणों की जरूरत होती है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग का संबंध पैकेजिंग, टेस्टिंग और व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स क्षमताओं से जुड़ा है। इस आपसी निर्भरता को देखते हुए पूरी वैल्यू चेन में मजबूत संपर्क और व्यवस्थित सहयोग विकसित करने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि अलग-अलग संगठनों की क्षमताओं को साझा मंच पर लाकर राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सामूहिक कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सकता है।
साझा मंच और लगातार संवाद पर जोर
उद्योग जगत के नेताओं ने एक स्थायी कम्युनिटी मैकेनिज्म विकसित करने के विचार पर भी चर्चा की। इसका उद्देश्य अलग-अलग संगठनों के बीच लगातार संवाद, समन्वय और सहयोग को बढ़ावा देना होगा। मौजूदा संस्थाओं की ताकत और विशेषज्ञता को जोड़कर ऐसा मंच तैयार करने की बात कही गई, जहां वैल्यू चेन के साझा मुद्दों पर मिलकर काम किया जा सके। इसी संदर्भ में व्यापक ‘सिलिकॉन टू सिस्टम्स’ विजन को महत्वपूर्ण बताया गया। इस दृष्टिकोण में डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस को एक एकीकृत इकोसिस्टम के हिस्से के रूप में देखा जाता है। इसका उद्देश्य भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षमताओं के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना है।
सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से ज्यादा प्रदर्शक
सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से अधिक प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया। इनमें करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल थीं। यह भागीदारी भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में वैश्विक कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी और रुचि को दर्शाती है। कार्यक्रम के दौरान मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन, पैकेजिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी), लॉजिस्टिक्स और स्किलिंग से जुड़े 56 एमओयू, रणनीतिक पहल और उद्योग संबंधी घोषणाएं भी हुईं। सरकार की पीएलआई योजनाएं और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने तथा मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने के प्रयासों का हिस्सा हैं। आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। सितंबर 2026 तक इनमें से पांच कमर्शियल सेमीकंडक्टर यूनिट परिचालन में आ चुकी हैं।
ये भी पढ़ें....सेमीकॉन इंडिया 2026: डिजाइन और विनिर्माण में बढ़ा भारत का दम, ग्लोबल लीडर्स ने माना सेमीकंडक्टर पावरहाउस
FAQ (पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न)...
1.भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने के लिए क्या जरूरी है?
केवल एक क्षेत्र में क्षमता बढ़ाना काफी नहीं है, बल्कि पूरी वैल्यू चेन में उद्योग-स्तरीय सहयोग होना जरूरी है।
2. सेमीकॉन इंडिया 2026 में उद्योग जगत के नेताओं ने क्या कहा?
नेताओं ने कहा कि इकोसिस्टम के सभी हिस्से मिलकर भारत में एक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी (Globally Competitive) क्षेत्र तैयार कर रहे हैं।
3. इस पूरे उद्योग का साझा लक्ष्य क्या है?
भारत को दुनिया के सामने एक मजबूत और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स व सेमीकंडक्टर हब के रूप में स्थापित करना।
अन्य प्रमुख खबरें
-
एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत ने दिखाई आर्थिक ताकत
2026-11-07
-
दिवाली पर दिल्ली का कारोबार 80 हजार करोड़ पहुंचने की उम्मीद
2026-11-07
-
रुपये ने लगाई छलांग: 6 महीने के उच्च शिखर पर पहुंची भारतीय मुद्रा
2026-11-06
-
गोल्ड ETF का क्रेज: 3 साल में निवेशक 2.6 गुना बढ़े
2026-11-06
-
एनसीएलटी का फैसला: धूत दिवालिया, SBI वसूलेगा ₹12,668 करोड़
2026-11-06
-
वॉल स्ट्रीट की गिरावट से एशियाई बाजारों में मचा हड़कंप
2026-11-06
-
धनतेरस पर खुशखबरी! सोना ₹2,651 और चांदी ₹4,555 सस्ती
2026-11-06
-
Dhanteras 2026: धनतेरस पर सज गए बाजार, आज जमकर होगी धनवर्षा
2026-11-06
-
धनतेरस से पहले शेयर बाजार में तूफानी तेजी, सेंसेक्स 1600 अंक उछला
2026-11-05
-
Delhi : कांग्रेस को कोस रहे व्यापारी, व्यापार चौपट के लिए बताया जिम्मेदार
2026-11-05
-
चीन की झालरों की शहरों में भरमार, पीतल के बर्तन में पश्चिम यूपी छाया
2026-11-04
-
कुम्हार महिलाओं के काम आया हुनर, वाराणसी में जलाए जाते हैं लाखों दीये
2026-11-04
-
ग्लोबल मार्केट में हलचल, एशियाई बाजारों में बिकवाली; गिफ्ट निफ्टी उछला
2026-11-03
-
त्योहारी सीजन में महंगा हुआ सोना, 510 रुपये तक बढ़े भाव; चांदी स्थिर
2026-11-03
-
सेंसेक्स में 700 अंकों की छलांग, निफ्टी भी उछला; बाजार गुलजार
2026-11-03