चिप से सप्लाई चेन तक: भारत में तैयार हो रहा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, ग्लोबल मार्केट पर छाने की बड़ी तैयारी!

खबर सार :-

भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में केवल चिप निर्माण क्षमता बढ़ाने के बजाय पूरा इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। फैब, पैकेजिंग, टेस्टिंग, डिजाइन, सप्लाई चेन और स्किल डेवलपमेंट को एक साथ बढ़ावा मिलने से देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता मजबूत हो सकती है। छह राज्यों में परियोजनाओं, उत्पादन शुरू होने और डिजाइनिंग में बढ़ती भागीदारी से भारत के वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनने की संभावनाएं लगातार मजबूत हो रही हैं।
चिप से सप्लाई चेन तक: भारत में तैयार हो रहा पूरा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम

खबर विस्तार : -

Semiconductor Ecosystem : केंद्र सरकार मेक इन इंडिया अभियान के तहत मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देने में जुटी है। सरकार ने अपना खजाना खोल दिया है, स्पष्ट कहा है कि किसी भी क्षेत्र में बजट की कमी से कोई काम प्रभावित नहीं होगा। कृषि, रक्षा, चिकित्सा और विज्ञान समेत हर क्षेत्र में लगातार रिसर्च हो रही हैं। स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में देश में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तेजी से आकार ले रहा है। सरकार का जोर फैब, पैकेजिंग, टेस्टिंग से लेकर डिजाइन और स्किल डेवलपमेंट पर है। छह राज्यों में 12 परियोजनाओं पर 1.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया जा रहा है। यह निश्चित तौर पर एक बड़ी उपलब्धि है।

वैश्विक भागीदारी और निवेश को बढ़ावा

मोदी सरकार की रणनीति अब केवल चिप निर्माण के लिए फैक्ट्रियां स्थापित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि चिप डिजाइनिंग, पैकेजिंग, टेस्टिंग, निर्माण उपकरण, कच्चे माल, सप्लाई चेन, रिसर्च और कुशल प्रतिभाओं के विकास को भी साथ लेकर आगे बढ़ रही है। सेमीकॉन इंडिया 2026 के शुरू होने से पहले जारी सरकारी फैक्टशीट में यह जानकारी दी गई है। तीन दिवसीय सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को करेंगे। इस साल कार्यक्रम की थीम “सिलिकॉन से सिस्टम तक: पूरा इकोसिस्टम बनाना है” रखी गई है। द्वारका स्थित यशोभूमि में होने वाले आयोजन में दुनिया की प्रमुख चिप कंपनियों के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता और निवेशक शामिल होंगे। इससे भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में वैश्विक भागीदारी और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

76 हजार करोड़ से शुरू हुई यात्रा

भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत 2021 में सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के साथ की थी। सेमीकॉन 1.0 के तहत 76,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। इसका उद्देश्य चिप डिजाइन और निर्माण से लेकर पैकेजिंग, टेस्टिंग, मशीनरी, कच्चे माल और प्रशिक्षित कर्मचारियों तक पूरी वैल्यू चेन तैयार करना था। सरकार ने जुलाई 2026 में सेमीकॉन 2.0 को भी मंजूरी दी। इसके तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कार्यक्रम छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है। इनमें चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़ी मशीनरी और सामग्री, चिप फैब्रिकेशन प्लांट, आधुनिक पैकेजिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और कुशल प्रतिभाओं का विकास शामिल है।

छह राज्यों में 12 परियोजनाएं

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं में 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता है। इनमें सिलिकॉन और कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट, डिस्प्ले निर्माण तथा आधुनिक पैकेजिंग जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें से तीन संयंत्रों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है। यह उपलब्धि भारत की सेमीकंडक्टर नीति के लिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि चिप निर्माण से जुड़ी योजनाएं अब केवल नीति और घोषणाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्पादन के स्तर तक पहुंच रही हैं।

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डिजाइनिंग में भी बढ़ी ताकत

भारत का फोकस चिप डिजाइनिंग की क्षमता बढ़ाने पर भी है। ‘चिप्स टू स्टार्टअप’ कार्यक्रम के तहत इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन यानी ईडीए सॉफ्टवेयर और उपकरण अब तक 320 शैक्षणिक संस्थानों में उपलब्ध कराए गए हैं। इसके जरिए 68,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वहीं, 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को आर्थिक सहायता के लिए मंजूरी मिली है। डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव यानी डीएलआई योजना के तहत 105 स्टार्टअप और छोटे-मझोले उद्यमों को ईडीए टूल्स के लिए सहायता दी गई है। अप्रैल 2026 तक 75 संस्थानों ने 211 चिप डिजाइन तैयार कर उन्हें उत्पादन से पहले के महत्वपूर्ण चरण ‘टेप-आउट’ तक पहुंचाया था। यह बताता है कि भारत में चिप डिजाइनिंग की क्षमता अब कुछ चुनिंदा बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं रही है।

500 से ज्यादा संस्थानों को मिल रही सुविधा

देशभर में चिप डिजाइन की सुविधाओं को पहुंचाने के लिए डी-डीएसी में ‘चिप्स टू स्टार्टअप’ और डीएलआई योजना के तहत चिपइन सेंटर स्थापित किया गया है। यह राष्ट्रीय स्तर की साझा सुविधा है, जहां इंजीनियरों और संस्थानों को आधुनिक चिप डिजाइन टूल्स, चिप निर्माण सेवाओं और विशेष प्रशिक्षण की सुविधा मिलती है। सरकार के मुताबिक, चिपइन सेंटर की सुविधाओं का लाभ 500 से अधिक संस्थानों के एक लाख से ज्यादा इंजीनियर उठा चुके हैं। इनमें 400 शैक्षणिक संस्थान और 100 स्टार्टअप शामिल हैं। इन संस्थानों ने मिलकर 300 से ज्यादा चिप डिजाइन तैयार किए हैं। इन चिप्स को मोहाली स्थित एससीएल और विदेशों की आधुनिक चिप फैक्ट्रियों में निर्माण के लिए भेजा गया है। भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति अब फैब से आगे बढ़कर डिजाइन, पैकेजिंग, टेस्टिंग, उपकरण, सप्लाई चेन और प्रतिभा विकास को जोड़ रही है। 12 परियोजनाओं में बड़े निवेश, तीन संयंत्रों में व्यावसायिक उत्पादन और सैकड़ों संस्थानों में डिजाइन सुविधाओं का विस्तार इस बदलाव को रेखांकित करता है। सेमीकॉन 2.0 के जरिए सरकार इस आधार को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)...

1.सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कितना निवेश हो रहा है?

छह राज्यों में 12 परियोजनाओं पर ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक का निवेश हो रहा है।

2.सेमीकॉन 2.0 के लिए कितना बजट है?

सेमीकॉन 2.0 के तहत ₹1.27 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है।

3.भारत में चिप डिजाइनिंग में कितनी प्रगति हुई है?

320 संस्थानों में ईडीए टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं और 68,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षण मिला है।

 

 

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