चिपइन से जुड़े 500 से अधिक संस्थान, 6 राज्यों में 12 प्रोजेक्ट्स; ₹1.64 लाख करोड़ का महा-निवेश

खबर सार :-

चिपइन सेंटर से 1 लाख+ इंजीनियरों का जुड़ना भारत की बढ़ती चिप डिजाइन क्षमता को दिखाता है। 300+ डिजाइन, 4 करोड़+ टूल-यूज घंटे और 12 परियोजनाएं सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के विस्तार का संकेत देती हैं।
1 लाख इंजीनियर, 300+ चिप डिजाइन: भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को रफ्तार

खबर विस्तार : -

Semiconductor Ecosystem 2026:  भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में चिपइन सेंटर ने बड़ा विस्तार दर्ज किया है। सरकार के अनुसार, सी2एस (चिप्स टू स्टार्टअप) कार्यक्रम और डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना के तहत देशभर के 1 लाख से अधिक इंजीनियर चिपइन सेंटर के प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। ये इंजीनियर 500 से अधिक संगठनों से संबंधित हैं, जिनमें करीब 400 शैक्षणिक संस्थान और 100 स्टार्टअप शामिल हैं।

इन इंजीनियरों, छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को उन्नत चिप डिजाइन टूल्स, चिप डिजाइन एवं फेब्रिकेशन सेवाओं और विशेष प्रशिक्षण सुविधाओं तक पहुंच दी गई है। सरकार के मुताबिक, इसका उद्देश्य भारत में चिप डिजाइन की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है।

300 से ज्यादा चिप डिजाइन तैयार

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, चिपइन सेंटर से जुड़े संस्थानों और स्टार्टअप्स ने अब तक 300 से अधिक चिप डिजाइन विकसित किए हैं। इनमें से इन डिजाइनों को भारत और विदेशों की फाउंड्री में निर्माण के लिए भेजा गया है। वहीं, चिप डिजाइन टूल्स के इस्तेमाल का आंकड़ा 4 करोड़ घंटे से अधिक पहुंच चुका है। सरकार का कहना है कि इस पहल के चलते चिपइन सेंटर में दुनिया के सबसे बड़े केंद्रीकृत चिप डिजाइन उपयोगकर्ता समूहों में से एक विकसित हुआ है। यह समूह भारत में तेजी से विकसित हो रही डिजाइन क्षमता और सेमीकंडक्टर प्रतिभा के विस्तार को दर्शाता है।

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छात्रों से स्टार्टअप तक डिजाइन क्षमता पर फोकस

चिप्स टू स्टार्टअप (सी2एस) कार्यक्रम का जोर छात्रों, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच सेमीकंडक्टर डिजाइन कौशल विकसित करने पर है। कार्यक्रम के जरिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित चिप डिजाइनर तैयार करने और देश की इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन क्षमता को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। दूसरी ओर, डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना घरेलू चिप डिजाइन परियोजनाओं को समर्थन देती है। इसके तहत वीडियो सर्विलांस, ड्रोन डिटेक्शन, ऊर्जा मीटर, माइक्रोप्रोसेसर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ब्रॉडबैंड और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) सिस्टम-ऑन-चिप (एसओसी) जैसे क्षेत्रों में परियोजनाओं को सहायता मिली है।

6 राज्यों में 12 परियोजनाओं को मंजूरी

सरकार के अनुसार, सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत अब तक 6 राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं में ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव शामिल हैं। इनमें से तीन इकाइयों ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। सरकार के मुताबिक, सेमीकॉन इंडिया 2026 ने डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग और संबंधित प्रौद्योगिकियों में भारत की विकसित होती क्षमताओं को सामने रखा है। सेमीकंडक्टर उद्योग केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है। इसमें डिजाइनर, फेब्रिकेशन यूनिट, पैकेजिंग और टेस्टिंग सुविधाएं, उपकरण व सामग्री आपूर्तिकर्ता, शोध संस्थान, स्टार्टअप्स, सिस्टम कंपनियां और कुशल कार्यबल सभी महत्वपूर्ण घटक हैं। इस पूरी वैल्यू चेन को एक साथ विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि घरेलू नवाचार को वैश्विक सेमीकंडक्टर अवसरों से जोड़ा जा सके। चिपइन सेंटर से जुड़े इंजीनियरों और संस्थानों का बढ़ता नेटवर्क इसी व्यापक इकोसिस्टम निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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